एशियन गेम्स 2026 में डेब्यू को तैयार मनीषा: 57 किग्रा कैटेगरी में नई चुनौती, दोनों स्टांस पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान मनीषा एशियन गेम्स 2026 में पहली बार उतरने की तैयारी कर रही हैं और उन्होंने अपने खेल में एक अहम बदलाव किया है — 62 किलोग्राम से 57 किलोग्राम कैटेगरी में आना। इस नई वज़न श्रेणी के अनुरूप ढलने के लिए उन्होंने अपनी ताकत और तकनीक, दोनों पर गहन काम किया है। खास बात यह है कि वह अब केवल दाईं ओर से नहीं, बल्कि बाईं ओर से भी रेसलिंग करने में माहिर हो रही हैं।
दोनों स्टांस पर काम — रणनीतिक बदलाव
मनीषा ने कहा, 'मैं पहले ज़्यादातर दाईं ओर से खेलती थी, लेकिन अब मैंने बाईं ओर से भी खेलना शुरू कर दिया है। मैं दोनों स्टांस पर काम करने की कोशिश कर रही हूँ क्योंकि मैं दोनों तरफ से खेलने में सहज महसूस करना चाहती हूँ।' उन्होंने जोड़ा कि तकनीक और ताकत के साथ-साथ मानसिक सोच में बदलाव और नई कैटेगरी के अनुसार खुद को ढालना भी उतना ही ज़रूरी है।
यह बदलाव सिर्फ शारीरिक नहीं है। 57 किग्रा में प्रतिस्पर्धी परिदृश्य अलग है और मनीषा इसे एक अवसर के रूप में देख रही हैं।
पहले एशियन गेम्स का उत्साह
मनीषा के लिए एशियन गेम्स का यह पहला अनुभव विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा, 'भारत का प्रतिनिधित्व करना हर एथलीट का सपना होता है, इसलिए मैं थोड़ी उत्साहित हूँ क्योंकि यह मेरे पहले एशियन गेम्स हैं। मेरा लक्ष्य बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मानसिक रूप से मैं तैयार हूँ, बस अपनी गति बनाए हुए हूँ।' कुछ समय से भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद इतने बड़े मंच पर उतरना उनके लिए एक नए स्तर की प्रेरणा लेकर आया है।
मनीषा का सफर: 2013 से एशियन गेम्स तक
रेसलिंग में मनीषा की शुरुआत 2013 में हुई, जब उनके पिता ने उन्हें फिटनेस के लिए एक कैंप में भेजा था। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि वह इस खेल में आगे जा सकती हैं। शुरुआती दबाव और आत्मसंशय की जगह 2021 के बाद से मानसिक मज़बूती ने ले ली। उन्होंने कहा, 'जब मैं चोटिल हो जाती हूँ और मुकाबला नहीं कर पाती, तब भी शक होता है, लेकिन मैं प्रैक्टिस करती रहती हूँ। शिद्दत से काम करो और दिल से चाहो तो कैसे नहीं होगा।'
यह मानसिकता उनकी तैयारी की रीढ़ बन गई है — विशेष रूप से वज़न कैटेगरी बदलने जैसे कठिन निर्णय के बाद।
कोच अकाइशी और IIS का अहम योगदान
मनीषा की तैयारी में जापानी कोच कोसेई अकाइशी, जो इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) में रेसलिंग के हेड कोच भी हैं, की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके तकनीकी मार्गदर्शन ने मनीषा को 57 किग्रा कैटेगरी में तेज़ी से ढलने में मदद दी है। मनीषा ने कहा, 'कोच अकाइशी हमें बहुत कुछ सिखा रहे हैं। भारतीय टीम के कैंप बहुत फायदेमंद होते हैं — हम सब एक-दूसरे से सीखते हैं और साथ ट्रेनिंग करने पर अपना बेस्ट दे पाते हैं।'
IIS ने सप्लीमेंट्स से लेकर ट्रेनिंग सुविधाओं तक हर पहलू में मनीषा का साथ दिया है, जो उनके अनुसार उनके करियर के लिए 'बहुत अहम' रहा है।
प्रेरणास्रोत बनती मनीषा — युवा लड़कियों को मिल रहा हौसला
अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के अलावा, मनीषा को यह देखकर गहरी खुशी होती है कि उनकी यात्रा से प्रेरित होकर उनके गाँव की युवा लड़कियाँ कुश्ती की ओर आ रही हैं। वह खुद भी युवा एथलीटों को कोचिंग देती हैं। उन्होंने कहा, 'जब आप किसी को खुद को देखकर इस खेल में आते हुए देखते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है।' यह सामाजिक प्रभाव मनीषा के खेल को एक व्यक्तिगत उपलब्धि से परे एक बड़े बदलाव का प्रतीक बनाता है।
एशियन गेम्स 2026 के मैट पर उतरने से पहले मनीषा का संदेश सीधा है: 'मुश्किल तो बहुत होती है, लेकिन मेहनत करने से सब हो जाता है। अगर यह इतना आसान होता तो हर कोई कर लेता।' — और इसी दृढ़ता के साथ वह अपने पहले एशियन गेम्स में कदम रखने वाली हैं।