योगी सरकार का 'भूसा संग्रह अभियान': 60.99 लाख क्विंटल लक्ष्य, ललितपुर शीर्ष पर
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 मई 2026 को व्यापक 'भूसा संग्रह अभियान' शुरू किया है, जिसका उद्देश्य बढ़ती गर्मी और आने वाले महीनों में प्रदेश के गो आश्रय स्थलों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। सरकार ने एक वर्ष के लिए 131.40 लाख क्विंटल भूसे की अनुमानित आवश्यकता निर्धारित की है, जिसके सापेक्ष 60.99 लाख क्विंटल भूसा संग्रह का लक्ष्य तय किया गया है।
अब तक की प्रगति
अभियान के अंतर्गत अब तक 26.78 लाख क्विंटल भूसे का संग्रह किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 43.9 प्रतिशत है। दान एवं क्रय — दोनों माध्यमों से यह संग्रह किया जा रहा है। दान आधारित भूसा संग्रह में 12.19 लाख क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष 2.65 लाख क्विंटल एकत्र किया गया है, जो 21.8 प्रतिशत प्रगति दर्शाता है। इस श्रेणी में महाराजगंज, जौनपुर, गाजियाबाद और रामपुर अग्रणी जिलों में हैं।
जिलेवार प्रदर्शन
सकल भूसा संग्रह में ललितपुर प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है, जहाँ लक्ष्य के मुकाबले 102.9 प्रतिशत संग्रह हो चुका है। इसके बाद देवरिया (100.7 प्रतिशत) और गोरखपुर (96.1 प्रतिशत) का स्थान है। मऊ, आगरा, महाराजगंज, सहारनपुर और हरदोई ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
वहीं, लखनऊ, कानपुर नगर, संभल और इटावा जैसे जिलों में संग्रह प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है। शासन स्तर से इन जिलों में अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है और खुले में घूमने वाले गोवंश की देखभाल एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है।
गुणवत्तापूर्ण पशु आहार पर जोर
मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर गो आश्रय स्थलों में केवल गुणवत्तायुक्त और संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। निर्देश जारी किए गए हैं कि पशु आहार केवल FSSAI मानकों एवं BIS प्रमाणित IS 2023 के अनुरूप ही खरीदा जाए। पीसीडीएफ (PCDF) द्वारा उत्पादित 'पराग' पशु आहार को प्राथमिकता देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। पैकिंग पर बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक गोवंश को प्रतिदिन न्यूनतम 500 ग्राम संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
भूसा बैंक और टेंडर प्रक्रिया
प्रदेश में अब तक 1,905 अस्थायी और 7,285 स्थायी भूसा बैंक स्थापित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक गो आश्रय स्थल पर अस्थायी एवं स्थायी भूसा बैंक स्थापित किए जाएँ तथा स्थानीय किसानों से समन्वय कर भूसे की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। भूसा टेंडर प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है — 14 जनपदों में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य जिलों में यह प्रक्रिया जारी है। साइलेज टेंडर प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
आगे क्या
सरकार ने समाजसेवी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, गोसेवकों और आम नागरिकों से भी इस अभियान में सहभागिता की अपील की है। सभी गो आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त छाया, कूलर और पंखों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि गो संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डेयरी विकास और कृषि आधारित जीवन प्रणाली का महत्वपूर्ण आधार है। प्रदेश सरकार इस पूरे अभियान को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है, ताकि गर्मी और सूखे की स्थिति में भी पशुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।