भारतीय मिक्स्ड डिसेबिलिटी टीम इंग्लैंड दौरे से लौटी, कप्तान धीरज बोले — 'जीत के बेहद करीब थे'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ 7 मैचों की टी20 सीरीज खेलकर शुक्रवार, 21 अगस्त को स्वदेश लौटी। भारत ने सीरीज 3-4 से गँवाई, लेकिन कप्तान धीरज ने कहा कि टीम जीत के बेहद करीब थी और खिलाड़ियों का प्रदर्शन हर लिहाज़ से शानदार रहा। यह दौरा भारतीय दिव्यांग क्रिकेट के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
कप्तान धीरज की प्रतिक्रिया
दौरे से लौटने के बाद कप्तान धीरज ने कहा, 'हम जीत के काफी करीब थे।' उन्होंने कहा कि सीरीज बेहद रोमांचक रही और पूरी टीम अपने प्रदर्शन से संतुष्ट है। धीरज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीरीज खेलने का अवसर देने और हर ज़रूरी सुविधा मुहैया कराने का श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को दिया। उन्होंने टीम मैनेजमेंट की भी सराहना की।
कप्तान ने आगे कहा कि आने वाले समय में कई बड़े टूर्नामेंट और लीग मुकाबले होने वाले हैं, जिन पर टीम का पूरा ध्यान रहेगा। इस बीच खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर भी विशेष काम करेंगे।
लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत
सीरीज के सातवें और अंतिम टी20 मुकाबले में भारत ने क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड को एकतरफा अंदाज में 118 रनों से हराया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराते हुए सौरव गांगुली के प्रसिद्ध अंदाज़ में जश्न मनाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ।
DCCI महासचिव की सराहना
डिफरेंटली-एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (DCCI) के संस्थापक और महासचिव रवि चौहान ने टीम के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भले ही सीरीज 3-4 से हाथ से निकल गई, लेकिन यह परिणाम निराशाजनक नहीं है। चौहान ने बताया कि इंग्लैंड की मिक्स्ड डिसेबिलिटी टीम पिछले 7 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रही है, जबकि भारतीय टीम ने महज 2 साल पहले ही इस स्तर पर खेलना शुरू किया है। इस पृष्ठभूमि में टीम का प्रदर्शन कई गुना बेहतर माना जाना चाहिए।
रवि चौहान ने लॉर्ड्स की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उस मैदान पर जीत दर्ज करना हर क्रिकेटर का सपना होता है और भारतीय दिव्यांग टीम ने वह सपना साकार किया।
आगे की राह
रवि चौहान ने कहा कि आने वाले समय में इस टीम और खिलाड़ियों पर और मेहनत की जाएगी, ताकि भारत की यह टीम जल्द ट्रॉफी जीत सके। यह दौरा भारतीय दिव्यांग क्रिकेट के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है — अनुभव मिला, आत्मविश्वास बढ़ा और लॉर्ड्स की जीत ने यह साबित किया कि भविष्य उज्जवल है।