खजान सिंह: भारतीय तैराकी के अग्रदूत, एशियाई खेलों में रजत पदक विजेता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
खजान सिंह: भारतीय तैराकी के अग्रदूत, एशियाई खेलों में रजत पदक विजेता

सारांश

खजान सिंह का नाम भारतीय तैराकी के स्वर्ण युग से जुड़ा है। 1986 के सियोल एशियाई खेलों में रजत पदक से लेकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने तक, उन्होंने जब भारत को तैराकी विश्व मंच पर स्थापित करने का संघर्ष चल रहा था, तब देश की प्रतिभा का प्रतीक बने।

मुख्य बातें

खजान सिंह टोकस का जन्म 6 मई 1964 को दिल्ली के मुनिरका गांव में हुआ था।
1986 के सियोल एशियाई खेलों में 200 मीटर बटरफ्लाई में रजत पदक जीता; इसके बाद अगला भारतीय तैराकी पदक 24 साल बाद आया।
1988 में कोलकाता के राष्ट्रीय खेलों में आठ व्यक्तिगत स्वर्ण पदक और पाँच नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।
1984 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित; बाद में CRPF में DIG के पद तक पहुँचे।
आज नई दिल्ली में खजान सिंह स्विमिंग अकादमी संचालित करते हैं।

नई दिल्ली, 5 मई (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय तैराकी के इतिहास में खजान सिंह टोकस का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। जब भारत में तैराकी को एक पेशेवर खेल के रूप में स्थापित करने का संघर्ष चल रहा था, तब खजान सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए एक मजबूत नींव रखी। उनकी उपलब्धियाँ आधुनिक भारतीय तैराकी के विकास की कहानी कहती हैं।

जन्म और शुरुआती प्रतिभा

खजान सिंह का जन्म 6 मई 1964 को दिल्ली के मुनिरका गांव में हुआ था। स्कूली दिनों से ही वह तैराकी की ओर आकृष्ट हुए और इस खेल में अपनी प्रतिभा को निखारने लगे। 1981-82 की नेशनल स्कूल चैंपियनशिप में उन्होंने अपनी पहचान स्थापित की, जहाँ उन्होंने पाँच स्वर्ण पदक जीते।

राष्ट्रीय मंच पर वर्चस्व

राष्ट्रीय स्तर पर खजान सिंह की जीत का सिलसिला तेजी से बढ़ा। 1982 में दिल्ली की नेशनल एक्वेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने पाँच स्वर्ण, दो रजत, और एक कांस्य पदक अपने नाम किए। अगले वर्ष त्रिवेंद्रम में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन और भी शानदार रहा — सात स्वर्ण, दो रजत, और एक कांस्य पदक।

1987 में अहमदाबाद की राष्ट्रीय जलीय चैंपियनशिप में खजान सिंह ने सात स्वर्ण पदक जीते और 100 मीटर फ्रीस्टाइल में 55.21 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया, जिससे उनका 1984 का दक्षिण एशियाई खेलों का पुराना रिकॉर्ड टूट गया। 1988 में कोलकाता के राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने आठ व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते, जिनमें से पाँच नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी शामिल थे — यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपलब्धियाँ

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खजान सिंह की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि 1986 के सियोल एशियाई खेलों में 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में रजत पदक जीतना थी। यह पदक विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसके बाद भारत को एशियाई खेलों में अगला तैराकी पदक 24 साल बाद 2010 में वीरधवल खाड़े ने दिलाया था।

दक्षिण एशियाई खेलों में उनका प्रदर्शन असाधारण रहा। 1984 की काठमांडू प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, और 1989 में इस्लामाबाद के खेलों में सात पदक हासिल किए। 1988 की बीजिंग एशियाई तैराकी चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता, जबकि विश्व पुलिस खेलों में रजत पदक से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की।

राष्ट्रमंडल और ओलंपिक प्रतिनिधित्व

खजान सिंह ने 1982 में ब्रिसबेन के राष्ट्रमंडल खेलों और 1988 के सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिससे उन्होंने विश्व मंच पर राष्ट्र की गरिमा बढ़ाई।

सम्मान और बाद का जीवन

भारत सरकार ने खजान सिंह की उपलब्धियों को स्वीकार करते हुए 1984 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया। खेल से सेवानिवृत्ति के बाद वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में शामिल हुए और डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद तक पहुँचे। आज खजान सिंह नई दिल्ली में खजान सिंह स्विमिंग अकादमी का संचालन करते हैं, जहाँ वह नई पीढ़ी के तैराकों को प्रशिक्षित करते हैं और भारतीय तैराकी के विकास में अपना योगदान जारी रखे हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशिक्षण सुविधाओं और निरंतर समर्थन की कमी को दर्शाता है। खजान सिंह की विरासत केवल उनके अपने पदकों में नहीं, बल्कि उन्होंने अपनी अकादमी के माध्यम से अगली पीढ़ी को जो संभावनाएँ दीं, उसमें निहित है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खजान सिंह ने एशियाई खेलों में कौन-सा पदक जीता था?
खजान सिंह ने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में रजत पदक जीता था। यह पदक विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसके बाद भारत को एशियाई खेलों में अगला तैराकी पदक 24 साल बाद 2010 में मिला था।
खजान सिंह को कौन-से पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
भारत सरकार ने 1984 में खजान सिंह को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया था, जो भारतीय खेलों में उत्कृष्टता का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार है।
खजान सिंह ने कौन-से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए थे?
खजान सिंह ने 1987 में अहमदाबाद की राष्ट्रीय जलीय चैंपियनशिप में 100 मीटर फ्रीस्टाइल में 55.21 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। 1988 के कोलकाता राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने अपने आठ व्यक्तिगत स्वर्ण पदकों में से पाँच नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड शामिल किए।
खजान सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
खजान सिंह का जन्म 6 मई 1964 को दिल्ली के मुनिरका गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम खजान सिंह टोकस है।
खजान सिंह आजकल क्या करते हैं?
खेल से सेवानिवृत्ति के बाद खजान सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में शामिल हुए और डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल के पद तक पहुँचे। आज वह नई दिल्ली में खजान सिंह स्विमिंग अकादमी का संचालन करते हैं, जहाँ नई पीढ़ी के तैराकों को प्रशिक्षण देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले