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महिलाओं को चाहिए ठोस परिणाम, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस को दिया जवाब

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महिलाओं को चाहिए ठोस परिणाम, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस को दिया जवाब

सारांश

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जवाब देते हुए कहा कि भारत की महिलाओं को ठोस परिणाम चाहिए, न कि केवल वादे। उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया।

मुख्य बातें

महिलाओं को वादे नहीं, ठोस परिणाम चाहिए।
महिला आरक्षण का उद्देश्य उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है।
केंद्र सरकार 2029 के आम चुनावों तक आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है।
कांग्रेस ने इस बिल को पास कराने की मांग की है।
यह आरक्षण अब संविधान का हिस्सा बन चुका है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को महिला आरक्षण बिल के संबंध में दिए गए बयान का जवाब देते हुए कहा है कि भारत की महिलाओं को परिणाम चाहिए, न कि ऐसे वादे जो बार-बार किए जाएं लेकिन कभी भी वास्तविकता में न आएं।

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मल्लिकार्जुन खड़गे, महिला आरक्षण किसी राजनीतिक श्रेय का विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा, प्रतिनिधित्व और उनके उचित सशक्तिकरण का विषय है। भारत की महिलाओं को परिणाम चाहिए, न कि ऐसे वादे जो बार-बार किए जाएं लेकिन कभी भी वास्तविकता में न आएं।

उन्होंने आगे लिखा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (2023) कांग्रेस की अचानक उठाई गई मांग का परिणाम नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया और लागू किया गया, जबकि इससे पहले कई दशकों तक यह मुद्दा केवल चर्चा में रहा, लेकिन कभी हल नहीं हुआ। 25 से अधिक वर्षों तक महिलाओं के लिए आरक्षण का विषय अधूरा वादा बना रहा। बार-बार चर्चा हुई, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि संसद ने अब 106वां संविधान संशोधन पारित कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान किया है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं। यह अब केवल एक प्रस्ताव या इरादा नहीं है; यह भारत के संविधान का हिस्सा बन चुका है।

धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि इसके क्रियान्वयन को लेकर आपकी चिंता को ध्यान में रखा गया है। हालांकि, यह संशोधन स्पष्ट रूप से इसे जनगणना के बाद होने वाली अगली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ता है। यह राजनीतिक पसंद का विषय नहीं है, बल्कि भारत के संघीय संतुलन और प्रतिनिधित्व में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक संवैधानिक आवश्यकता है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे लिखा कि सरकार का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों तक महिला आरक्षण को लागू करना है। इसके लिए परिसीमन और विधानसभाओं की संरचना में आवश्यक बदलाव जैसे कदम उठाने होंगे। परिसीमन और सीटों के विस्तार पर सरकार संवेदनशीलता को ध्यान में रख रही है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है ताकि महिलाओं को विधानसभाओं में उचित स्थान मिले।

धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस अध्यक्ष से कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है तो यह समय है कि वह संसद में रचनात्मक रूप से भाग ले, आवश्यक सुधार सुझाए और इस ऐतिहासिक सुधार को बिना और देरी के लागू करने में सहयोग करे।

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी और महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चा की थी। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि कांग्रेस इस बिल को पास कराने की मांग पहले ही कर चुकी है और उनकी पार्टी में महिलाओं को हमेशा से तरजीह दी जाती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां महिलाओं के अधिकारों और प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री का यह कहना कि वादे नहीं, बल्कि परिणाम महत्वपूर्ण हैं, दर्शाता है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण बिल का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य महिलाओं के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है, जिससे उनकी आवाज को संसद और विधानसभाओं में उचित स्थान मिले।
कौन से नेता ने इस मुद्दे पर बयान दिया?
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर बयान दिया है।
महिलाओं के लिए आरक्षण कब लागू होगा?
सरकार का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों तक महिला आरक्षण को लागू करना है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला आरक्षण बिल को पास कराने की मांग की है।
इस बिल के अंतर्गत क्या शामिल है?
इस बिल के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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