उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का अपील: अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर वनों की रक्षा करें
सारांश
Key Takeaways
- वनों का संरक्षण
- उपराष्ट्रपति की अपील से वनों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
- हर साल एक विशेष थीम तय की जाती है।
- वन आर्थिक समृद्धि का आधार हैं।
- वनों के संरक्षण में सभी की भागीदारी आवश्यक है।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को सभी नागरिकों से अपील की कि वे वनों के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लें। उन्होंने बताया कि वन न केवल हमारे ग्रह के 'फेफड़े' और जैव विविधता के लिए आवश्यक हैं, बल्कि ये अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की भलाई के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं, रोजगार सृजन करते हैं, गरीबी को कम करते हैं और खाद्य प्रणालियों को सुदृढ़ बनाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने सामाजिक मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर लिखा, "अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर, आइए हम अपनी वन संपदा का सम्मान करें और उसकी रक्षा करें। साथ ही, इन अनमोल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पुनरुद्धार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं, ताकि सभी के लिए एक अधिक हरित, समावेशी और सुदृढ़ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।"
हर साल विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च को मनाया जाता है। इसे 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित किया गया था। इस दिन का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में वनों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में उनकी भूमिका को रेखांकित करना है।
हर वर्ष इस दिवस के लिए एक विशेष थीम भी निर्धारित की जाती है, जिसे वनों पर सहयोगात्मक भागीदारी द्वारा चुना जाता है। वर्ष 2026 की थीम 'वन और अर्थव्यवस्थाएं' होगी, जो दर्शाती है कि वन किस प्रकार आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देते हैं, लोगों की आजीविका को सहारा देते हैं और एक सतत जैव-अर्थव्यवस्था के लिए प्रकृति आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं।
2025 की थीम 'वन और भोजन' थी, जिसमें खाद्य सुरक्षा और पोषण में वनों के योगदान पर जोर दिया गया। 2024 में 'वन और नवाचार' थीम के तहत सैटेलाइट मॉनिटरिंग जैसी नई तकनीकों से वनों की कटाई रोकने के उपायों पर चर्चा की गई थी।