5 अक्टूबर 2026
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नायडू सरकार पर वाईएसआरसीपी का हमला: जगन के 11 लाख अधूरे घर, सूखे पर भी सवाल

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नायडू सरकार पर वाईएसआरसीपी का हमला: जगन के 11 लाख अधूरे घर, सूखे पर भी सवाल

सारांश

आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार पर दोहरा हमला बोला — एक तरफ 11 लाख अधूरे घरों का आरोप, दूसरी तरफ 388 सूखाग्रस्त मंडलों पर चुप्पी का सवाल। जगन के कार्यकाल में 31.19 लाख परिवारों को भूखंड आवंटित हुए थे, लेकिन विपक्ष का दावा है कि उत्तराधिकारी सरकार ने न निर्माण आगे बढ़ाया, न किसानों को राहत दी।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी समन्वयक अंबाती मुरली कृष्णा ने 4 अक्टूबर 2026 को टीडीपी सरकार पर आवास योजनाएँ अधूरी छोड़ने का आरोप लगाया।
जगन के कार्यकाल में 31.19 लाख परिवारों को भूखंड आवंटित और 17,005 जगनन्ना कॉलोनियाँ स्थापित की गई थीं।
कुल 22,80,358 स्वीकृत घरों में से 9 लाख से अधिक पूरे हुए, लेकिन करीब 11 लाख घर अब भी अधूरे हैं।
राज्य के 688 में से 388 मंडल सूखाग्रस्त घोषित; केंद्रीय बैठक में इसे न उठाए जाने पर सवाल।
अमरावती में 50,000 गरीब परिवारों के पट्टे अदालत में चुनौती के बाद रद्द किए जाने का आरोप।
वाईएसआरसीपी ने जाँच की माँग का स्वागत करते हुए काकीनाडा में चावल वितरण की भी जाँच की चुनौती दी।

आंध्र प्रदेश में विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 4 अक्टूबर 2026 को टीडीपी नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — कि पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई आवास परियोजनाओं को जानबूझकर अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे लाखों गरीब परिवार बेघर रहने को मजबूर हैं। पोन्नूर निर्वाचन क्षेत्र के वाईएसआरसीपी समन्वयक अंबाती मुरली कृष्णा ने ताडेपल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए ये आरोप लगाए।

आवास योजनाओं की स्थिति

मुरली कृष्णा के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में राज्य सरकार ने 31.19 लाख परिवारों को आवास भूखंड आवंटित किए और 17,005 वाईएसआर जगनन्ना कॉलोनियाँ स्थापित की गईं। उन्होंने दावा किया कि कुल 22,80,358 घरों को स्वीकृति मिली और उनमें से 9 लाख से अधिक का निर्माण पूरा हो चुका था।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान नायडू सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में एक भी नया घर नहीं बनाया और करीब 11 लाख घर निर्माण के विभिन्न चरणों में अधूरे पड़े हैं। उनका कहना था कि जब तक ये घर पूरे नहीं होते, सरकार को गरीबों को आवास देने का श्रेय लेने का कोई अधिकार नहीं है।

अदालती मामलों पर आरोप

मुरली कृष्णा ने यह भी आरोप लगाया कि टीडीपी ने आवासीय भूखंडों के पट्टे वितरण को रोकने के लिए 1,000 से अधिक अदालती मामले दायर किए। उनके अनुसार, जगन मोहन रेड्डी को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा और तब जाकर पट्टे वितरण की अनुमति मिली।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमरावती में सरकार ने 50,000 गरीब परिवारों के पट्टे को लेकर अदालत में मुकदमा किया और बाद में उन्हें रद्द कर दिया, जिससे वे परिवार अपने आवास अधिकार से वंचित हो गए।

सूखे का मुद्दा और किसानों की चिंता

मुरली कृष्णा ने सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हुई बैठक में राज्य के सूखे की स्थिति का मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया। उनके अनुसार, राज्य के 688 मंडलों में से 388 मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं — इनमें मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अपने निर्वाचन क्षेत्र कुप्पम के मंडल भी शामिल हैं।

उन्होंने धान, कपास, मक्का, लाल चना, हरा चना और काला चना जैसी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर भी सरकार से जवाब माँगा। उनका कहना था कि किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा और कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान में कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाएँ दबाव में हैं।

जाँच की चुनौती और स्थानीय निकाय चुनाव

मंत्री नादेंडला मनोहर द्वारा आवास संबंधी कथित अनियमितताओं की जाँच की माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुरली कृष्णा ने कहा कि वाईएसआरसीपी किसी भी जाँच के लिए तैयार है। उन्होंने पलटवार करते हुए सरकार को काकीनाडा में चावल वितरण से जुड़े मुद्दे की भी जाँच करने की चुनौती दी।

स्थानीय निकाय चुनावों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वाईएसआरसीपी चुनावों का विरोध नहीं करती, लेकिन पार्टी सटीक मतदाता सूचियाँ चाहती है — जिनमें मृत मतदाताओं और फर्जी वोटों को लेकर पारदर्शिता हो।

आगे क्या होगा

आवास विवाद, सूखे की मार और किसानों की MSP माँग — ये तीनों मुद्दे मिलकर आंध्र प्रदेश की राजनीति में तेज होती जा रही खींचतान को दर्शाते हैं। वाईएसआरसीपी के लगातार हमलों के बीच नायडू सरकार की प्रतिक्रिया और अधूरे घरों के निर्माण की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तराधिकार की राजनीति का है — जब एक सरकार दूसरी की योजनाओं को आगे न बढ़ाए और न बंद करे, तो गरीब परिवार बीच में फँस जाते हैं। वाईएसआरसीपी के आरोप राजनीतिक हैं, लेकिन 11 लाख अधूरे घरों का तथ्य सत्यापन योग्य है और सरकार को इसका जवाब देना होगा। सूखाग्रस्त 388 मंडलों में खुद मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र शामिल होना नायडू के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति है। मतदाता सूचियों और MSP को लेकर उठाए सवाल बताते हैं कि वाईएसआरसीपी अगले चुनावी चक्र के लिए जमीन तैयार कर रही है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी ने नायडू सरकार पर आवास को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि टीडीपी सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में एक भी नया घर नहीं बनाया और जगन सरकार द्वारा स्वीकृत करीब 11 लाख घर विभिन्न निर्माण चरणों में अधूरे पड़े हैं। पार्टी का कहना है कि गरीबों को आवास देने का श्रेय लेने से पहले इन घरों को पूरा करना ज़रूरी है।
जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में आवास योजना कितनी बड़ी थी?
वाईएसआरसीपी के अनुसार, जगन सरकार ने 31.19 लाख परिवारों को आवास भूखंड आवंटित किए, 17,005 जगनन्ना कॉलोनियाँ बनाईं और कुल 22,80,358 घरों को स्वीकृति दी — जिनमें से 9 लाख से अधिक का निर्माण पूर्ण हो चुका था।
आंध्र प्रदेश में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है?
राज्य के 688 मंडलों में से 388 मंडल सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। इनमें मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अपने निर्वाचन क्षेत्र कुप्पम के मंडल भी शामिल हैं। वाईएसआरसीपी ने सवाल उठाया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक में यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया।
अमरावती में 50,000 परिवारों के पट्टे रद्द होने का मामला क्या है?
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि अमरावती में सरकार ने 50,000 गरीब परिवारों के भूखंड पट्टे को अदालत में चुनौती दी और बाद में उन्हें रद्द कर दिया, जिससे ये परिवार आवास अधिकार से वंचित हो गए।
क्या वाईएसआरसीपी आवास अनियमितताओं की जाँच से डरती है?
नहीं — पार्टी समन्वयक अंबाती मुरली कृष्णा ने स्पष्ट कहा कि वाईएसआरसीपी किसी भी जाँच के लिए तैयार है। उन्होंने पलटवार करते हुए सरकार को काकीनाडा में चावल वितरण से जुड़े मुद्दे की भी जाँच करने की चुनौती दी।
राष्ट्र प्रेस
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