10 अगस्त 2026
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मनिका बत्रा का अल्टीमेटम: एशियन गेम्स 2026 स्क्वॉड से बाहर, पारदर्शिता न मिली तो कोर्ट जाएंगी

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मनिका बत्रा का अल्टीमेटम: एशियन गेम्स 2026 स्क्वॉड से बाहर, पारदर्शिता न मिली तो कोर्ट जाएंगी

सारांश

करीब 20 साल के करियर में मनिका बत्रा ने कभी चयन पर इस तरह आवाज नहीं उठाई — लेकिन एशियन गेम्स 2026 से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने PM मोदी से हस्तक्षेप माँगा और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। असली सवाल यह है कि भारतीय खेल चयन प्रक्रिया पारदर्शी कब होगी।

मुख्य बातें

मनिका बत्रा को एशियन गेम्स 2026 की भारतीय टेबल टेनिस टीम में जगह नहीं मिली।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की अपील की।
मनिका की मौजूदा विश्व रैंकिंग 51 है; उन्होंने रैंकिंग-आधारित चयन मानदंड की अवधि पर सवाल उठाए।
रिपोर्टों के अनुसार चयन वोटिंग के आधार पर हुआ — मनिका ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर आपत्ति जताई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह टीम में जगह नहीं, बल्कि चयन के कारणों का पारदर्शी जवाब चाहती हैं।
संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानूनी कार्रवाई का विकल्प अपनाने की चेतावनी दी।

भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स 2026 की भारतीय टीम में जगह न मिलने पर खुलकर अपना पक्ष रखा है और चेतावनी दी है कि यदि चयन के कारणों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वह कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की अपील करते हुए चयन प्रक्रिया को मनमाना और अपारदर्शी करार दिया है।

मनिका की मुख्य माँग क्या है

मनिका ने स्पष्ट किया कि वह टीम में जगह या किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहीं। उनके अनुसार, उन्हें आज तक यह नहीं बताया गया कि उनका चयन क्यों नहीं हुआ। उन्होंने अपने बयान में कहा, 'मैं सिर्फ जवाब मांग रही हूं। मुझे यह नहीं बताया गया कि मेरा चयन क्यों नहीं किया गया।'

उन्होंने आगे कहा, 'पिछले दो दशकों से मुझे सर्वोच्च स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। जीत, हार, चयन और चयन न होना — यह खेल का हिस्सा है। लेकिन जिस बात को स्वीकार करना मुश्किल है, वह है पारदर्शिता की कमी और मनमानी।'

रैंकिंग पर उठाए सवाल

मनिका ने अपनी मौजूदा विश्व रैंकिंग 51 का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि शीर्ष-50 से मामूली अंतर पर होने के बावजूद उन्हें अयोग्य क्यों माना गया। उन्होंने तर्क दिया कि टेबल टेनिस की विश्व रैंकिंग साप्ताहिक आधार पर बदलती है और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चयन किस अवधि की रैंकिंग — पिछले 12 महीने, 6 महीने, 2 महीने या किसी एक सप्ताह — के आधार पर हुआ।

उन्होंने कहा, 'यदि कोई खिलाड़ी लंबे समय तक शीर्ष-50 के आसपास बना रहता है और किसी सप्ताह उसकी रैंकिंग 50 से 51 हो जाती है, तो क्या वह अचानक चयन के लिए अयोग्य हो जाता है?' उन्होंने यह भी दावा किया कि इस सत्र में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है और उन्होंने कई शीर्ष एशियाई तथा मजबूत चीनी खिलाड़ियों को हराया है।

वोटिंग आधारित चयन पर आपत्ति

मनिका ने उन रिपोर्टों पर गंभीर चिंता जताई जिनके अनुसार अंतिम चयन वोटिंग के आधार पर किया गया। उनका सवाल है कि यदि ऐसा हुआ है तो खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि किसने और किन कारणों से मतदान किया। उन्होंने पूछा, 'क्या फैसला खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर लिया गया था या व्यक्तिगत राय के आधार पर?'

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चयन समिति के कितने सदस्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और क्या वोटिंग प्रणाली में हितों के टकराव की संभावना को नकारा जा सकता है।

अयहिका मुखर्जी का उदाहरण

मनिका ने हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत के लिए ऐतिहासिक महिला युगल कांस्य पदक जीतने वाली अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीत चुके खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भी एशियाई खेलों के लिए खिलाड़ियों के चयन में मौजूदा फॉर्म को महत्वपूर्ण मानता है।

आगे क्या होगा

मनिका ने स्पष्ट किया कि उनकी चिंता केवल अपने चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समूची चयन प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहती हैं। करीब 20 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय करियर के साथ, उन्होंने कहा कि यह किसी एक फैसले पर भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि प्रक्रिया को स्पष्ट करने की माँग है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कानूनी विकल्प अपनाना उनकी अगली कार्रवाई होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सही है, तो यह सवाल उठाती है कि क्या हितों के टकराव की कोई जाँच-व्यवस्था मौजूद है। करीब 20 साल के करियर वाली एक खिलाड़ी को यह बताने में असमर्थता कि उसे क्यों बाहर किया गया, संस्थागत जवाबदेही की गंभीर कमी दर्शाती है। PM और खेल मंत्री से सार्वजनिक अपील यह भी बताती है कि आंतरिक शिकायत तंत्र खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनिका बत्रा को एशियन गेम्स 2026 की टीम से क्यों बाहर किया गया?
चयन के आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, यही मनिका की मुख्य आपत्ति है। रिपोर्टों के अनुसार चयन वोटिंग प्रक्रिया पर आधारित था, जबकि मनिका की मौजूदा विश्व रैंकिंग 51 है — शीर्ष-50 से मामूली अंतर पर।
मनिका बत्रा किस आधार पर कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं?
मनिका ने कहा है कि यदि चयन के कारणों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह कानूनी विकल्प अपनाएंगी। उनका तर्क है कि हर खिलाड़ी को चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही का अधिकार है।
क्या मनिका बत्रा टीम में जगह माँग रही हैं?
नहीं। मनिका ने स्पष्ट किया है कि वह टीम में चयन या कोई विशेष रियायत नहीं माँग रहीं, बल्कि केवल यह जानना चाहती हैं कि उन्हें किन कारणों से बाहर किया गया। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
मनिका बत्रा ने PM मोदी से हस्तक्षेप की अपील क्यों की?
मनिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की अपील इसलिए की क्योंकि उनके अनुसार चयन फैसला मनमाना है और आंतरिक स्तर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। यह भारतीय खेल प्रशासन में आंतरिक शिकायत तंत्र की सीमाओं को भी उजागर करता है।
अयहिका मुखर्जी का इस विवाद से क्या संबंध है?
मनिका ने हांगझोउ एशियाई खेलों में महिला युगल कांस्य पदक जीतने वाली अयहिका मुखर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीत चुके खिलाड़ियों को चयन में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें फैसले का कारण जानने का अधिकार है।
राष्ट्र प्रेस
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