क्रांति गौड़ का एक्शन मोहम्मद शमी जैसा, लॉर्ड्स हीरो 7-8 साल तक खेलेंगी: निरंजना नागराजन
सारांश
मुख्य बातें
भारत की पूर्व तेज गेंदबाज निरंजना नागराजन ने उभरती हुई महिला तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ के गेंदबाजी एक्शन की तुलना अनुभवी पुरुष तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी से की है और भरोसा जताया है कि क्रांति अगले 7-8 साल तक भारत के लिए खेलती रहेंगी। लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ 270 रनों की ऐतिहासिक जीत में क्रांति और यास्तिका भाटिया की निर्णायक भूमिका रही थी।
क्रांति गौड़ की गेंदबाजी पर निरंजना का आकलन
निरंजना नागराजन ने कहा, "एक तेज गेंदबाज के तौर पर यह मेरे लिए बहुत गर्व का पल है कि क्रांति गौड़ का नाम ऑनर बोर्ड पर लिखा गया।" उन्होंने बताया कि उन्होंने क्रांति को कुछ साल पहले तब पहली बार देखा था जब मध्य प्रदेश ने घरेलू वनडे ट्रॉफी जीती थी और तभी यह अंदाजा हो गया था कि यह खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करेगी।
पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, "उसके एक्शन को देखते हुए गलती की गुंजाइश बहुत कम है। उसे बस सही लेंथ पर गेंदबाजी करने पर ध्यान देना है और उसके एक्शन की वजह से यह अपने आप हो जाता है। मुझे हमेशा लगा कि उसका एक्शन थोड़ा मोहम्मद शमी जैसा है।" उन्होंने क्रांति के शानदार रन-अप और सीम पर गेंद हिट करने की क्षमता को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया।
टीम प्रबंधन के भरोसे की अहमियत
निरंजना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ 13 महीनों में क्रांति की लगातार तरक्की के पीछे टीम प्रबंधन के अटूट भरोसे को अहम करार दिया। उन्होंने कहा कि हरमनप्रीत कौर ने एक बार कहा था कि उन्हें ऐसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है जिन पर भरोसा किया जा सके और जिन्हें गेंद सौंपी जा सके। निरंजना के अनुसार, क्रांति की प्रतिभा को नजरअंदाज करना संभव नहीं था।
पूर्व तेज गेंदबाज ने कहा, "वह अभी और आगे जाएंगी। वह पहले से ज्यादा मजबूत हुई हैं और दबाव को संभालने के लिए मानसिक रूप से भी बेहतर स्थिति में हैं। अगर मैं सही हूं, तो उन्हें कम से कम अगले 7-8 साल तक भारत के लिए खेलना चाहिए।"
यास्तिका भाटिया की मानसिक मजबूती
निरंजना ने लॉर्ड्स में पहला अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाली बल्लेबाज यास्तिका भाटिया की भी भरपूर तारीफ की। गौरतलब है कि यास्तिका घुटने की चोट के कारण भारत के 2025 वनडे विश्व कप अभियान का हिस्सा नहीं बन पाई थीं और टी20 विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन साधारण रहा था।
निरंजना ने कहा, "चोट से उबरना कभी आसान नहीं होता। यह एक मानसिक लड़ाई है और वह इससे बहुत अच्छे से उबरकर आई हैं। उन्होंने मैनेजमेंट के भरोसे को कायम रखा है। जिस चीज ने उन्हें अलग बनाया, वह है उनकी मानसिक मजबूती, जो उन्होंने उन 100 रनों की पारी के दौरान दिखाई।" पूर्व तेज गेंदबाज ने यह भी कहा कि यास्तिका को अभी लंबा सफर तय करना है।
घरेलू मल्टी-डे क्रिकेट की भूमिका
निरंजना ने भारतीय महिला टेस्ट टीम के हालिया शानदार नतीजों के पीछे बीसीसीआई द्वारा घरेलू मल्टी-डे टूर्नामेंट को फिर से शुरू करने को एक अहम वजह माना। उन्होंने कहा कि 2-3 साल पहले लड़कियों को लंबे फॉर्मेट के बारे में कोई अंदाजा नहीं था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
उन्होंने सुझाव दिया कि रेड-बॉल क्रिकेट विकास के लिए अंडर-23 का स्तर सबसे उपयुक्त है और अंडर-19 में इसे लागू करना उचित नहीं होगा क्योंकि वह खिलाड़ी के विकास का नाजुक दौर होता है। निरंजना ने यह भी कहा कि महिला प्रीमियर लीग (WPL) आने के बाद से भारतीय महिला क्रिकेट में बड़ा परिवर्तन आया है।
लॉर्ड्स टेस्ट में क्रांति और यास्तिका का प्रदर्शन
मैच के संदर्भ में, क्रांति गौड़ ने पहली पारी में 5 विकेट लेकर भारत को 115 रनों की अहम बढ़त दिलाई थी, जबकि यास्तिका भाटिया ने दूसरी पारी में शतक लगाकर उस बढ़त को विशाल बनाया। इन दोनों के योगदान से भारत ने इंग्लैंड को 270 रनों से हराकर यादगार जीत दर्ज की। यास्तिका लॉर्ड्स टेस्ट में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। आने वाले समय में इन दोनों युवा खिलाड़ियों से भारतीय महिला क्रिकेट को और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद है।