24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जोजिला सुरंग ब्रेकथ्रू के करीब: 13.14 किमी लंबी एशिया की पहली टू-वे टनल, सिर्फ 3 मीटर की खुदाई बाकी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जोजिला सुरंग ब्रेकथ्रू के करीब: 13.14 किमी लंबी एशिया की पहली टू-वे टनल, सिर्फ 3 मीटर की खुदाई बाकी

सारांश

13.14 किमी लंबी जोजिला सुरंग — एशिया की पहली दो-तरफा टनल — अब महज 3 मीटर की खुदाई दूर है। माइनस 40 डिग्री तापमान और 1.125 करोड़ दुर्घटना-मुक्त मैन-आवर के बाद यह ब्रेकथ्रू कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में जोड़ने की दिशा में भारत का सबसे बड़ा पर्वतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर कदम है।

मुख्य बातें

जोजिला सुरंग में केवल 3 मीटर की खुदाई शेष; औपचारिक ब्लास्टिंग के साथ ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू होगा।
यह 13.14 किलोमीटर लंबी सुरंग 11,578 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और एशिया की पहली दो-तरफा टनल है।
अब तक 1.125 करोड़ से अधिक मैन-आवर बिना किसी दुर्घटना के पूरे किए गए; सुरंग 100 साल की आयु के लिए डिज़ाइन की गई है।
मूल समयसीमा सितंबर 2026 थी; संशोधित लक्ष्य जुलाई 2028 तय किया गया है।
परियोजना बालटाल (सोनमर्ग) और मीनामार्ग (द्रास, लद्दाख) के बीच हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करेगी।

लद्दाख में 11,578 फीट की ऊँचाई पर निर्माणाधीन 13.14 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग अब अपने ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू से महज कदम भर दूर है — केवल 3 मीटर की खुदाई शेष है, जिसके बाद औपचारिक ब्लास्टिंग की जाएगी। यह सुरंग एशिया की पहली दो-तरफा (टू-वे) सुरंग है और इसके पूरा होने पर कश्मीर एवं लद्दाख के बीच हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा।

परियोजना का परिचय और रणनीतिक महत्व

यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग हिल स्टेशन के निकट बालटाल और लद्दाख के द्रास जिले में मीनामार्ग के बीच जोजिला दर्रे वाले क्षेत्र में बनाई जा रही है। यह दर्रा भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और प्रतिकूल मौसम के कारण हर वर्ष लंबे समय तक बंद रहता है। परियोजना 1 अक्टूबर 2020 को आरंभ हुई थी और इसका उद्देश्य हिमालय के सबसे दुर्गम मार्गों में से एक पर चौबीसों घंटे, बारह महीने संपर्क देना है। सुरंग के पूरा होने पर इस क्षेत्र का रणनीतिक और आर्थिक महत्व दोनों दृष्टियों से उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा।

इंजीनियरों की जुबानी: चुनौतियाँ और उपलब्धि

जोजिला टनल के इंजीनियर यूसुफ एस्हागपोर ने कहा, 'यह जोजिला टनल खास है और देश के लिए गर्व की बात है। यह न सिर्फ यहाँ की दोनों तरफ से आने-जाने वाली सबसे लंबी टनल है, बल्कि यह पूरे एशिया में अपनी तरह की पहली टनल भी है। हमें यहाँ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आज हम एक बड़ी कामयाबी हासिल करने जा रहे हैं।'

एस्हागपोर ने आगे बताया कि अब तक 1.125 करोड़ से अधिक मैन-आवर बिना किसी दुर्घटना के पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, 'टनल को असल में 100 साल तक चलने के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है। ब्रेकथ्रू के बाद वेंटिलेशन, ड्रेनेज सिस्टम और सड़क निर्माण जैसे कार्यों में आमतौर पर ढाई से तीन साल लग सकते हैं।'

वहीं इंजीनियर हबीबुल्लाह राथर ने इस परियोजना की कठिनाइयों का ब्यौरा देते हुए कहा, 'यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट था, खासकर इस इलाके में, क्योंकि यहाँ का मौसम बेहद कठोर है। माइनस 40 डिग्री तापमान में काम करना एक बड़ी चुनौती है।'

समयसीमा में बदलाव

राथर ने स्वीकार किया कि मूल अनुबंध के अनुसार परियोजना को सितंबर 2026 तक पूरा होना था, लेकिन कई तकनीकी और मौसमी बाधाओं के कारण देरी हुई है। अब परियोजना की संशोधित समयसीमा जुलाई 2028 तय की गई है। गौरतलब है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में समयसीमा का विस्तार असामान्य नहीं माना जाता।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

सुरंग के पूरा होने पर लद्दाख और कश्मीर घाटी के बीच यात्रा-समय में भारी कमी आएगी, जो अभी जोजिला दर्रे के बंद रहने पर कई घंटों की लंबी वैकल्पिक राह से होती है। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला — तीनों के लिए यह सुरंग एक निर्णायक कड़ी साबित होगी। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार लद्दाख में बुनियादी ढाँचे के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

आगे क्या होगा

औपचारिक ब्लास्टिंग के बाद सुरंग के भीतर वेंटिलेशन, ड्रेनेज और सड़क-निर्माण कार्य शुरू होंगे, जो जुलाई 2028 तक पूरे होने की उम्मीद है। इंजीनियरों के अनुसार, यह ब्रेकथ्रू भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर इतिहास में एक मील का पत्थर है — और दशकों तक इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी की रीढ़ बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल समयसीमा से लगभग दो साल की देरी यह सवाल उठाती है कि उच्च हिमालयी परियोजनाओं में शुरुआती समयसीमाएँ कितनी यथार्थवादी होती हैं। ब्रेकथ्रू के बाद भी ढाई से तीन साल का काम बाकी है — अर्थात् सुरंग का वास्तविक उद्घाटन 2028 से पहले संभव नहीं। असली कसौटी यह होगी कि क्या शेष कार्य — वेंटिलेशन, ड्रेनेज, सड़क — जुलाई 2028 की संशोधित समयसीमा में पूरे होते हैं, या देरी का यह सिलसिला जारी रहता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोजिला सुरंग क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
जोजिला सुरंग लद्दाख में 11,578 फीट की ऊँचाई पर निर्मित 13.14 किलोमीटर लंबी एशिया की पहली दो-तरफा सुरंग है। यह बालटाल (सोनमर्ग) और मीनामार्ग (द्रास) के बीच हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करेगी, जो अभी भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण महीनों बंद रहता है।
जोजिला सुरंग कब तक पूरी होगी?
मूल अनुबंध के अनुसार परियोजना सितंबर 2026 तक पूरी होनी थी, लेकिन तकनीकी और मौसमी बाधाओं के कारण संशोधित समयसीमा जुलाई 2028 तय की गई है। ब्रेकथ्रू के बाद वेंटिलेशन, ड्रेनेज और सड़क निर्माण में ढाई से तीन साल और लगेंगे।
जोजिला सुरंग निर्माण में क्या-क्या चुनौतियाँ आईं?
इंजीनियर हबीबुल्लाह राथर के अनुसार माइनस 40 डिग्री तापमान में काम करना सबसे बड़ी चुनौती रही। इसके अलावा हिमस्खलन, कठोर भूगोल और अत्यधिक ऊँचाई ने निर्माण कार्य को जटिल बनाया। इन्हीं कारणों से परियोजना में देरी हुई।
जोजिला सुरंग से लद्दाख और कश्मीर के लोगों को क्या फायदा होगा?
सुरंग के पूरा होने पर कश्मीर और लद्दाख के बीच यात्रा-समय में भारी कमी आएगी और यह मार्ग साल भर खुला रहेगा। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और सैन्य आपूर्ति श्रृंखला तीनों को सीधा लाभ मिलेगा।
जोजिला सुरंग का निर्माण कब शुरू हुआ था?
यह परियोजना 1 अक्टूबर 2020 को शुरू हुई थी। इंजीनियरों के अनुसार अब तक 1.125 करोड़ से अधिक मैन-आवर बिना किसी दुर्घटना के पूरे किए जा चुके हैं और सुरंग को 100 साल की आयु के लिए डिज़ाइन किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले