जोजिला सुरंग ब्रेकथ्रू के करीब: 13.14 किमी लंबी एशिया की पहली टू-वे टनल, सिर्फ 3 मीटर की खुदाई बाकी
सारांश
मुख्य बातें
लद्दाख में 11,578 फीट की ऊँचाई पर निर्माणाधीन 13.14 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग अब अपने ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू से महज कदम भर दूर है — केवल 3 मीटर की खुदाई शेष है, जिसके बाद औपचारिक ब्लास्टिंग की जाएगी। यह सुरंग एशिया की पहली दो-तरफा (टू-वे) सुरंग है और इसके पूरा होने पर कश्मीर एवं लद्दाख के बीच हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा।
परियोजना का परिचय और रणनीतिक महत्व
यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग हिल स्टेशन के निकट बालटाल और लद्दाख के द्रास जिले में मीनामार्ग के बीच जोजिला दर्रे वाले क्षेत्र में बनाई जा रही है। यह दर्रा भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और प्रतिकूल मौसम के कारण हर वर्ष लंबे समय तक बंद रहता है। परियोजना 1 अक्टूबर 2020 को आरंभ हुई थी और इसका उद्देश्य हिमालय के सबसे दुर्गम मार्गों में से एक पर चौबीसों घंटे, बारह महीने संपर्क देना है। सुरंग के पूरा होने पर इस क्षेत्र का रणनीतिक और आर्थिक महत्व दोनों दृष्टियों से उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा।
इंजीनियरों की जुबानी: चुनौतियाँ और उपलब्धि
जोजिला टनल के इंजीनियर यूसुफ एस्हागपोर ने कहा, 'यह जोजिला टनल खास है और देश के लिए गर्व की बात है। यह न सिर्फ यहाँ की दोनों तरफ से आने-जाने वाली सबसे लंबी टनल है, बल्कि यह पूरे एशिया में अपनी तरह की पहली टनल भी है। हमें यहाँ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आज हम एक बड़ी कामयाबी हासिल करने जा रहे हैं।'
एस्हागपोर ने आगे बताया कि अब तक 1.125 करोड़ से अधिक मैन-आवर बिना किसी दुर्घटना के पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, 'टनल को असल में 100 साल तक चलने के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है। ब्रेकथ्रू के बाद वेंटिलेशन, ड्रेनेज सिस्टम और सड़क निर्माण जैसे कार्यों में आमतौर पर ढाई से तीन साल लग सकते हैं।'
वहीं इंजीनियर हबीबुल्लाह राथर ने इस परियोजना की कठिनाइयों का ब्यौरा देते हुए कहा, 'यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट था, खासकर इस इलाके में, क्योंकि यहाँ का मौसम बेहद कठोर है। माइनस 40 डिग्री तापमान में काम करना एक बड़ी चुनौती है।'
समयसीमा में बदलाव
राथर ने स्वीकार किया कि मूल अनुबंध के अनुसार परियोजना को सितंबर 2026 तक पूरा होना था, लेकिन कई तकनीकी और मौसमी बाधाओं के कारण देरी हुई है। अब परियोजना की संशोधित समयसीमा जुलाई 2028 तय की गई है। गौरतलब है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में समयसीमा का विस्तार असामान्य नहीं माना जाता।
आम जनता और क्षेत्र पर असर
सुरंग के पूरा होने पर लद्दाख और कश्मीर घाटी के बीच यात्रा-समय में भारी कमी आएगी, जो अभी जोजिला दर्रे के बंद रहने पर कई घंटों की लंबी वैकल्पिक राह से होती है। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला — तीनों के लिए यह सुरंग एक निर्णायक कड़ी साबित होगी। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार लद्दाख में बुनियादी ढाँचे के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
आगे क्या होगा
औपचारिक ब्लास्टिंग के बाद सुरंग के भीतर वेंटिलेशन, ड्रेनेज और सड़क-निर्माण कार्य शुरू होंगे, जो जुलाई 2028 तक पूरे होने की उम्मीद है। इंजीनियरों के अनुसार, यह ब्रेकथ्रू भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर इतिहास में एक मील का पत्थर है — और दशकों तक इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी की रीढ़ बनेगा।