गौतम गंभीर बोले — सही फैसले लेना मेरी ज़िम्मेदारी, न्यूज़ीलैंड में 3-1 की बढ़त पर टीम की तारीफ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने 1 नवंबर 2026 को हैमिल्टन में स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता सही निर्णय लेना है, न कि लोकप्रिय फैसलों से तालियाँ बटोरना। सेडन पार्क में पाँचवें टी20 मैच की पूर्व संध्या पर ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में उन्होंने यह बात दो-टूक कही। भारत इस पाँच मैचों की टी20 सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त के साथ सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुका है।
गंभीर की कोचिंग फिलॉसफी
गंभीर ने कहा, 'सबसे पहली बात, मेरा काम सबको खुश करना नहीं है। मेरा काम सही फैसले लेना है, न कि लोकप्रिय फैसले। मैं इसी काम के लिए यहाँ हूँ। मुझे लगता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया और बाहर होने वाली तमाम चर्चाओं के बीच चीज़ें कुछ अलग हो सकती हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि ड्रेसिंग रूम के अंदर खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखना उतना ही अहम है जितना कि मैदान पर परिणाम। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब टीम चयन और खिलाड़ियों को मौके देने को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस होती रहती है।
टीम का भरोसा और टैलेंट
गंभीर ने कहा, 'लोकप्रिय फैसला लेना बहुत आसान होता है। लेकिन मेरे लिए सही निर्णय लेना ज़्यादा ज़रूरी है। टीम में बहुत टैलेंट है। खिलाड़ियों ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है, इसलिए वे निश्चित रूप से और मौके पाने के हकदार हैं। हम इसी सोच के साथ इस सीरीज में आगे बढ़ रहे हैं।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे संदर्भ में आया है जब भारतीय टीम प्रबंधन पर विभिन्न खिलाड़ियों को अवसर देने का दबाव रहता है।
व्यस्त शेड्यूल में शानदार अनुकूलन
कोच ने बताया कि पिछले एक महीने में टी20 कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। भारत ने 17 अक्टूबर 2026 को घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ पाँच मैचों की टी20 सीरीज समाप्त की और अगले ही दिन 18 अक्टूबर को न्यूज़ीलैंड के लिए उड़ान भरी। 22 अक्टूबर से न्यूज़ीलैंड में पाँच मैचों की सीरीज शुरू हुई और टीम ने शुरुआती तीनों मैच जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। गंभीर ने कहा, 'हमें बस एक प्रैक्टिस सेशन मिला। खिलाड़ियों की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कितनी जल्दी बिल्कुल अलग परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया।'
न्यूज़ीलैंड की चुनौती और टीम का जज़्बा
मुख्य कोच ने स्वीकार किया कि न्यूज़ीलैंड अपनी घरेलू सरज़मीं पर एक खतरनाक टीम है और कई भारतीय खिलाड़ी पहली बार वहाँ खेलने गए हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है तो लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। गंभीर के अनुसार, 'मेरी सोच में कोई भी मैच 'डेड रबर' नहीं होता और हमारी टीम के सभी खिलाड़ी भी इसी बात को मानते हैं।' यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि कोच प्रत्येक मैच को सीखने और खुद को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में देखते हैं।
आगे की राह
हैमिल्टन में 5वाँ और अंतिम टी20 मैच सीरीज में भारत की विदाई का अवसर होगा। सीरीज पहले ही जीत चुकी भारतीय टीम के लिए यह मैच युवा खिलाड़ियों को आज़माने का मंच बन सकता है। गंभीर की इस कोचिंग मानसिकता का असर आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में किस रूप में दिखता है, यह देखना दिलचस्प रहेगा।