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पालीताना शत्रुंजय पहाड़ी पर शेरों की निगरानी के लिए 4 वॉच टावर और ड्रोन तैनात होंगे

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पालीताना शत्रुंजय पहाड़ी पर शेरों की निगरानी के लिए 4 वॉच टावर और ड्रोन तैनात होंगे

सारांश

पालीताना की शत्रुंजय पहाड़ी पर एशियाई शेरों की बढ़ती मौजूदगी के बीच गुजरात सरकार ने बड़ा कदम उठाया है — 4 वॉच टावर, ड्रोन और ट्रैकिंग टीमें तैनात होंगी। जैन तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण का यह संतुलन अब परीक्षा की घड़ी में है।

मुख्य बातें

गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने 18 अगस्त को पालीताना की शत्रुंजय पहाड़ी पर 4 प्री-फैब्रिकेटेड वॉच टावर और ड्रोन तैनात करने की घोषणा की।
24 घंटे की निगरानी के लिए ड्रोन, ट्रैकिंग टीमें और 4 सेंटर-कम-केबिन भी स्थापित किए जाएंगे।
तीर्थयात्रियों को सूर्योदय के बाद चढ़ाई शुरू करने और सूर्यास्त से पहले वापस लौटने की सलाह दी गई।
सरकार इस क्षेत्र को 'साइलेंट जोन' घोषित करने पर विचार कर रही है।
शेरों की ट्रैकिंग के लिए स्थानीय युवाओं को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाएगा।
जून में पहाड़ी पर एशियाई शेर देखे जाने के बाद से सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित हुआ है।

गुजरात के वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार, 18 अगस्त को घोषणा की कि वन विभाग पालीताना की शत्रुंजय पहाड़ी पर एशियाई शेरों की गतिविधियों पर नज़र रखने और हज़ारों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चार प्री-फैब्रिकेटेड वॉच टावर, चार सेंटर-कम-केबिन और ड्रोन तैनात करेगा। यह निर्णय गांधीनगर में 'श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी' के जैन नेताओं के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया है।

बैठक में क्या तय हुआ

गांधीनगर में मोढवाडिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य मंत्री प्रवीण माली भी उपस्थित थे। बैठक में भावनगर जिले के इस प्रमुख जैन तीर्थ स्थल पर बार-बार शेरों के देखे जाने की घटनाओं के मद्देनज़र व्यापक सुरक्षा योजना पर चर्चा की गई। मोढवाडिया ने कहा, "वन विभाग ने पिछले एक साल में इस इलाके में शेरों की गतिविधियों को बारीकी से देखा और उनका विश्लेषण किया है।"

बैठक में जन जागरूकता, वन्यजीव संरक्षण, बुनियादी ढाँचा प्रबंधन, शेर ट्रैकिंग, ड्रोन तकनीक, मानव संसाधन विकास, 'साइलेंट जोन' की संभावना और '6 गौ यात्रा' जैसी विशेष गतिविधियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

निगरानी और सुरक्षा की व्यवस्था

प्रस्तावित योजना के तहत 24 घंटे की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। ड्रोन और ट्रैकिंग टीमें पहाड़ी पर शेरों की लगातार स्कैनिंग करेंगी। मंत्री ने बताया कि शेरों की ट्रैकिंग और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए स्थानीय युवाओं को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा, पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तीर्थयात्रा मार्ग की मरम्मत भी की जाएगी।

मोढवाडिया ने वन विभाग के अधिकारियों को इन प्रस्तावित व्यवस्थाओं को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए हैं।

तीर्थयात्रियों के लिए सलाह

मंत्री ने स्पष्ट किया कि शेर आम तौर पर उकसाए जाने पर ही इंसानों पर हमला करते हैं, लेकिन परेशान किए जाने पर आक्रामक हो सकते हैं। उन्होंने तीर्थयात्रियों को सलाह दी कि वे सूर्योदय के बाद चढ़ाई शुरू करें और सूर्यास्त से पहले अपनी यात्रा पूरी कर लें। सरकार इस क्षेत्र को 'साइलेंट जोन' घोषित करने पर भी विचार कर रही है।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में शत्रुंजय पहाड़ी और उसके आसपास एशियाई शेर देखे गए हैं — जिनमें जून में पहाड़ी पर शेर का दिखना भी शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब पालीताना में तीर्थयात्रियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।

जैन समुदाय की प्रतिक्रिया

श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी के प्रतिनिधियों ने वन विभाग के साथ सहयोग को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि संगठन ने तीर्थयात्रियों से हमेशा अपील की है कि वे अनुशासन और शांति के साथ यात्रा करें और वन्यजीवों को परेशान न करें। उन्होंने पिछली 'फागन फेरी' के दौरान वन विभाग की व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की।

आने वाले महीनों में इन सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन के साथ यह देखना अहम होगा कि वन्यजीव संरक्षण और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के बीच यह संतुलन कितना प्रभावी साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वन्यजीव विस्तार और धार्मिक पर्यटन के बीच गहराते टकराव का प्रतीक है। गिर के बाहर एशियाई शेरों की बढ़ती रेंज — जिसे संरक्षणवादी सफलता मानते हैं — अब उन इलाकों में दबाव बना रही है जहाँ मानवीय आवाजाही अत्यधिक है। वॉच टावर और ड्रोन तात्कालिक राहत दे सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए वन्यजीव गलियारों की योजना और तीर्थयात्रा प्रबंधन के एकीकरण की ज़रूरत है — जिस पर अभी तक ठोस नीति नहीं बनी है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पालीताना शत्रुंजय पहाड़ी पर शेरों की निगरानी के लिए क्या उपाय किए जाएंगे?
वन विभाग 4 प्री-फैब्रिकेटेड वॉच टावर , 4 सेंटर-कम-केबिन , ड्रोन और ट्रैकिंग टीमें तैनात करेगा जो 24 घंटे निगरानी करेंगी। स्थानीय युवाओं को अस्थायी रूप से शेर ट्रैकिंग के लिए नियुक्त भी किया जाएगा।
तीर्थयात्रियों को शत्रुंजय पहाड़ी पर यात्रा के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने सलाह दी है कि तीर्थयात्री सूर्योदय के बाद चढ़ाई शुरू करें और सूर्यास्त से पहले वापस लौट आएं। शेरों को परेशान या उकसाने से बचना चाहिए, क्योंकि वे तंग किए जाने पर आक्रामक हो सकते हैं।
पालीताना में हाल ही में शेर कब देखे गए?
हाल के महीनों में शत्रुंजय पहाड़ी और उसके आसपास एशियाई शेर देखे गए हैं, जिनमें जून 2026 में पहाड़ी पर शेर का दिखना प्रमुख घटना रही। इसी के बाद सुरक्षा उपायों पर ध्यान केंद्रित हुआ।
'साइलेंट जोन' घोषणा का क्या अर्थ होगा?
सरकार शत्रुंजय पहाड़ी क्षेत्र को 'साइलेंट जोन' घोषित करने पर विचार कर रही है, जिससे शोरगुल और अनावश्यक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगेगा। इससे वन्यजीवों को कम परेशानी होगी और शेरों के मानव बस्तियों की ओर आने का जोखिम कम हो सकता है।
श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी का इस मामले में क्या रुख है?
पेढ़ी के प्रतिनिधियों ने वन विभाग के साथ सहयोग की सराहना की है और बताया कि संगठन ने हमेशा तीर्थयात्रियों से अनुशासन और शांति के साथ यात्रा करने तथा वन्यजीवों को परेशान न करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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