साजन प्रकाश की वापसी: कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में पदक जीतने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
अनुभवी भारतीय तैराक साजन प्रकाश ने पेरिस ओलंपिक के बाद थकान और मानसिक तनाव के कारण लिए गए लंबे ब्रेक के बाद प्रतियोगी तैराकी में वापसी की घोषणा की है। 32 वर्षीय प्रकाश ने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक लक्ष्य ग्लासगो में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और सितंबर में होने वाले एशियाई खेलों में पोडियम तक पहुँचना है। यह वापसी भारतीय तैराकी के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि प्रकाश इन खेलों में पदक जीतने वाले संभावित दावेदारों में शुमार हैं।
ब्रेक और वापसी की कहानी
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में प्रकाश ने कहा, 'जब एथलीट बहुत कड़ी ट्रेनिंग करते हैं और भारत का नाम रोशन करने के लिए अपना सब कुछ झोंक देते हैं, तो वे दर्द सहने के आदी हो जाते हैं और कई बातें समझ नहीं पाते। अगर उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए, तो उन्हें समझ नहीं आता कि रिकवरी क्या है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि ब्रेक के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि उनका शरीर 'बहुत बड़े शॉक में था' और आराम भी ट्रेनिंग का अभिन्न हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब खेल जगत में एथलीटों के मानसिक स्वास्थ्य पर वैश्विक स्तर पर ध्यान बढ़ा है।
प्रशिक्षण में बदलाव और नए कोच
वापसी के साथ प्रकाश ने अपनी ट्रेनिंग रणनीति में बुनियादी बदलाव किए हैं। उन्होंने पूर्व तैराक और एशियाई खेलों में पदक विजेता संदीप सेजवाल को अपना कोच नियुक्त किया है। गौरतलब है कि सेजवाल किसी मल्टी-स्पोर्टिंग इवेंट में पदक जीतने वाले अंतिम भारतीय तैराक हैं, जो उन्हें इस भूमिका के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाता है। प्रकाश ने कहा, 'वह स्थानीय स्तर पर आने वाली चुनौतियों को समझते हैं और बेहतर सलाह दे सकते हैं।' अब उनका पूरा ध्यान केवल 200-मीटर बटरफ्लाई इवेंट पर केंद्रित है।
उम्र और अनुभव का संतुलन
26 वर्षों से अधिक की तैराकी यात्रा पर प्रकाश ने कहा, '10 साल पहले, जब मैं 22 साल का था, तब मेरे शरीर की क्षमता और रिकवरी की स्थिति अलग थी। मैंने ज़्यादातर काम एंड्योरेंस और एरोबिक क्षमता बढ़ाने पर किया है, और मेरी नींव पहले ही मज़बूत हो चुकी है।' उन्होंने माना कि कॉमनवेल्थ गेम्स में 'कुछ सेकंड का फर्क' ही पोडियम और निराशा के बीच की दीवार होगी। यह स्वीकारोक्ति उनकी परिपक्वता और यथार्थवादी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
भविष्य की योजना
कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के बाद के भविष्य पर प्रकाश ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'मैं एक बार में एक ही कदम उठाना चाहता हूँ और देखना चाहता हूँ कि कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स कैसे रहते हैं। इसके बाद ही कोई फैसला करूँगा।' यह दृष्टिकोण उनके करियर के इस निर्णायक चरण में संतुलन और दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है। भारतीय तैराकी प्रशंसकों की नज़रें अब ग्लासगो के पूल पर टिकी होंगी।