21 अगस्त 2026
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पटियाला हाउस कोर्ट ने जैकब मार्टिन को 22 साल पुराने फर्जी वीज़ा मामले में बरी किया

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पटियाला हाउस कोर्ट ने जैकब मार्टिन को 22 साल पुराने फर्जी वीज़ा मामले में बरी किया

सारांश

22 साल की कानूनी लड़ाई खत्म — पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज जैकब मार्टिन को 2004 के फर्जी यूके आव्रजन स्टाम्प मामले में बरी किया। मार्टिन ने कहा कि एफआईआर में उनका नाम नहीं था, फिर भी 'बड़ा नाम' होने के कारण मामले में घसीटे गए और रेलवे की नौकरी गँवानी पड़ी।

मुख्य बातें

पटियाला हाउस कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को पूर्व क्रिकेटर जैकब मार्टिन को 2004 के मामले में सभी आरोपों से बरी किया।
आरोप फर्जी यूके आव्रजन स्टाम्प , यात्रा व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़े थे, जो अदालत में साबित नहीं हो सके।
मूल एफआईआर में मार्टिन का नाम नहीं था; जाँच के दौरान बाद में जोड़ा गया।
मार्टिन ने बताया कि इस मामले के कारण उन्होंने रेलवे की नौकरी गँवाई और बीसीसीआई से कोई सहयोग नहीं मिला।
मार्टिन ने सितंबर 1999 से अक्टूबर 2001 के बीच भारत के लिए 10 वनडे खेले और 158 रन बनाए।

पटियाला हाउस कोर्ट ने 21 अगस्त 2026 को पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को 2004 के एक बहुचर्चित मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत को फर्जी यूके आव्रजन स्टाम्प, यात्रा व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला। इस फैसले के साथ 22 वर्षों की कानूनी लड़ाई का अंत हुआ।

मामले की पृष्ठभूमि

मार्टिन के अनुसार, 2004 में उनकी क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर गई थी। दल के एक सदस्य ने छह महीने के वीज़े की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी वहाँ रुककर फर्जी आव्रजन स्टाम्प लगवाई और भारत लौटा। नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पकड़े जाने के बाद उससे पूछताछ हुई और ब्रिटेन ने उसे डिपोर्ट कर दिया था। मूल एफआईआर में जैकब मार्टिन का नाम नहीं था — जाँच के दौरान उनका नाम बाद में जोड़ा गया।

अदालत का निर्णय

अदालत ने पाया कि अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर मार्टिन के स्वामित्व या नियंत्रण से जुड़ा कोई प्रामाणिक प्रमाण पेश नहीं किया जा सका। वित्तीय लेनदेन के आरोप भी असिद्ध रहे। अभियोजन पक्ष के कई गवाह भी इन आरोपों को स्थापित करने में विफल रहे, जिसके बाद अदालत ने मार्टिन को सभी आरोपों से मुक्त करार दिया।

मार्टिन की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए मार्टिन ने कहा, 'मेरा नाम एफआईआर में नहीं था, लेकिन एक बड़ा नाम होने के नाते मुझे इस मामले में घसीटा गया। इन 22 वर्षों के दौरान मुझे बीसीसीआई से भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। मैंने रेलवे में अपनी नौकरी खो दी। अब मुझे क्लीन चिट मिल गई है — यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा यू-टर्न है।'

जैकब मार्टिन का क्रिकेट करियर

घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा, असम और रेलवे का प्रतिनिधित्व करने वाले जैकब मार्टिन ने सितंबर 1999 से अक्टूबर 2001 के बीच भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 10 वनडे मैच खेले। 8 पारियों में उन्होंने 158 रन बनाए। यह मामला उनके सक्रिय करियर के बाद के वर्षों में उठा और दो दशक से अधिक समय तक उनकी ज़िंदगी पर साया बना रहा।

आगे क्या

अदालत के इस फैसले के बाद मार्टिन के पास अपनी पेशेवर प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना का मार्ग खुला है। यह मामला उन खिलाड़ियों की स्थिति को भी रेखांकित करता है जो किसी और के कृत्य के कारण कानूनी पचड़े में फँस जाते हैं और जिनके लिए संस्थागत समर्थन प्रायः अपर्याप्त रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह संस्थागत समर्थन के लिए 22 साल तक दरवाज़ा खटखटाता रहा और जवाब नहीं मिला। अदालती बरी होना न्याय की शुरुआत है, अंत नहीं — असली सवाल यह है कि क्या बीसीसीआई और रेलवे बोर्ड अब इस खिलाड़ी के खोए वर्षों की भरपाई के लिए कोई कदम उठाएँगे।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैकब मार्टिन को किस मामले में बरी किया गया है?
पटियाला हाउस कोर्ट ने जैकब मार्टिन को 2004 के उस मामले में बरी किया है जिसमें उन पर फर्जी यूके आव्रजन स्टाम्प, यात्रा व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप थे। अदालत को इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
जैकब मार्टिन का नाम इस मामले में कैसे आया?
मार्टिन के अनुसार मूल एफआईआर में उनका नाम नहीं था। 2004 में उनकी टीम के एक सदस्य ने ब्रिटेन में वीज़ा की समय-सीमा से अधिक रुककर फर्जी स्टाम्प लगवाई और डिपोर्ट हुआ। जाँच के दौरान 'बड़ा नाम' होने के कारण मार्टिन को मामले में जोड़ा गया।
इस मामले का जैकब मार्टिन के जीवन पर क्या असर पड़ा?
मार्टिन ने बताया कि इस 22 वर्षीय कानूनी लड़ाई के दौरान उन्होंने रेलवे में अपनी नौकरी गँवाई और बीसीसीआई से कोई सहयोग नहीं मिला। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा तनाव बताया।
जैकब मार्टिन का भारतीय क्रिकेट करियर कैसा रहा?
जैकब मार्टिन ने सितंबर 1999 से अक्टूबर 2001 के बीच भारत के लिए 10 वनडे मैच खेले और 8 पारियों में 158 रन बनाए। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने बड़ौदा, असम और रेलवे का प्रतिनिधित्व किया।
अजवा स्पोर्ट्स क्लब इस मामले से कैसे जुड़ा था?
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि जैकब मार्टिन का अजवा स्पोर्ट्स क्लब पर स्वामित्व या नियंत्रण था और यह वित्तीय लेनदेन से जुड़ा था। अदालत ने पाया कि इस दावे को साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका।
राष्ट्र प्रेस
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