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पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' होगा, विधानसभा में बिल लाने की तैयारी; अग्निमित्रा पॉल का विपक्ष पर हमला

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पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' होगा, विधानसभा में बिल लाने की तैयारी; अग्निमित्रा पॉल का विपक्ष पर हमला

सारांश

पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' करने का विधेयक विधानसभा के आगामी सत्र में आने की तैयारी है। BJP के समिक भट्टाचार्य ने इसे 1947 के ऐतिहासिक प्रस्ताव से जोड़ा, तो मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने विपक्ष पर ईवीएम के दोहरे रवैये का आरोप लगाया — और यह सब उपचुनाव मतदान के बीच सामने आया।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में राज्य का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' करने के लिए विधेयक पेश करने की तैयारी में है।
BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस माँग को 20 जून 1947 के ऐतिहासिक प्रस्ताव से जोड़ा, जब कांग्रेस विधायकों ने भी 'पश्चिम बंग' के पक्ष में मत दिया था।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने विधेयक का स्वागत किया और विपक्ष पर ईवीएम को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
नंदीग्राम और रेजानगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव मतदान हुआ।
आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर को उपचुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया।
संवैधानिक रूप से नाम बदलने की अंतिम मंज़ूरी के लिए संसद में संविधान की अनुसूची एक में संशोधन ज़रूरी होगा।

पश्चिम बंगाल सरकार राज्य का नाम बदलकर सभी भाषाओं में 'पश्चिम बंग' करने के लिए विधानसभा के आगामी सत्र में एक नया विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद 'वेस्ट बंगाल' और 'पश्चिम बंगाल' जैसे प्रचलित नामों का आधिकारिक इस्तेमाल समाप्त हो जाएगा। 6 अक्टूबर 2026 को यह घटनाक्रम उस दिन सामने आया जब राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव मतदान चल रहा था।

भाजपा नेता का ऐतिहासिक संदर्भ

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने जलपाईगुड़ी में मीडिया से बात करते हुए इस माँग को ऐतिहासिक धरातल पर रखा। उन्होंने कहा, 'यह माँग समिक भट्टाचार्य या सुवेंदु अधिकारी की नहीं है। यह भारतीय जनता पार्टी के किसी कार्यकर्ता की भी माँग नहीं है। जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, और आचार्य देव प्रसाद तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद जो व्यक्ति अध्यक्ष बने, उनकी भी यही माँग थी कि इतिहास को नहीं भूलना चाहिए।'

भट्टाचार्य ने आगे कहा, 'सभी अंग-बंग-कलिंग नाम से परिचित थे, लेकिन बंगाल के विभाजन के बाद हमने 20 जून 1947 को जिसे पश्चिम बंग कहा गया, उसका निर्माण किया। उस समय कांग्रेस के सभी हिंदू विधायकों ने भी उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। यह वेस्ट बंगाल नहीं है, और न ही किसी अन्य रूप में पश्चिम बंगाल है — यह पश्चिम बंग ही होगा, चाहे बांग्ला में हो या अंग्रेजी में।'

मंत्री अग्निमित्रा पॉल की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने नाम बदलने के विधेयक का स्वागत करते हुए कहा, 'यह बहुत अच्छी बात है, पश्चिम बंगाल के नामकरण के लिए बिल लाया जाएगा, यह बहुत बड़ी बात है।' उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा।

विपक्ष पर तीखा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'विपक्ष जीत जाए तो ईवीएम ठीक और हार जाए तो ईवीएम खराब। ये बंगाल के लोगों को भी पता है, देश के 140 करोड़ लोगों को भी पता है।' गौरतलब है कि यह बयान उपचुनाव मतदान के दिन आया, जब नंदीग्राम और रेजानगर विधानसभा क्षेत्रों में मतदान जारी था।

उपचुनाव और मतदान का माहौल

अग्निमित्रा पॉल ने नंदीग्राम और रेजानगर उपचुनाव पर कहा, 'आज सुबह से यहाँ उपचुनाव हो रहे हैं। यहाँ की जनता को समझ में आ गया है कि किसको वोट देना है। सभी को विकास चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हैं।

हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी

आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल पुलिस ने रेजानगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान गिरफ्तार किया। अग्निमित्रा पॉल ने इस गिरफ्तारी पर कहा, 'हुमायूं कबीर को गिरफ्तार करने का कारण है — जिस तरीके से वह सांप्रदायिक बात करते हैं। वे ऐसी बातें करके माहौल को खराब करना चाह रहे हैं, जो हम लोग करने नहीं देंगे।'

आगे क्या होगा

राज्य का नाम बदलने की यह पहल नई नहीं है — तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पहले भी इस दिशा में प्रयास कर चुकी है, लेकिन केंद्र की स्वीकृति और संसदीय प्रक्रिया आड़े आती रही है। संविधान की अनुसूची एक में संशोधन के लिए संसद की मंज़ूरी अनिवार्य है, जो इस प्रक्रिया को राज्य विधानसभा से आगे भी ले जाती है। विधेयक के पेश होने और उसके बाद की केंद्रीय प्रक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संसद की स्वीकृति की बाधा हर बार सामने खड़ी हो जाती है। दिलचस्प यह है कि जो BJP इसे ऐतिहासिक और जायज़ माँग बता रही है, वही केंद्र में सत्तारूढ़ है — इसलिए असली परीक्षा यह है कि क्या भाजपा-शासित केंद्र इस बार राज्य सरकार के प्रस्ताव को संसद में आगे बढ़ाएगी। उपचुनाव के दिन इस घोषणा का सामने आना और हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी — ये दोनों घटनाएँ मिलकर बंगाल की राजनीति की उस परिचित छवि को उजागर करती हैं जहाँ प्रशासनिक कदम और चुनावी रणनीति अक्सर एक साथ चलती हैं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' क्यों किया जा रहा है?
राज्य सरकार का प्रस्ताव है कि बंगाल के विभाजन के बाद 20 जून 1947 को जो नाम 'पश्चिम बंग' तय हुआ था, उसे सभी भाषाओं में आधिकारिक रूप से लागू किया जाए। BJP नेताओं के अनुसार यह ऐतिहासिक नाम ही सही पहचान है और इसे बहाल करना ज़रूरी है।
नाम बदलने का विधेयक कब पेश होगा?
राज्य सरकार इसे विधानसभा के आगामी सत्र में पेश करने की तैयारी में है, हालाँकि सटीक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। इसके बाद संविधान की अनुसूची एक में संशोधन के लिए संसद की मंज़ूरी भी आवश्यक होगी।
हुमायूं कबीर को क्यों गिरफ्तार किया गया?
आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल पुलिस ने रेजानगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान गिरफ्तार किया। मंत्री अग्निमित्रा पॉल के अनुसार उन पर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का आरोप है।
अग्निमित्रा पॉल ने विपक्ष पर ईवीएम को लेकर क्या कहा?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि विपक्ष जीतने पर ईवीएम को सही और हारने पर उसे खराब बताता है। उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया देश के 140 करोड़ लोग समझते हैं।
क्या इससे पहले भी पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश हुई है?
हाँ, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पहले भी इस दिशा में प्रयास कर चुकी है, लेकिन संसद की अनिवार्य स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। संविधान की अनुसूची एक में संशोधन के लिए केंद्र सरकार और संसद दोनों की भूमिका ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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