13 सितंबर 2026
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एशियन पैरा गेम्स 2026: पैरा-शटलर प्रेमा विश्वास ने चयन में भेदभाव का आरोप लगाया, PM मोदी से न्याय की गुहार

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एशियन पैरा गेम्स 2026: पैरा-शटलर प्रेमा विश्वास ने चयन में भेदभाव का आरोप लगाया, PM मोदी से न्याय की गुहार

सारांश

रैंकिंग 8 होने के बाद भी एंट्री नहीं मिली — पैरा-शटलर प्रेमा विश्वास का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही ने उनके करियर के सबसे बड़े मौके को छीन लिया। उधम सिंह नगर की इस खिलाड़ी की कहानी पैरा-एथलीटों के साथ होने वाले चयन भेदभाव का आईना है।

मुख्य बातें

प्रेमा विश्वास ने 13 सितंबर 2026 को आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स के चयन में भेदभाव का आरोप लगाया।
प्रेमा की एकल एशियन रैंकिंग 8 और महिला डबल्स में टॉप 6 है, फिर भी उनकी एंट्री समय पर नहीं भेजी गई।
11वीं रैंक तक के खिलाड़ियों की एंट्री दाखिल होने के बाद भी प्रेमा की प्रविष्टि छूटना विवाद का केंद्र बिंदु है।
प्रेमा ने इजिप्ट पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में दो कांस्य पदक जीते थे।
खिलाड़ी ने PM नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप और न्याय की माँग की है।
भारतीय पैरा-बैडमिंटन संघ और खेल मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी प्रेमा विश्वास ने 13 सितंबर 2026 को एक भावनात्मक सार्वजनिक अपील जारी करते हुए आरोप लगाया कि जापान में होने वाले आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स के लिए उनकी आधिकारिक प्रविष्टि जानबूझकर देरी से भेजी गई, जिससे वह खेलों में भाग लेने के अवसर से वंचित हो गईं। WH1 श्रेणी की यह भारतीय पैरा-शटलर एकल में एशियन रैंकिंग 8 और महिला डबल्स में टॉप 6 में शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।

प्रेमा विश्वास का आरोप क्या है

प्रेमा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'मेरी एकल एशियन रैंकिंग 8 है और मैं महिला डबल्स में टॉप 6 में हूँ। फिर भी आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स के लिए मेरी एंट्री शुरू में नहीं भेजी गई। जब इसे आखिरकार भेजा गया, तो इतनी देर हो गई कि अब इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है।' उन्होंने सवाल उठाया कि जब एकल श्रेणी में 11वीं रैंक तक के खिलाड़ियों की प्रविष्टियाँ दाखिल की गईं, तो उनकी रैंकिंग के बावजूद उनकी एंट्री क्यों छूटी।

कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियाँ

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर की रहने वाली प्रेमा ने अपनी व्यक्तिगत और आर्थिक चुनौतियों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, 'मैं एक वंचित पृष्ठभूमि से आती हूँ, मेरे पिता का निधन हो चुका है, मेरे पास कोई नियमित नौकरी या सहयोग नहीं है। मैंने लोगों से मदद माँगकर और बेहद मुश्किल हालात में ट्रेनिंग करके यह रैंकिंग हासिल की है।' प्रेमा ने यह भी कहा कि यह उनके करियर का पहला और संभवतः अंतिम एशियन पैरा गेम्स हो सकता है, क्योंकि उनके पास इस रैंकिंग को दोबारा बनाने के लिए वित्तीय संसाधन नहीं हैं।

PM मोदी से न्याय की अपील

प्रेमा ने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष सुविधा की माँग नहीं कर रहीं, बल्कि उनकी माँग सिर्फ यह है कि उनके साथ न्याय हो और उन्हें देश के लिए खेलने का अवसर मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पैरा-खेलों में भारत की भागीदारी और उसके एथलीटों के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े पैमाने पर बहस हो रही है।

पैरा-बैडमिंटन में प्रेमा की उपलब्धियाँ

प्रेमा विश्वास ने इजिप्ट पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में दो कांस्य पदक जीते थे, जो एशियन पैरा गेम्स चयन रैंकिंग का हिस्सा था। इस प्रदर्शन के आधार पर ही उन्होंने अपनी वर्तमान रैंकिंग हासिल की, जो उन्हें एशियन पैरा गेम्स के लिए स्वाभाविक दावेदार बनाती थी। आलोचकों का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता होती, तो ऐसे विवाद की नौबत ही नहीं आती।

आगे क्या होगा

अभी तक न तो भारतीय पैरा-बैडमिंटन संघ और न ही खेल मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। प्रेमा की अपील सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है और पैरा-खेल समुदाय में व्यापक चर्चा का विषय बनी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या अधिकारी इस प्रविष्टि विवाद को सुलझाने के लिए कोई कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह प्रशासनिक चूक नहीं, व्यवस्थागत विफलता है। पैरा-ओलंपिक में भारत की बढ़ती उपस्थिति और सरकार के 'खेलो इंडिया' अभियान के बीच यह घटना एक कड़वा विरोधाभास पेश करती है। जब तक चयन समितियों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती और प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य नहीं बनती, ऐसे मामले बार-बार सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रेमा विश्वास कौन हैं और उनका विवाद क्या है?
प्रेमा विश्वास उत्तराखंड के उधम सिंह नगर की WH1 श्रेणी की अंतरराष्ट्रीय पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उनका आरोप है कि आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स के लिए उनकी आधिकारिक एंट्री जानबूझकर देरी से भेजी गई, जिससे उन्हें भाग लेने का अवसर नहीं मिला, जबकि उनसे कम रैंक वाले खिलाड़ियों को चुना गया।
प्रेमा विश्वास की एशियन रैंकिंग क्या है?
प्रेमा विश्वास की एकल एशियन रैंकिंग 8 है और वह महिला डबल्स में टॉप 6 में शामिल हैं। इसके बावजूद उनकी प्रविष्टि समय पर दाखिल नहीं की गई, जबकि एकल श्रेणी में 11वीं रैंक तक के खिलाड़ियों की एंट्री भेजी गई।
प्रेमा विश्वास ने PM मोदी से क्यों हस्तक्षेप माँगा?
प्रेमा का कहना है कि वह कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि केवल न्याय और देश के लिए खेलने का अवसर माँग रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसलिए अपील की क्योंकि खेल प्रशासन के स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई।
आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स कहाँ और कब होंगे?
आईची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स जापान में आयोजित किए जाएँगे। इस प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टि की अंतिम तारीख बीत चुकी है, जिसकी वजह से प्रेमा की एंट्री अब स्वीकार नहीं हो पा रही।
प्रेमा विश्वास की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
प्रेमा विश्वास ने इजिप्ट पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में दो कांस्य पदक जीते, जो एशियन पैरा गेम्स चयन रैंकिंग का हिस्सा था। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने अपनी वर्तमान एशियन रैंकिंग हासिल की।
राष्ट्र प्रेस
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