मणिपुर सरकार ने 'निंगोल वन पहल' का शुभारंभ कर वन संरक्षण को दिया नया आयाम

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मणिपुर सरकार ने 'निंगोल वन पहल' का शुभारंभ कर वन संरक्षण को दिया नया आयाम

सारांश

मणिपुर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर 'निंगोल वन पहल' लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य वन संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है।

मुख्य बातें

निंगोल वन पहल का शुभारंभ सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका वन संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण

इम्फाल, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर वनों की सुरक्षा, वनों की कटाई को रोकने और अवैध गतिविधियों, जैसे कि अफीम की खेती पर लगाम लगाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर "निंगोल वन पहल" का उद्घाटन हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य वन संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। यह पहल प्रकृति के संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और सतत विकास में महिलाओं (निंगोल) की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराग बाजपेयी ने बताया कि इस तरह की पहल राज्य के सभी 16 जिलों में लागू की जाएगी।

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के वरिष्ठ अधिकारी बाजपेयी ने सभा में कहा कि वन मणिपुर की आर्थिक आधारशिला हैं और राज्य का 74 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। वन आजीविका का स्रोत हैं, खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं, और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) के तहत आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित 11 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत का संचालन महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह राज्य की आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है और निंगोल वन पहल के लक्ष्य को सुदृढ़ करता है।

बाजपेयी ने कहा कि स्थानीय समुदायों को अतिरिक्त आजीविका सहायता प्रदान करने के लिए वीडीवीके की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने मानव निर्मित वन आग, अवैध पहाड़ी मिट्टी की खुदाई, अनधिकृत पत्थर और चट्टानों का निष्कर्षण और अवैध अफीम की खेती पर चिंता व्यक्त करते हुए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने उल्लेख किया कि इस वर्ष पहाड़ी जिलों में अवैध अफीम की खेती के अंतर्गत 970 हेक्टेयर भूमि का विनाश किया गया है। इन पुनः प्राप्त क्षेत्रों में बांस के बागानों और आवश्यक तेल उत्पादक फसलों के लिए उपयोग की योजना है।

बाजपेयी ने बताया कि राज्य में वन 1.26 लाख से अधिक सूक्ष्म और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का समर्थन करते हैं, जबकि लगभग 2.44 लाख कारीगर फाइबर और प्राकृतिक रंगों जैसे वन-आधारित कच्चे माल पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा कि ये केवल पर्यावरणीय संपदा नहीं हैं, बल्कि सामान्य और प्रतिकूल परिस्थितियों में समुदायों के लिए सहारा देने वाले मुख्य संसाधन भी हैं। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए वनों के संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।

इस कार्यक्रम का समापन वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वन दिवस का पालन वन संसाधनों की रक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने की साझा जिम्मेदारी को याद दिलाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निंगोल वन पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
निंगोल वन पहल का मुख्य उद्देश्य वन संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना और महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाना है।
इस पहल के तहत कौन-कौन सी गतिविधियाँ शामिल हैं?
इस पहल में वनों की सुरक्षा, वनों की कटाई को रोकना और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण शामिल हैं।
मणिपुर में वनों का क्षेत्रफल क्या है?
मणिपुर का 74 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है।
क्या महिलाओं को इस पहल में शामिल किया गया है?
हाँ, महिलाओं की भूमिका को इस पहल में महत्वपूर्ण माना गया है और लगभग 95 प्रतिशत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का संचालन महिलाएं करती हैं।
क्या सरकार ने अवैध अफीम की खेती को रोकने के लिए कदम उठाए हैं?
जी हाँ, इस वर्ष 970 हेक्टेयर भूमि को अवैध अफीम की खेती के खिलाफ नष्ट किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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