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विश्व नेत्रदान दिवस 10 जून: मृत्यु के बाद भी रोशनी दे सकती हैं आँखें, जानें कैसे करें संकल्प

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विश्व नेत्रदान दिवस 10 जून: मृत्यु के बाद भी रोशनी दे सकती हैं आँखें, जानें कैसे करें संकल्प

सारांश

मृत्यु के बाद भी आँखें जीवन दे सकती हैं — यही संदेश है विश्व नेत्रदान दिवस का। आधुनिक लैमेलर केराटोप्लास्टी तकनीक से एक दाता दो से अधिक लोगों को रोशनी दे सकता है। NOTTO के ऑनलाइन पोर्टल से संकल्प लेना अब बेहद आसान है।

मुख्य बातें

विश्व नेत्रदान दिवस प्रतिवर्ष 10 जून को मनाया जाता है; भारत में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक आयोजित होता है।
एक मृत दाता की आँखों से आधुनिक 'घटक सर्जरी' तकनीक द्वारा दो या अधिक नेत्रहीन व्यक्तियों की दृष्टि बहाल की जा सकती है।
आधुनिक लैमेलर केराटोप्लास्टी की क्लिनिकल सफलता दर 90% से अधिक बताई जाती है और ग्राफ्ट रिजेक्शन का जोखिम न्यूनतम है।
मृत्यु के 6 घंटे के भीतर कॉर्निया निकालना आवश्यक है — समय नेत्रदान में सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
NOTTO की वेबसाइट पर आधिकारिक पहचान पत्र के साथ ऑनलाइन नेत्रदान संकल्प लिया जा सकता है।
नेत्रदान के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है; परिवार के सदस्य भी मृत्यु के बाद सहमति दे सकते हैं।

विश्व नेत्रदान दिवस हर वर्ष 10 जून को मनाया जाता है — एक ऐसा अवसर जो हमें याद दिलाता है कि मृत्यु के बाद भी एक व्यक्ति की आँखें किसी नेत्रहीन की अंधेरी दुनिया में उजाला भर सकती हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, एक मृत दाता की आँखों से आधुनिक 'घटक सर्जरी' तकनीक के माध्यम से दो या अधिक व्यक्तियों की दृष्टि बहाल की जा सकती है। भारत में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा भी आयोजित किया जाता है, जो इसी मानवीय संकल्प को समर्पित है।

आधुनिक तकनीक ने बदली नेत्र प्रत्यारोपण की तस्वीर

पहले कॉर्निया प्रत्यारोपण में पूरी परत बदली जाती थी — इस प्रक्रिया को पेनिट्रेटिंग केराटोप्लास्टी कहा जाता था। आज की आधुनिक नेत्र चिकित्सा 'लैमेलर केराटोप्लास्टी' की ओर स्थानांतरित हो चुकी है, जिसमें कॉर्निया की केवल वही परत बदली जाती है जो क्षतिग्रस्त हो। बताया जाता है कि इस तकनीक की क्लिनिकल सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक है और ग्राफ्ट रिजेक्शन — यानी शरीर द्वारा प्रत्यारोपित ऊतक को अस्वीकार करने — का जोखिम भी न्यूनतम हो जाता है।

नेत्रदान से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

अंग और ऊतक दान के क्षेत्र में राष्ट्रीय नोडल एजेंसी राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने नेत्रदान को लेकर समाज में प्रचलित कई भ्रांतियों को खारिज किया है।

मिथक: बुजुर्ग व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते। सत्य: नेत्रदान के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है। यदि कॉर्निया स्वस्थ और पारदर्शी है, तो किसी भी उम्र में दान संभव है।

मिथक: आँखें निकालने से चेहरा विकृत हो जाता है। सत्य: यह एक सुरक्षित और सम्मानजनक प्रक्रिया है। चिकित्सक केवल कॉर्निया निकालते हैं। यदि पूरा नेत्रगोलक निकालना आवश्यक हो, तो कृत्रिम प्लास्टिक प्रोस्थेटिक आँख लगाई जाती है, जिससे चेहरा पूरी तरह सामान्य दिखता है।

मिथक: जीवनकाल में संकल्प न लिया हो तो दान नहीं हो सकता। सत्य: मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य या कानूनी उत्तराधिकारी आपसी सहमति से नेत्रदान करवा सकते हैं।

ऑनलाइन पंजीकरण: संकल्प लेना अब और आसान

डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत NOTTO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कोई भी नागरिक ऑनलाइन नेत्रदान का संकल्प ले सकता है। इस प्रक्रिया में एक वैध आधिकारिक पहचान पत्र की आवश्यकता होती है।

समय है सबसे महत्वपूर्ण कारक

नेत्रदान में समय की भूमिका निर्णायक होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दाता की मृत्यु के 6 घंटे के भीतर कॉर्निया निकाल लिया जाना चाहिए, ताकि उसकी उपयोगिता सुनिश्चित हो सके। यह समय-सीमा परिवार की त्वरित सहमति और नज़दीकी नेत्र बैंक से शीघ्र संपर्क को अनिवार्य बनाती है।

गौरतलब है कि भारत में नेत्रहीनता की समस्या अभी भी व्यापक है और नेत्रदान की दर अपेक्षित स्तर से काफी कम है। ऐसे में विश्व नेत्रदान दिवस जैसे अवसर जागरूकता बढ़ाने और इस जीवनदायी परंपरा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी कॉर्निया की माँग और आपूर्ति में बड़ा अंतर बना हुआ है। NOTTO का डिजिटल पंजीकरण सही दिशा में कदम है, लेकिन असली बाधा तकनीकी नहीं, सामाजिक है — परिवारों की झिझक और मिथकों पर आधारित अविश्वास। जब तक अस्पताल स्तर पर प्रशिक्षित काउंसलर और नेत्र बैंकों की पर्याप्त उपस्थिति नहीं होगी, संकल्प-पत्र और पोर्टल केवल कागज़ी आँकड़े बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व नेत्रदान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व नेत्रदान दिवस प्रतिवर्ष 10 जून को मनाया जाता है, ताकि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने के लिए प्रेरित किया जा सके। भारत में इसी उद्देश्य से 25 अगस्त से 8 सितंबर तक राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा भी आयोजित होता है।
नेत्रदान के बाद कितने लोगों को रोशनी मिल सकती है?
आधुनिक 'घटक सर्जरी' तकनीक के माध्यम से एक मृत दाता की आँखों से दो या अधिक नेत्रहीन व्यक्तियों की दृष्टि बहाल की जा सकती है। लैमेलर केराटोप्लास्टी में कॉर्निया की केवल क्षतिग्रस्त परत बदली जाती है, जिससे एक दान से अधिकतम लाभ संभव होता है।
नेत्रदान के लिए ऑनलाइन संकल्प कैसे लें?
NOTTO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एक वैध सरकारी पहचान पत्र के साथ कोई भी नागरिक ऑनलाइन नेत्रदान का संकल्प ले सकता है। यह प्रक्रिया डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत सरल और निःशुल्क है।
क्या बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति नेत्रदान कर सकते हैं?
नेत्रदान के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है — यदि कॉर्निया स्वस्थ और पारदर्शी है, तो किसी भी उम्र में दान संभव है। NOTTO के अनुसार, मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी सामान्य बीमारियाँ नेत्रदान में बाधा नहीं बनतीं।
नेत्रदान में समय की सीमा क्या है?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दाता की मृत्यु के 6 घंटे के भीतर कॉर्निया निकाल लिया जाना चाहिए। इसीलिए परिवार की त्वरित सहमति और नज़दीकी नेत्र बैंक से तत्काल संपर्क अत्यंत आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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