फीफा वर्ल्ड कप 2026: मेहताब हुसैन ने इंग्लैंड और पुर्तगाल को बताया मजबूत दावेदार
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय फुटबॉलर मेहताब हुसैन ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड और पुर्तगाल को प्रमुख दावेदार करार दिया है। 12 जून 2026 (भारतीय समय) से शुरू हो रहे इस विश्व कप में कुल 48 देश खिताब की दौड़ में होंगे — जो अब तक का सबसे बड़ा फीफा टूर्नामेंट है।
मेहताब हुसैन की पसंद: इंग्लैंड और पुर्तगाल
हुसैन ने कहा, "इंग्लैंड इस बार 'डार्क हॉर्स' साबित हो सकता है। इस टीम ने अपने खेल में काफी बदलाव किया है। उसके खिलाड़ी शीर्ष क्लब में खेलते हैं। अगर टीम का फोकस अच्छा रहा, तो यह टीम डार्क हॉर्स बन सकती है।" उन्होंने पुर्तगाल के बारे में कहा, "मुझे पुर्तगाल से भी खासा उम्मीदें हैं, जो इस समय बेहद संतुलित नजर आ रही है। इस साल पुर्तगाल के पास मौका होगा।"
युवा सितारों पर नजर
हुसैन ने इस टूर्नामेंट में कुछ युवा खिलाड़ियों से बड़े प्रदर्शन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, "रायन चेर्की, लैमिन यामल, गैवी, पेड्रे, ज्यूड बेलिंघम जैसे खिलाड़ी इस विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि यह नेमार, मेसी और रोनाल्डो के लिए संभवतः अंतिम वर्ल्ड कप हो सकता है — एक युग के अंत का संकेत।
यूरोप और लैटिन अमेरिका का दबदबा
हुसैन के अनुसार, "अर्जेंटीना ने पिछले दो-तीन विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया है। यूरोप और लैटिन अमेरिका की टीमें इस खेल में दबदबा रखती हैं। यहां की टीमें शीर्ष 4 में रह सकती हैं।" गौरतलब है कि 1930 से अब तक फीफा विश्व कप का खिताब केवल यूरोपीय या लैटिन अमेरिकी देशों ने जीता है।
भारत में फुटबॉल का भविष्य
पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले हुसैन ने भारतीय फुटबॉल के भविष्य पर भी बात की। उन्होंने कहा, "भारतीय खिलाड़ियों को इन टीमों से सीख लेनी चाहिए। हमें रोनाल्डो जैसे खिलाड़ियों को रोल-मॉडल बनाना चाहिए।" उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वह देश 1965 के बाद से फुटबॉल में तेजी से आगे बढ़ा है और भारत को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक ठोस मॉडल तैयार करना होगा।
पश्चिम बंगाल में फुटबॉल की दीवानगी
हुसैन ने बताया कि उन्होंने बचपन से फीफा वर्ल्ड कप देखा है और माराडोना का खेल देखकर वे अर्जेंटीना के प्रशंसक बने। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में फुटबॉल के प्रति काफी दीवानगी रही है। इस साल मुकाबले भारत के समय के अनुसार रात में हैं, लेकिन फिर भी लोग इस टूर्नामेंट को देखेंगे, क्योंकि यह चार साल में एक बार आता है।" यह टूर्नामेंट भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता को एक बार फिर परखेगा।