नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन: 28 राज्यों का MOU, 20 विधायिकाएं सक्रिय — केंद्र का 'वन नेशन, वन एप्लिकेशन' विजन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन मोड परियोजना नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) के ज़रिए देश की समस्त विधानसभाओं और विधान परिषदों को पेपरलेस और डिजिटल बनाने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। 4 जून 2026 को संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित नेवा के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपने संदेश जारी किए। अब तक 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नेवा से जुड़ने के लिए MOU पर हस्ताक्षर किए हैं और 20 विधायिकाएं इस प्लेटफ़ॉर्म पर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं।
नेवा परियोजना: मुख्य घटनाक्रम
नेवा भारत सरकार की एक मिशन मोड परियोजना है, जिसका लक्ष्य देश की सभी विधायी संस्थाओं के कामकाज को पेपरलेस, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। यह परियोजना 'वन नेशन, वन एप्लिकेशन' के विज़न पर आधारित है, जिसके तहत सभी राज्यों की विधानसभाएं और विधान परिषदें एक साझा डिजिटल मंच पर संचालित होंगी।
गौरतलब है कि भारत में कुल 31 राज्य विधानमंडल हैं — जिनमें विधान परिषद वाले राज्य भी शामिल हैं। 20 विधायिकाओं का पूरी तरह सक्रिय होना इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति है, हालांकि शेष विधायिकाओं को जोड़ने की प्रक्रिया अभी जारी है।
किरेन रिजिजू का संदेश
किरेन रिजिजू ने अपने संदेश में कहा कि नेवा एक 'परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म' के रूप में उभरा है, जिसने विधायिकाओं के कार्यों को अधिक जवाबदेह, कुशल और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया है। उन्होंने शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जल्द से जल्द इस मंच से जुड़ने की अपील की।
रिजिजू ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में राज्यों और नोडल विभागों के बीच अनुभवों, चुनौतियों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया जाएगा, जिससे पूरे देश में नेवा के विस्तार की गति और मज़बूत होगी।
अर्जुन राम मेघवाल का दृष्टिकोण
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह सम्मेलन नेवा परियोजना की प्रगति की समीक्षा करने और इसके क्रियान्वयन को तेज़ करने का 'महत्वपूर्ण अवसर' है। उन्होंने इसे तकनीक के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
मेघवाल ने कहा कि नेवा विधायी संस्थाओं को डिजिटल और आधुनिक बनाकर उनके कामकाज को पारदर्शी, जवाबदेह और पर्यावरण के अनुकूल बना रहा है। उनके अनुसार, इससे नागरिकों की विधायी कार्यप्रणाली तक पहुँच और आसान होगी।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
नेवा के पूरी तरह लागू होने पर विधानसभाओं में कागज़ रहित कार्यप्रणाली लागू होगी — प्रश्नकाल, विधेयक, समिति रिपोर्ट और बजट दस्तावेज़ सभी डिजिटल होंगे। इससे न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि नागरिक भी अपने प्रतिनिधियों के कामकाज को ऑनलाइन देख सकेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया के तहत शासन में तकनीक के समावेश को प्राथमिकता दे रही है — आधार, डिजीलॉकर और UMANG जैसे प्लेटफ़ॉर्म पहले से इस दिशा में काम कर रहे हैं।
आगे की राह
तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और प्रस्तुतियों से राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि शेष विधायिकाएं भी शीघ्र नेवा प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हों, ताकि 'वन नेशन, वन एप्लिकेशन' का विज़न पूरी तरह साकार हो सके।