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लवलीना बोरगोहेन ने घुटने की चोट के साथ लड़ा CWG 2026 फाइनल, सिल्वर असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित

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लवलीना बोरगोहेन ने घुटने की चोट के साथ लड़ा CWG 2026 फाइनल, सिल्वर असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित

सारांश

चोट के दर्द को पीछे छोड़ और असम की बाढ़ का दर्द दिल में लिए — लवलीना बोरगोहेन का CWG 2026 रजत पदक महज़ एक खेल उपलब्धि नहीं, एक भावनात्मक समर्पण भी है। घुटने पर टेप के साथ फाइनल में उतरना और जीत को अपने बाढ़-पीड़ित लोगों को सौंपना — यही उन्हें भारतीय खेल की असली आवाज़ बनाता है।

मुख्य बातें

लवलीना बोरगोहेन ने CWG 2026 के महिला 75 किग्रा फाइनल में घुटने की चोट के बावजूद मुकाबला किया और रजत पदक जीता।
फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री ने उन्हें 4-1 से हराया; सेमीफाइनल में लवलीना ने तुवालू की प्रतिद्वंद्वी को 5-0 से हराया था।
लवलीना ने अपना रजत पदक असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया।
मेरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद हर बड़े टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज़ बनीं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में यह उनकी तीसरी भागीदारी और पहला पदक था।

लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला 75 किग्रा वर्ग के फाइनल में घुटने की चोट के बावजूद मैदान में उतरकर रजत पदक अपने नाम किया। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता इस भारतीय मुक्केबाज़ ने 2 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि दर्द को नज़रअंदाज़ कर प्रतिस्पर्धा करना एक एथलीट की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने यह रजत पदक असम में बाढ़ से जूझ रहे पीड़ितों को समर्पित किया।

मुख्य घटनाक्रम

लवलीना को महिला 75 किग्रा वर्ग में सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिला था। सेमीफाइनल में उन्होंने तुवालू की तरोना खानम बदी पसोनी ताफाकी को 5-0 के एकतरफा स्कोर से पराजित किया। हालाँकि, फाइनल में ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री ने उन्हें 4-1 से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा किया।

फाइनल के दौरान लवलीना के घुटने पर टेप स्पष्ट रूप से दिख रहा था, जिससे दर्शकों और प्रशंसकों में उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई। बावजूद इसके, उन्होंने पूरे मुकाबले में संघर्षपूर्ण प्रदर्शन किया।

लवलीना की ज़ुबानी — चोट और जज़्बा

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रेस कॉन्फ्रेंस में लवलीना ने अपनी स्थिति का खुलासा करते हुए कहा, 'मेरे घुटने में मामूली चोट थी, लेकिन यह बॉक्सिंग का हिस्सा है। हर किसी को चोटों के बावजूद मुकाबला करना पड़ता है। दर्द की वजह से मैंने अपने घुटने पर टेप लगाया था। हमेशा इन चीजों के साथ खेलना पड़ता है — हमें बस चोटों से उबरकर मुकाबला करना होता है।'

असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पण

पदक जीतने के बाद लवलीना ने अपने गृह राज्य असम में जारी बाढ़ की विभीषिका पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'अभी असम में हालात बहुत मुश्किल हैं। अपने लोगों को इस हालत में देखकर बहुत बुरा लगता है। बाढ़ का असर पानी उतरने के बाद भी खत्म नहीं होता, और अभी तो यह खत्म भी नहीं हुआ है। मैं अपना सिल्वर मेडल बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना चाहती हूं और मुझे इस बात का भी बहुत अफसोस है कि इस मुश्किल समय में मैं असम में नहीं थी।'

ऐतिहासिक उपलब्धि — मेरी कॉम और विजेंदर की श्रेणी में

ग्लासगो में आयोजित इस कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने के साथ ही लवलीना मेरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज़ बन गई हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में यह उनकी तीसरी भागीदारी थी और पहला पदक। इससे पूर्व वह टोक्यो ओलंपिक में कांस्य, एशियन गेम्स में रजत और विश्व चैंपियनशिप में 69 किग्रा तथा 75 किग्रा वर्ग में एक स्वर्ण व दो कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

आगे की राह

घुटने की चोट की गंभीरता को देखते हुए लवलीना की रिकवरी और आगामी प्रतियोगिताओं में उनकी भागीदारी पर नज़र रहेगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि चिकित्सा टीम उन्हें कितने समय में पूरी तरह फिट घोषित करती है, क्योंकि आने वाले अंतरराष्ट्रीय सत्र में भारतीय मुक्केबाज़ी की उम्मीदें काफी हद तक उन पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी यह है कि कैसे एक एथलीट व्यक्तिगत पीड़ा और सामाजिक दायित्व दोनों को एक साथ वहन करती है। मेरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद यह मुकाम हासिल करना भारतीय मुक्केबाज़ी की गहरी होती जड़ों का संकेत है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लवलीना बोरगोहेन ने CWG 2026 में कौन-सा पदक जीता?
लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला 75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता। फाइनल में उन्हें ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री ने 4-1 से हराया।
लवलीना के घुटने पर टेप क्यों था?
लवलीना को फाइनल से पहले घुटने में मामूली चोट लगी थी, जिसके कारण उन्होंने टेप लगाकर मैदान में उतरने का फैसला किया। उन्होंने खुद बताया कि चोटों के साथ खेलना प्रतिस्पर्धी मुक्केबाज़ी का सामान्य हिस्सा है।
लवलीना ने अपना मेडल किसे समर्पित किया?
लवलीना ने अपना रजत पदक असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में अपने लोगों से दूर रहने का उन्हें गहरा अफसोस है।
CWG 2026 में लवलीना की क्या उपलब्धि ऐतिहासिक मानी जा रही है?
इस रजत पदक के साथ लवलीना मेरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज़ बन गई हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में यह उनकी तीसरी भागीदारी में पहला पदक भी था।
लवलीना बोरगोहेन का अब तक का पदक रिकॉर्ड कैसा है?
लवलीना के नाम टोक्यो ओलंपिक में कांस्य, एशियन गेम्स में रजत, और विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण व दो कांस्य पदक दर्ज हैं। CWG 2026 का रजत पदक उनके करियर का नवीनतम और महत्त्वपूर्ण अध्याय है।
राष्ट्र प्रेस
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