1 नवंबर 2026
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गौतम गंभीर बोले — सही फैसले लेना मेरी ज़िम्मेदारी, न्यूज़ीलैंड में 3-1 की बढ़त पर टीम की तारीफ

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गौतम गंभीर बोले — सही फैसले लेना मेरी ज़िम्मेदारी, न्यूज़ीलैंड में 3-1 की बढ़त पर टीम की तारीफ

सारांश

गौतम गंभीर ने साफ कह दिया — उनका काम तालियाँ बटोरना नहीं, सही निर्णय लेना है। सोशल मीडिया के शोर के बीच यह बयान उनकी कोचिंग फिलॉसफी की साफ झलक देता है। भारत न्यूज़ीलैंड में 3-1 की अजेय बढ़त के साथ पाँचवें मैच में उतरेगा।

मुख्य बातें

मुख्य कोच गौतम गंभीर ने 1 नवंबर 2026 को हैमिल्टन में कहा कि उनका काम सबको खुश करना नहीं, बल्कि सही फैसले लेना है।
भारत ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पाँच मैचों की टी20 सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त बना ली है।
टीम ने 17 अक्टूबर को वेस्टइंडीज सीरीज खत्म की और 18 अक्टूबर को न्यूज़ीलैंड के लिए उड़ान भरी — महज एक प्रैक्टिस सेशन के साथ।
गंभीर ने ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखने को कोचिंग का अहम हिस्सा बताया।
कोच के अनुसार उनके लिए कोई भी मैच 'डेड रबर' नहीं होता — हर मुकाबला सीखने और बेहतर बनने का मौका है।

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने 1 नवंबर 2026 को हैमिल्टन में स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता सही निर्णय लेना है, न कि लोकप्रिय फैसलों से तालियाँ बटोरना। सेडन पार्क में पाँचवें टी20 मैच की पूर्व संध्या पर ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में उन्होंने यह बात दो-टूक कही। भारत इस पाँच मैचों की टी20 सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त के साथ सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुका है।

गंभीर की कोचिंग फिलॉसफी

गंभीर ने कहा, 'सबसे पहली बात, मेरा काम सबको खुश करना नहीं है। मेरा काम सही फैसले लेना है, न कि लोकप्रिय फैसले। मैं इसी काम के लिए यहाँ हूँ। मुझे लगता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया और बाहर होने वाली तमाम चर्चाओं के बीच चीज़ें कुछ अलग हो सकती हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि ड्रेसिंग रूम के अंदर खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखना उतना ही अहम है जितना कि मैदान पर परिणाम। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब टीम चयन और खिलाड़ियों को मौके देने को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस होती रहती है।

टीम का भरोसा और टैलेंट

गंभीर ने कहा, 'लोकप्रिय फैसला लेना बहुत आसान होता है। लेकिन मेरे लिए सही निर्णय लेना ज़्यादा ज़रूरी है। टीम में बहुत टैलेंट है। खिलाड़ियों ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है, इसलिए वे निश्चित रूप से और मौके पाने के हकदार हैं। हम इसी सोच के साथ इस सीरीज में आगे बढ़ रहे हैं।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे संदर्भ में आया है जब भारतीय टीम प्रबंधन पर विभिन्न खिलाड़ियों को अवसर देने का दबाव रहता है।

व्यस्त शेड्यूल में शानदार अनुकूलन

कोच ने बताया कि पिछले एक महीने में टी20 कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। भारत ने 17 अक्टूबर 2026 को घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ पाँच मैचों की टी20 सीरीज समाप्त की और अगले ही दिन 18 अक्टूबर को न्यूज़ीलैंड के लिए उड़ान भरी। 22 अक्टूबर से न्यूज़ीलैंड में पाँच मैचों की सीरीज शुरू हुई और टीम ने शुरुआती तीनों मैच जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। गंभीर ने कहा, 'हमें बस एक प्रैक्टिस सेशन मिला। खिलाड़ियों की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कितनी जल्दी बिल्कुल अलग परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया।'

न्यूज़ीलैंड की चुनौती और टीम का जज़्बा

मुख्य कोच ने स्वीकार किया कि न्यूज़ीलैंड अपनी घरेलू सरज़मीं पर एक खतरनाक टीम है और कई भारतीय खिलाड़ी पहली बार वहाँ खेलने गए हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है तो लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। गंभीर के अनुसार, 'मेरी सोच में कोई भी मैच 'डेड रबर' नहीं होता और हमारी टीम के सभी खिलाड़ी भी इसी बात को मानते हैं।' यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि कोच प्रत्येक मैच को सीखने और खुद को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में देखते हैं।

आगे की राह

हैमिल्टन में 5वाँ और अंतिम टी20 मैच सीरीज में भारत की विदाई का अवसर होगा। सीरीज पहले ही जीत चुकी भारतीय टीम के लिए यह मैच युवा खिलाड़ियों को आज़माने का मंच बन सकता है। गंभीर की इस कोचिंग मानसिकता का असर आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में किस रूप में दिखता है, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस दबाव की स्वीकृति भी है जो एक हाई-प्रोफाइल कोच को सोशल मीडिया युग में झेलना पड़ता है। भारतीय क्रिकेट में कोच की भूमिका हमेशा से विवादास्पद रही है — रवि शास्त्री से लेकर अनिल कुंबले तक, हर कोच को 'लोकप्रिय बनाम सही' की इसी दुविधा से गुज़रना पड़ा है। न्यूज़ीलैंड में 3-1 की बढ़त गंभीर के तरीकों को फिलहाल सही साबित करती है, लेकिन असली परीक्षा बड़े टूर्नामेंटों में होगी जहाँ टीम चयन और रणनीतिक फैसले कहीं ज़्यादा पड़ताल के दायरे में आते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ करती है कि 'सही फैसले' की परिभाषा तब और जटिल हो जाती है जब परिणाम विपरीत हों।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम गंभीर ने 'सही फैसले बनाम लोकप्रिय फैसले' पर क्या कहा?
गंभीर ने हैमिल्टन में 1 नवंबर 2026 को कहा कि उनका काम सबको खुश करना नहीं, बल्कि सही निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय फैसला लेना आसान होता है, लेकिन एक बड़ी टीम के कोच के नाते सही विकल्प चुनना उनकी असली ज़िम्मेदारी है।
भारत बनाम न्यूज़ीलैंड टी20 सीरीज 2026 का अब तक का हाल क्या है?
भारत ने पाँच मैचों की टी20 सीरीज में 3-1 की अजेय बढ़त बना ली है और सीरीज अपने नाम कर चुका है। पाँचवाँ और अंतिम मैच हैमिल्टन के सेडन पार्क में खेला जाना है।
भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड में इतनी जल्दी कैसे पहुँची?
भारत ने 17 अक्टूबर 2026 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज का आखिरी मैच खेला और 18 अक्टूबर को न्यूज़ीलैंड के लिए रवाना हो गया। टीम को तैयारी के लिए केवल एक प्रैक्टिस सेशन मिला, इसके बावजूद शुरुआती तीनों मैच जीते।
गंभीर ड्रेसिंग रूम का माहौल कैसे बनाए रखते हैं?
गंभीर के अनुसार खिलाड़ियों को ड्रेसिंग रूम में पूरा भरोसा महसूस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम में टैलेंट की कोई कमी नहीं है और लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी और मौके पाने के हकदार हैं।
क्या गंभीर के लिए कोई मैच 'डेड रबर' होता है?
नहीं। गंभीर ने स्पष्ट कहा कि उनकी सोच में कोई भी मैच 'डेड रबर' नहीं होता। उनके अनुसार हर अंतरराष्ट्रीय मैच कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर है, और टीम के सभी खिलाड़ी इसी सोच को मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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