लवलीना बोरगोहेन का CWG 2026 सिल्वर मेडल असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित, देव बरुआ ने जताया गर्व
सारांश
मुख्य बातें
लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर असम और पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा किया, और इस ऐतिहासिक उपलब्धि को उन्होंने असम के बाढ़ पीड़ित लोगों को समर्पित किया। गोलाघाट जिले के बारो मुखिया गाँव की इस बेटी की जीत के बाद उनके गृह जिले में खुशी और उत्साह का माहौल है।
मुख्य उपलब्धि
लवलीना बोरगोहेन इस जीत के साथ मैरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज़ बन गई हैं। इससे पहले वे एशियन गेम्स में सिल्वर और टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में 69 किग्रा और 75 किग्रा वेट कैटेगरी में उन्होंने एक गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम किए हैं।
देव बरुआ की प्रतिक्रिया
असम बॉक्सिंग एसोसिएशन के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी देव बरुआ ने लवलीना की इस उपलब्धि पर हर्ष और गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "फाइनल में असम की बेटी लवलीना बोरगोहेन ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जिसके लिए मैं असम बॉक्सिंग एसोसिएशन की तरफ से उन्हें बधाई देता हूँ। लवलीना ने अपना मेडल बाढ़ पीड़ित लोगों को समर्पित किया है।" बरुआ ने आगे बताया कि डेरगांव में ही लवलीना ने अपनी पहली डेब्यू बाउट लड़ी थी और ओलंपिक मेडल के बाद से वे स्थानीय मुक्केबाज़ों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, "वह जब भी मुझसे मिलती हैं, तो यहाँ के बॉक्सर्स के बारे में ज़रूर पूछती हैं।"
बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना
लवलीना ने मेडल जीतने के बाद असम में बाढ़ की विकट स्थिति पर गहरी पीड़ा जताई। उन्होंने कहा, "अभी असम में हालात बहुत मुश्किल हैं। अपने लोगों को इस हालत में देखकर बहुत बुरा लगता है। बाढ़ का असर पानी उतरने के बाद भी खत्म नहीं होता, और अभी तो यह खत्म भी नहीं हुआ है। मैं अपना सिल्वर मेडल बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना चाहती हूँ।" उन्होंने यह भी कहा कि इस मुश्किल घड़ी में असम से दूर रहने का उन्हें गहरा अफसोस है।
असम के मुक्केबाज़ों पर प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब असम में युवा मुक्केबाज़ों की एक नई पीढ़ी तैयार हो रही है। लवलीना की लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलताएँ — ओलंपिक से लेकर कॉमनवेल्थ तक — राज्य के खेल परिदृश्य को नई दिशा दे रही हैं। गौरतलब है कि गोलाघाट जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से निकलकर विश्व मंच पर तिरंगा लहराना, असम के हज़ारों युवा खिलाड़ियों के लिए एक जीवंत उदाहरण है।
आगे क्या
लवलीना की इस जीत के बाद असम बॉक्सिंग एसोसिएशन राज्य में प्रशिक्षण सुविधाओं को और मज़बूत करने की दिशा में काम करने का संकेत दे रही है। उनकी उपलब्धि आने वाले ओलंपिक चक्र में भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए नई उम्मीदें भी जगाती है।