अशोक डिंडा: क्रिकेट के प्रति जुनून के चलते आर्थिक कठिनाइयों को किया पार
सारांश
Key Takeaways
- संघर्ष: अशोक ने कठिनाइयों के बावजूद अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाया।
- मेहनत: उन्होंने लगातार मेहनत करके अपनी गेंदबाजी में सुधार किया।
- प्रेरणा: उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणादायक है।
- राजनीति में कदम: क्रिकेट के बाद उन्होंने राजनीति में भी सफलता हासिल की।
- संन्यास: उन्होंने 2021 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया।
नई दिल्ली, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा का क्रिकेट सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। भारतीय टीम में अपनी जगह बनाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। एक समय ऐसा था जब उनके पास अपना घर नहीं था और क्रिकेट किट खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे।
अशोक डिंडा का जन्म २५ मार्च १९८४ को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में हुआ। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट में गहरी रुचि थी, लेकिन आर्थिक तंगी ने उन्हें कई बार बाधित किया। किट खरीदने के लिए पैसे न होने के बावजूद, अशोक ने हार नहीं मानी और गेंदबाजी पर निरंतर मेहनत करते रहे। उन्होंने कई क्रिकेट क्लबों में शामिल होने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें हर बार अस्वीकृति का सामना करना पड़ा। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि साल २००१ में वह कोलकाता के एक क्लब के लिए खेलते थे, लेकिन उनके पास सिर छुपाने की जगह भी नहीं थी।
अशोक ने अपनी समस्या क्लब को बताई, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। क्रिकेट की बारीकियों को सीखने के लिए, वह अपने घर से दूर मामा के पास रहने लगे। मामा का घर भी क्रिकेट मैदान से काफी दूर था। अशोक सुबह ५ बजे निकलते और दो बसें बदलते हुए ग्राउंड तक पहुंचते। हालांकि, जब उन्होंने हाई कोर्ट की तरफ से खेलना शुरू किया, तो उनकी रहने की व्यवस्था ठीक हो गई, लेकिन दूरी अभी भी एक चुनौती थी।
अशोक ने हार नहीं मानी और संघर्ष के बल पर बंगाल की घरेलू टीम में अपनी जगह बना ली। घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन के बल पर वह साल २००९ में भारतीय टीम में शामिल हुए। उन्होंने ९ दिसंबर २००९ को श्रीलंका के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। लेकिन यहां भी उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ और वह टीम में लगातार अंदर-बाहर होते रहे। आईपीएल में भी उन्होंने केकेआर, राइजिंग पुणे, दिल्ली डेयरडेविल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु जैसी बड़ी टीमों के लिए खेला।
अशोक ने भारत के लिए कुल १३ वनडे और ९ टी२० अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने २९ विकेट लिए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने ११६ मुकाबलों में ४२० विकेट चटकाए। वर्ष २०२१ में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा की और राजनीति में कदम रखा। २०२१ के बंगाल चुनाव में, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की ओर से मोयना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।