जेम्स वेब टेलीस्कोप ने पकड़ा इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS का रासायनिक फिंगरप्रिंट, मीथेन की मात्रा ने चौंकाया
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के अनुसार, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने पहली बार किसी इंटरस्टेलर खगोलीय पिंड — धूमकेतु 3I/ATLAS — का विस्तृत रासायनिक फिंगरप्रिंट दर्ज किया है, जो हमारे सौरमंडल के बाहर किसी दूसरे तारा-तंत्र से आया है। यह धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा पूरी करने के बाद अब सौरमंडल से बाहर निकल रहा है, और इसकी संरचना हमारे परिचित धूमकेतुओं से उल्लेखनीय रूप से भिन्न पाई गई है।
मुख्य वैज्ञानिक निष्कर्ष
वेब टेलीस्कोप के अवलोकनों के अनुसार, धूमकेतु के कोमा (गैसीय आवरण) में पानी की भाप दूर-दूर तक फैली हुई थी, जो नाभिक से काफ़ी दूरी पर स्थित बर्फीले कणों से निकल रही थी। वहीं कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन मुख्यतः कोर के निकट केंद्रित मिले। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि किसी इंटरस्टेलर धूमकेतु में मीथेन की उपस्थिति पहली बार दर्ज की गई है।
असामान्य रासायनिक अनुपात
वैज्ञानिकों के लिए सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि पानी की तुलना में मीथेन की मात्रा अप्रत्याशित रूप से अधिक थी — यह स्तर हमारे सौरमंडल के धूमकेतुओं में बहुत कम देखा जाता है। इसके अतिरिक्त, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी का अनुपात भी असामान्य रूप से ऊँचा पाया गया, जो इसके भिन्न उद्गम की ओर संकेत करता है।
दूसरे तारा-तंत्र की कहानी
विशेषज्ञों का कहना है कि ये रासायनिक संकेत बताते हैं कि 3I/ATLAS हमारे सूर्य से बहुत भिन्न परिस्थितियों वाले किसी तारे के आसपास बना होगा, जहाँ तापमान और रासायनिक वातावरण पूरी तरह अलग रहे होंगे। यह खोज खगोलविदों को एक दुर्लभ अवसर देती है — किसी अन्य ग्रहीय तंत्र की निर्माण-रसायन शास्त्र की झलक देखने का।
दो बार किया गया अवलोकन
वेब टेलीस्कोप ने इस धूमकेतु को दो बार ऑब्ज़र्व किया। पहली बार दिसंबर 2025 के मध्य में, जब यह सूर्य से लगभग 33 करोड़ किलोमीटर दूर था; और दूसरी बार 27 दिसंबर 2025 को, जब यह दूरी बढ़कर 38 करोड़ किलोमीटर हो गई थी। दोनों अवसरों के डेटा ने इसकी उत्पत्ति और संरचना की बेहतर समझ बनाने में मदद की।
आगे क्या
ESA के अनुसार, संभव है कि यह धूमकेतु फिर कभी न दिखे, क्योंकि यह अब सौरमंडल से बहुत दूर जा चुका है। फिर भी, इसने भविष्य के इंटरस्टेलर अध्ययनों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार-रेखा दे दी है — विशेष रूप से यह समझने में कि ब्रह्मांड के विभिन्न क्षेत्रों में रासायनिक तत्व किस प्रकार विकसित होते हैं।