लिएंडर पेस: डबल्स के महानतम खिलाड़ी, 18 ग्रैंड स्लैम और ओलंपिक कांस्य के साथ भारत का टेनिस गौरव
सारांश
मुख्य बातें
टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का नाम भारतीय खेल इतिहास में उन चुनिंदा नामों में शामिल है, जिन्होंने क्रिकेट-प्रधान देश में किसी अन्य खेल को वैश्विक पहचान दिलाई। 17 जून 1973 को कलकत्ता में जन्मे पेस ने डबल्स और मिश्रित डबल्स में 18 ग्रैंड स्लैम खिताब जीतकर अपना नाम विश्व टेनिस के इतिहास में दर्ज कराया। 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल वर्ग में कांस्य पदक जीतकर वे ओलंपिक टेनिस में पदक हासिल करने वाले एकमात्र भारतीय बने।
प्रारंभिक जीवन और टेनिस की शुरुआत
पेस के पिता वेस पेस और माता जेनिफर पेस, दोनों खेल से जुड़े रहे, जिसने उन्हें बचपन से ही खेल की ओर प्रेरित किया। पेस ने मात्र 12 वर्ष की आयु में चेन्नई की एक टेनिस अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान 1990 में तब बनी, जब 17 साल की उम्र में उन्होंने विंबलडन जूनियर खिताब जीता — और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
ओलंपिक पदक और एकल करियर
पेस ने 1996 अटलांटा ओलंपिक में पुरुष एकल टेनिस स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में एक अध्याय लिखा। वे आज भी ओलंपिक टेनिस में पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय हैं। यह ऐसे समय में आया जब भारत में टेनिस को क्रिकेट की तुलना में बेहद कम समर्थन और संसाधन मिलते थे।
डबल्स में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
पेस को उनकी असली पहचान डबल्स में मिली। उन्होंने 8 डबल्स ग्रैंड स्लैम खिताब जीते — ऑस्ट्रेलियन ओपन 2012, फ्रेंच ओपन 1999, 2001 और 2009, विंबलडन 1999, तथा यूएस ओपन 2006, 2009 और 2013 में। उनके सबसे सफल डबल्स साझेदार महेश भूपति रहे, जो स्वयं भी भारतीय टेनिस के एक दिग्गज नाम हैं। इस जोड़ी को विश्व टेनिस में 'इंडियन एक्सप्रेस' के नाम से जाना गया।
मिश्रित डबल्स में दस खिताब
मिश्रित डबल्स में पेस ने 10 ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किए। उनकी जोड़ी मार्टिना हिंगिस और मार्टिना नवरातिलोवा के साथ सफल रही। उन्होंने मिश्रित डबल्स में ऑस्ट्रेलियन ओपन (2003, 2010, 2015), फ्रेंच ओपन (2016), विंबलडन (1999, 2003, 2010, 2015) और यूएस ओपन (2008, 2015) में खिताब जीते। गौरतलब है कि पेस ने चारों मेजर ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट डबल्स और मिश्रित डबल्स दोनों में जीते — यह उपलब्धि बेहद कम खिलाड़ियों को हासिल होती है।
सम्मान, संन्यास और भविष्य
भारत सरकार ने पेस की उपलब्धियों को मान्यता देते हुए 1990 में अर्जुन पुरस्कार, 1996-97 में ध्यानचंद खेल रत्न, 2001 में पद्मश्री और जनवरी 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया। 2020 में आधिकारिक संन्यास की घोषणा के बाद भी पेस युवा टेनिस खिलाड़ियों को प्रशिक्षित और प्रेरित करने में सक्रिय हैं। 17 जून 2026 को 53 वर्ष के होने वाले पेस भारतीय खेल जगत में प्रेरणा का एक जीवंत प्रतीक बने हुए हैं।