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विश्व आभार दिवस 21 सितंबर: 1965 में हवाई से हुई शुरुआत, जानिए कृतज्ञता का वैज्ञानिक महत्व

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विश्व आभार दिवस 21 सितंबर: 1965 में हवाई से हुई शुरुआत, जानिए कृतज्ञता का वैज्ञानिक महत्व

सारांश

हर साल 21 सितंबर को विश्व आभार दिवस मनाया जाता है — एक ऐसा दिन जो 1965 में हवाई के एक डिनर टेबल से उपजा और आज पूरी दुनिया में फैल चुका है। अध्ययन बताते हैं कि कृतज्ञता का नियमित अभ्यास अवसाद की संभावना 35% तक घटा सकता है — यह सिर्फ परंपरा नहीं, विज्ञान भी है।

मुख्य बातें

विश्व आभार दिवस प्रतिवर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है।
इस दिवस की शुरुआत 1965 में हवाई में हुई, जब आध्यात्मिक गुरु श्री चिन्मय ने अंतरराष्ट्रीय कृतज्ञता दिवस का विचार प्रस्तुत किया।
पहला आधिकारिक विश्व आभार दिवस 21 सितंबर 1966 को मनाया गया।
अध्ययनों के अनुमान के अनुसार आभार के अभ्यास से अवसाद की संभावना 35 प्रतिशत तक घट सकती है।
कार्यस्थल पर आभार संस्कृति से कर्मचारियों की उत्पादकता और टीमवर्क में सुधार होता है।
नियमित कृतज्ञता से कोर्टिसोल का स्तर घटता है, नींद बेहतर होती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार आता है।

हर साल 21 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व आभार दिवस कृतज्ञता की उस सार्वभौमिक भावना का उत्सव है जो मनुष्य को एक-दूसरे से जोड़ती है। यह दिन न केवल व्यक्तिगत स्तर पर आत्मबल बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक एकता और सकारात्मकता को भी नई ऊर्जा देता है। आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में, जहाँ रिश्ते अक्सर औपचारिकता में सिमट जाते हैं, यह दिवस हमें याद दिलाता है कि आभार व्यक्त करना एक जीवनशैली है।

विश्व आभार दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस दिवस की नींव 1965 में हवाई में आयोजित एक थैंक्सगिविंग डिनर के दौरान रखी गई। उस अवसर पर आध्यात्मिक गुरु श्री चिन्मय ने एक अंतरराष्ट्रीय कृतज्ञता दिवस का विचार प्रस्तुत किया, जिसमें दुनिया भर के लोग मिलकर जीवन की अनमोल चीज़ों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकें।

अगले ही वर्ष, उस डिनर में उपस्थित लोगों ने 21 सितंबर 1966 को पहला विश्व आभार दिवस मनाया। तब से यह तिथि विश्वभर में कृतज्ञता की अभिव्यक्ति का प्रतीक बन गई है और प्रतिवर्ष लाखों लोग इसे विविध तरीकों से मनाते हैं।

कृतज्ञता का वैज्ञानिक आधार

अध्ययनों के अनुसार नियमित रूप से आभार व्यक्त करने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन — जो तनाव का प्रमुख कारण माना जाता है — का स्तर उल्लेखनीय रूप से घटता है। इसके साथ ही नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।

शोध के अनुमानों के अनुसार आभार के नियमित अभ्यास से अवसाद (डिप्रेशन) की संभावना 35 प्रतिशत तक कम हो सकती है। यह तथ्य मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में इस दिवस की प्रासंगिकता को और भी गहरा बना देता है।

कार्यस्थल और सामाजिक जीवन पर असर

किसी को 'धन्यवाद' कहना उसे महत्व और सराहना का एहसास दिलाता है, जिससे उसके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आता है। कार्यस्थल पर जहाँ आभार की संस्कृति अपनाई जाती है, वहाँ कर्मचारियों की उत्पादकता और टीमवर्क में भी वृद्धि देखी गई है।

गौरतलब है कि आज की डिजिटल दुनिया में, जहाँ संवाद तेज़ है लेकिन गहराई कम, आभार की अभिव्यक्ति रिश्तों को मज़बूत बनाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनती जा रही है।

विश्व आभार दिवस मनाने के तरीके

इस दिन को सार्थक बनाने के कई व्यावहारिक तरीके हैं। किसी स्थानीय दान संस्था में स्वयंसेवा करना, परिवार के साथ भोजन करते हुए हर सदस्य का धन्यवाद करना, और प्रियजनों को हस्तलिखित धन्यवाद पत्र भेजना इस दिन को विशेष बना सकते हैं।

इसके अलावा किसी नेक कार्य के लिए दान देना, किसी बुज़ुर्ग पड़ोसी या रिश्तेदार से मिलने जाना, और जीवन में मौजूद अच्छी चीज़ों — स्वास्थ्य, घर, परिवार और मित्रों — पर कुछ क्षण विचार करना भी कृतज्ञता के सशक्त माध्यम हैं।

आभार: एक भावना से परे, एक जीवनदर्शन

विश्व आभार दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आभार महज़ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने की शक्ति रखती है। जब हम दूसरों की उपस्थिति और योगदान को स्वीकार करते हैं, तो न केवल उनका, बल्कि हमारा अपना जीवन भी समृद्ध होता है।

आने वाले समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ, विश्व आभार दिवस की प्रासंगिकता और भी बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब भारत में अवसाद और चिंता के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, कृतज्ञता का वैज्ञानिक पक्ष महत्वपूर्ण है — लेकिन इसे केवल एक दिन की रस्म न बनाकर शिक्षा और कार्यस्थल नीतियों में शामिल करना ज़रूरी है। आभार को 'ट्रेंड' से 'आदत' बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास की दरकार है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व आभार दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व आभार दिवस हर साल 21 सितंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में कृतज्ञता की भावना को प्रोत्साहित करना और आपसी संबंधों को मज़बूत बनाना है।
विश्व आभार दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
इस दिवस का विचार 1965 में हवाई में एक थैंक्सगिविंग डिनर के दौरान आध्यात्मिक गुरु श्री चिन्मय ने दिया था। पहला विश्व आभार दिवस 21 सितंबर 1966 को मनाया गया और तब से यह परंपरा जारी है।
कृतज्ञता व्यक्त करने के क्या वैज्ञानिक फायदे हैं?
अध्ययनों के अनुसार नियमित कृतज्ञता से कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर घटता है, नींद बेहतर होती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार आता है। अनुमान है कि इससे अवसाद की संभावना 35 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
विश्व आभार दिवस कैसे मनाया जा सकता है?
इस दिन को सार्थक बनाने के लिए धन्यवाद पत्र लिखना, किसी दान संस्था में स्वयंसेवा करना, बुज़ुर्गों से मिलने जाना और परिवार के साथ भोजन करते हुए हर सदस्य का आभार व्यक्त करना प्रमुख तरीके हैं।
कार्यस्थल पर आभार संस्कृति का क्या प्रभाव पड़ता है?
कार्यस्थल पर आभार की संस्कृति अपनाने से कर्मचारियों की उत्पादकता और टीमवर्क में सुधार होता है। किसी को महत्व और सराहना का एहसास दिलाने से उसके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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