नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन: 28 राज्यों ने किए MoU, 20 विधायिकाएं पूरी तरह सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) के माध्यम से देश की समस्त विधानसभाओं और विधान परिषदों को पेपरलेस और डिजिटल बनाने की मुहिम में केंद्र सरकार ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है — अब तक 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मंच से जुड़ने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि 20 विधायिकाएं पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित नेवा के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों ने इस डिजिटल रूपांतरण को 'वन नेशन, वन एप्लिकेशन' विजन की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
नेवा परियोजना की वर्तमान स्थिति
नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) भारत सरकार की एक मिशन मोड परियोजना है, जिसका मूल उद्देश्य विधायी संस्थाओं के कामकाज को पारदर्शी, जवाबदेह और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। अब तक 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से 20 विधायिकाएं इस प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं।
किरेन रिजिजू का संदेश
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सम्मेलन के लिए जारी अपने संदेश में नेवा को एक 'परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म' बताया, जिसने विधायिकाओं के कार्यों को अधिक कुशल और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया है। उन्होंने शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस मंच से जल्द जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि यह 'वन नेशन, वन एप्लिकेशन' के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रिजिजू ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में राज्यों और नोडल विभागों के बीच अनुभवों, चुनौतियों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया जाएगा।
अर्जुन राम मेघवाल का आह्वान
विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने इस सम्मेलन को नेवा परियोजना की प्रगति की समीक्षा और उसके क्रियान्वयन को गति देने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि नेवा तकनीक के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मेघवाल ने विश्वास जताया कि सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाएं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगी।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
नेवा के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद देश की सभी विधायिकाएं एक साझा डिजिटल मंच पर आ जाएंगी, जिससे नागरिकों के लिए उनकी कार्यप्रणाली तक पहुँच और अधिक सहज होगी। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल गवर्नेंस को लेकर केंद्र सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि नेवा जैसी पहल विधायी प्रक्रियाओं में कागज़ की खपत घटाने के साथ-साथ जवाबदेही का एक नया ढाँचा भी तैयार करती है।
आगे की राह
तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे नेवा के विस्तार में आने वाली चुनौतियों और समाधानों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मंच से जोड़ने की प्रक्रिया में तेज़ी लाना सरकार की प्राथमिकता बताई जा रही है, ताकि 'वन नेशन, वन एप्लिकेशन' का लक्ष्य शीघ्र पूरा हो सके।