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अश्विनी वैष्णव: क्रिटिकल मटेरियल्स इकोसिस्टम के बिना भारत की तकनीकी संप्रभुता अधूरी

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अश्विनी वैष्णव: क्रिटिकल मटेरियल्स इकोसिस्टम के बिना भारत की तकनीकी संप्रभुता अधूरी

सारांश

अश्विनी वैष्णव ने साफ़ कहा — चिप बनाने की क्षमता काफी नहीं, उसके पीछे खड़ा पूरा मटेरियल इकोसिस्टम चाहिए। ब्लूमबर्ग फोरम में उनका संदेश था: भारत को दशकों की नहीं, बल्कि त्वरित गति से वह विशेषज्ञता हासिल करनी है जो अभी कुछ देशों के पास है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 14 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि क्रिटिकल मटेरियल्स पर निर्भरता भारत की तकनीकी संप्रभुता की सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब चिप असेंबली से आगे बढ़कर केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और पूंजीगत उपकरणों तक विस्तारित हो रहा है।
सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में क्रिटिकल मटेरियल्स पर केंद्रित ध्यान दिया जा रहा है।
28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर के लेगेसी नोड्स में एक डॉलर की चिप की कमी से करोड़ों की मशीन का उत्पादन रुक सकता है — यह उदाहरण देकर वैष्णव ने निर्भरता के खतरे को रेखांकित किया।
सरकार का लक्ष्य भारत को डिजाइन, विनिर्माण और अंतिम उत्पाद मूल्यांकन में एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करना है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि तकनीकी संप्रभुता की दिशा में भारत की यात्रा में क्रिटिकल मटेरियल्स पर निर्भरता अब भी सबसे बड़ी कमज़ोरियों में से एक है। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए ज़रूरी सामग्रियों में घरेलू क्षमता विकसित करने की गति को तेज़ करना अपरिहार्य है।

मुख्य चुनौती: आपूर्ति शृंखला का केंद्रीकरण

वैष्णव ने बताया कि क्रिटिकल मटेरियल्स की वैश्विक आपूर्ति शृंखला कुछ सीमित देशों में केंद्रित है, जो भारत के एक विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के सामने बड़ी बाधा है। उन्होंने केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और अन्य सेमीकंडक्टर इनपुट्स को वे प्रमुख क्षेत्र बताया जहाँ भारत को घरेलू विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमता मज़बूत करनी होगी।

गौरतलब है कि मटेरियल इकोसिस्टम पर प्रभुत्व रखने वाले देशों ने इन क्षमताओं को विकसित करने में दशकों लगाए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के पास इतनी लंबी समयसीमा की प्रतीक्षा करने का अवसर नहीं है — विनिर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण और प्रबंधन में विशेषज्ञता विकसित करने के प्रयासों को तत्काल गति देनी होगी।

सेमीकंडक्टर मिशन का विस्तार

वैष्णव ने बताया कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल चिप निर्माण और असेंबली तक सीमित नहीं रहा। यह मटेरियल्स, केमिकल्स, गैसों और सब्सट्रेट्स को समाहित करते हुए एक व्यापक इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में इन्हीं क्षेत्रों पर केंद्रित ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार की रणनीति तैयार उत्पादों की असेंबली से आगे बढ़कर मॉड्यूल, कंपोनेंट्स, मटेरियल्स और अंततः पूंजीगत उपकरणों के निर्माण तक पहुँचने की है, ताकि विनिर्माण क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

तकनीकी संप्रभुता की परिपक्व परिभाषा

मंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी संप्रभुता का लक्ष्य अन्य देशों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त करना नहीं है, बल्कि रणनीतिक कमज़ोरियों को दूर करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाना है। उन्होंने कहा, "जब हम तकनीकी संप्रभुता की बात करते हैं तो हमें इसे बहुत परिपक्व और जटिल तरीके से देखना होगा। हम रणनीतिक निर्भरता और लचीलापन बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। ऐसे कौन से उत्पाद और क्षेत्र हैं जिनमें हमारे देश के भीतर विनिर्माण, डिजाइन और संपूर्ण उत्पाद विकास क्षमताएँ होनी चाहिए? वहीं, वैल्यू चेन के किन हिस्सों में हम अन्य देशों पर निर्भर रह सकते हैं? प्रौद्योगिकी हमेशा एक वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा होती है।"

विश्वसनीय भागीदार बनने का दृष्टिकोण

वैष्णव ने एक महत्वपूर्ण उदाहरण देते हुए कहा, "28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर के लेगेसी नोड्स में एक मिलियन डॉलर की मशीन का उत्पादन सिर्फ एक डॉलर की चिप के कारण रुक सकता है।" इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत डिजाइन, विनिर्माण और अंतिम उत्पाद के पूर्ण मूल्यांकन में खुद को एक विश्वसनीय देश के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य से आगे बढ़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाएँ भू राजनीतिक दबाव में हैं और अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा चीन सभी घरेलू चिप उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भारी निवेश कर रहे हैं। भारत का सेमीकंडक्टर मिशन इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति सुदृढ़ करने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली बाधा अपस्ट्रीम मटेरियल्स में है। क्रिटिकल मटेरियल्स के लिए घरेलू इकोसिस्टम बनाने में दशकों लगते हैं — और मंत्री स्वयं इस तथ्य को स्वीकार कर रहे हैं। सवाल यह है कि 'त्वरित गति' के लिए नीतिगत ढाँचा, निवेश प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ कहाँ हैं — अभी तक सार्वजनिक रूप से केवल दिशा स्पष्ट हुई है, रोडमैप नहीं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी वैष्णव ने क्रिटिकल मटेरियल्स इकोसिस्टम पर क्या कहा?
वैष्णव ने 14 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि क्रिटिकल मटेरियल्स — जैसे केमिकल्स, गैसें और सब्सट्रेट्स — पर कुछ देशों की एकाधिकार जैसी पकड़ भारत की तकनीकी संप्रभुता की सबसे बड़ी कमज़ोरी है। उन्होंने इस निर्भरता को कम करने के लिए घरेलू क्षमता तेज़ी से बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण क्या है?
सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण में चिप निर्माण और असेंबली से आगे बढ़कर मटेरियल्स, केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और पूंजीगत उपकरणों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। मंत्री वैष्णव के अनुसार यह एक व्यापक इकोसिस्टम निर्माण की दिशा में कदम है।
तकनीकी संप्रभुता से भारत का क्या अभिप्राय है?
वैष्णव के अनुसार तकनीकी संप्रभुता का अर्थ सभी देशों पर निर्भरता खत्म करना नहीं, बल्कि रणनीतिक कमज़ोरियों को दूर कर लचीलापन बढ़ाना है। भारत उन क्षेत्रों की पहचान करना चाहता है जहाँ घरेलू विनिर्माण और डिजाइन क्षमता अनिवार्य है, और जहाँ वैश्विक वैल्यू चेन पर निर्भरता स्वीकार्य है।
क्रिटिकल मटेरियल्स की कमी सेमीकंडक्टर उत्पादन को कैसे प्रभावित करती है?
वैष्णव ने उदाहरण दिया कि 28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर के लेगेसी नोड्स में एक मिलियन डॉलर की मशीन का उत्पादन महज एक डॉलर की चिप की अनुपलब्धता से रुक सकता है। यह दर्शाता है कि संपूर्ण आपूर्ति शृंखला में सबसे छोटी कड़ी भी उत्पादन को ठप कर सकती है।
भारत क्रिटिकल मटेरियल्स इकोसिस्टम में विशेषज्ञता कितने समय में हासिल कर सकता है?
मंत्री वैष्णव ने स्वीकार किया कि मौजूदा मटेरियल इकोसिस्टम नेताओं ने यह क्षमता दशकों में विकसित की है। हालाँकि उन्होंने कहा कि भारत के पास इतना समय नहीं है और प्रयासों को त्वरित करना होगा, लेकिन इसके लिए कोई सुनिश्चित समयसीमा सार्वजनिक रूप से अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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