कॉनर एस्टरहुइजन का तूफानी प्रदर्शन: चौथे टी20 में बने 'प्लेयर ऑफ द मैच'
सारांश
Key Takeaways
- कॉनर एस्टरहुइजन ने 57 रन की पारी खेलकर 'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब जीता।
- उनकी बल्लेबाजी रणनीति में गेंद का इंतजार करना शामिल था।
- साउथ अफ्रीका ने 164/5 का स्कोर बनाकर मैच जीता।
- सीरीज अब 2-2 की बराबरी पर है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू करने का मौका एस्टरहुइजन के लिए महत्वपूर्ण रहा।
वेलिंगटन, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण अफ्रीका के विकेटकीपर-बल्लेबाज कॉनर एस्टरहुइजन ने रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मैच में 57 रन की शानदार पारी खेली। 36 गेंदों में, इस 24 वर्षीय खिलाड़ी ने 3 छक्के और 7 चौके लगाए। एस्टरहुइजन ने बताया कि बल्लेबाजी के दौरान उनका लक्ष्य गेंद का इंतजार करना और केवल वही शॉट खेलना था जो उनके सामने था।
एस्टरहुइजन ने इसी सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है। पहले मैच में उन्होंने नाबाद 45 रन बनाए थे, इसके बाद 8 और 15 रन की पारियां खेलीं। चौथे टी20 में उन्होंने अपना पहला अर्धशतक पूरा किया। अब तक के चार टी20 मैचों में उनका औसत 41.66 है और उन्होंने कुल 125 रन बनाए हैं।
31 मई 2001 को जोहान्सबर्ग में जन्मे एस्टरहुइजन ने सेंट जॉन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। हालांकि वे साउथ अफ्रीका की जूनियर टीमों का हिस्सा नहीं थे, लेकिन 2022 में लायंस के लिए प्रांतीय डेब्यू करने के बाद उन्होंने तेजी से तरक्की की। वे पहले ही दक्षिण अफ्रीका 'ए' टीम का हिस्सा रह चुके हैं और एसए20 लीग में एमआई केप टाउन और प्रिटोरिया कैपिटल्स के लिए भी खेल चुके हैं।
'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब जीतने के बाद एस्टरहुइजन की शानदार पारी की बदौलत साउथ अफ्रीका ने 164/5 का स्कोर बनाया और कीवी टीम को 18.5 ओवर में केवल 145 रन पर रोककर मुकाबला 19 रन से जीत लिया। इसके साथ ही सीरीज 2-2 की बराबरी पर आ गई है। अब सीरीज का निर्णय 25 मार्च को क्राइस्टचर्च में होने वाले पांचवे टी20 मैच में होगा।
मैच के बाद एस्टरहुइजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "सीरीज के दूसरे मैच में, शायद मैं थोड़ा अधिक डिफेंसिव था। मेरे इरादे उतने मजबूत नहीं थे जितने होने चाहिए थे। पिछले मैच में, मैं हर गेंद पर शॉट खेलने की कोशिश कर रहा था, जबकि इस पारी में मैंने सामान्य क्रिकेट शॉट्स खेलकर गेंद का इंतजार किया। यही मुख्य अंतर था।"
न्यूजीलैंड ने अपने मुख्य खिलाड़ियों को आराम दिया है, जिसके कारण एस्टरहुइजन को प्रोटियाज टीम में खेलने का अवसर मिला। इस अनुभव को सुखद बताते हुए एस्टरहुइजन ने कहा, "प्रोटियाज के साथ अपने पहले दौरे का हर पल मेरे लिए बहुत खास था। मैं यहां से जो सबक सीखूंगा, वो यह है कि दबाव और कड़ी निगरानी का सामना कैसे किया जाए।"
एस्टरहुइजन ने कहा, "मैंने अपने खेल को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास किया है। ज्यादातर खिलाड़ियों में टैलेंट होता है, लेकिन उस टैलेंट का सही उपयोग करना और उसके साथ निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण होता है। खेल में जब आप ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, यह सबसे महत्वपूर्ण होता है। दूसरी बात यह है कि नाकामियों का सामना कैसे किया जाए, क्योंकि यह खेल नाकामियों का खेल है। जब आप सफल होते हैं, तो आपको उस सफलता को अपनाना होता है।"