24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल में CBI को मिली सामान्य सहमति बहाल, भ्रष्टाचार जांच के लिए अब अलग अनुमति नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल में CBI को मिली सामान्य सहमति बहाल, भ्रष्टाचार जांच के लिए अब अलग अनुमति नहीं

सारांश

सात साल बाद पश्चिम बंगाल ने CBI को सामान्य सहमति लौटाई — यानी भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए अब हर बार राज्य की मंजूरी नहीं चाहिए। लेकिन राज्य कर्मचारियों पर आरोप होने पर पूर्वानुमति की शर्त बरकरार है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 8 जून 2026 को CBI को भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए सामान्य सहमति बहाल की।
DSPE Act, 1946 की धारा 6 के तहत पूर्ववर्ती सरकार के 2018 के फैसले को निरस्त किया गया।
राज्य सरकार के किसी कर्मचारी के विरुद्ध मामलों में CBI को अभी भी पूर्व अनुमति लेनी होगी।
2018 में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सामान्य सहमति वापस ली थी, जिसके बाद CBI जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक मामले पहुँचे थे।
इस फैसले से राज्य में लंबित भ्रष्टाचार मामलों में CBI की जांच गति तेज़ होने की संभावना है।

पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने 8 जून 2026 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) बहाल कर दी है। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 (DSPE Act) की धारा 6 के तहत लिए गए इस फैसले से CBI को अब हर मामले में राज्य सरकार की अलग-अलग पूर्वानुमति की बाध्यता से राहत मिल गई है।

क्या है सामान्य सहमति और क्यों है यह अहम

सामान्य सहमति वह कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत CBI किसी राज्य में प्रत्येक मामले के लिए अलग से अनुमति लिए बिना जांच शुरू कर सकती है। इसके बिना CBI के पास केवल दो विकल्प बचते हैं — या तो हर मामले में राज्य सरकार से व्यक्तिगत अनुमति लें, या फिर न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई करें।

मुख्य शर्त: राज्य कर्मचारियों के मामलों में पूर्वानुमति अनिवार्य

राज्य सरकार ने सामान्य सहमति बहाल करते हुए एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। यदि किसी मामले में आरोप राज्य सरकार के किसी कर्मचारी के विरुद्ध हों, तो CBI को जांच आरंभ करने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

2018 से चला आ रहा था विवाद

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने CBI को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। इसके बाद राज्य में CBI की जांच गतिविधियाँ व्यापक रूप से बाधित हुईं। TMC सरकार ने CBI द्वारा बिना राज्य की अनुमति के दर्ज की गई FIR के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। यहाँ तक कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के CBI जांच के आदेशों को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

केंद्र सरकार का रुख

उस दौरान केंद्र सरकार का तर्क था कि किसी भी राज्य सरकार की शक्तियाँ असीमित नहीं हैं। केंद्र का स्पष्ट मत था कि कोई भी राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से जांच एजेंसियों के कामकाज में बाधा नहीं डाल सकती और न ही आरोपियों को संरक्षण दे सकती।

आगे क्या होगा

इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में लंबित भ्रष्टाचार के मामलों में CBI की जांच प्रक्रिया तेज़ होने की संभावना है। यह निर्णय राज्य और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच सहयोग का एक नया अध्याय खोल सकता है, हालाँकि राज्य कर्मचारियों से जुड़े मामलों में लगाई गई शर्त की व्यावहारिक व्याख्या भविष्य में विवाद का कारण बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब उसे पलटना नई सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। लेकिन राज्य कर्मचारियों के मामलों में पूर्वानुमति की शर्त एक महत्वपूर्ण सुरक्षा-कवच बनाए रखती है, जो भविष्य में केंद्र-राज्य टकराव की ज़मीन तैयार कर सकती है। असली परीक्षा यह होगी कि इस शर्त की व्याख्या कैसे होती है — क्योंकि अधिकांश भ्रष्टाचार मामलों में राज्य कर्मचारी किसी न किसी रूप में शामिल होते हैं। सहमति बहाल होना स्वागतयोग्य है, पर जवाबदेही की असली कसौटी क्रियान्वयन में होगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CBI को सामान्य सहमति क्या होती है?
सामान्य सहमति वह कानूनी अनुमति है जो किसी राज्य सरकार द्वारा CBI को दी जाती है, जिससे CBI उस राज्य में हर मामले के लिए अलग अनुमति लिए बिना जांच शुरू कर सकती है। यह DSPE Act, 1946 की धारा 6 के तहत प्रदान की जाती है।
पश्चिम बंगाल में CBI की सामान्य सहमति कब और क्यों वापस ली गई थी?
वर्ष 2018 में तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने CBI की सामान्य सहमति वापस ले ली थी। इसके बाद CBI को राज्य में जांच के लिए या तो हर मामले में अलग अनुमति लेनी पड़ती थी या न्यायालय के आदेश का इंतज़ार करना पड़ता था।
नई सहमति में राज्य कर्मचारियों के मामलों में क्या शर्त है?
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी मामले में आरोप राज्य सरकार के किसी कर्मचारी के विरुद्ध हों, तो CBI को जांच आरंभ करने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सामान्य भ्रष्टाचार मामलों में यह बाध्यता नहीं होगी।
2018 के बाद CBI ने पश्चिम बंगाल में कैसे जांच की?
सामान्य सहमति वापस लिए जाने के बावजूद CBI ने भ्रष्टाचार के कई मामलों में FIR दर्ज की थीं। TMC सरकार ने इसके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था और कलकत्ता उच्च न्यायालय के CBI जांच के आदेशों को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
इस फैसले का पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के लंबित मामलों पर क्या असर होगा?
सामान्य सहमति बहाल होने से राज्य में लंबित भ्रष्टाचार मामलों में CBI की जांच प्रक्रिया तेज़ होने की संभावना है। हालाँकि राज्य कर्मचारियों से जुड़े मामलों में लगाई गई शर्त की व्यावहारिक व्याख्या पर भविष्य में कानूनी विवाद उठ सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले