निशा मिलेट: पानी के डर को मात देकर तैराकी में देश को दिलाया गोल्ड

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निशा मिलेट: पानी के डर को मात देकर तैराकी में देश को दिलाया गोल्ड

सारांश

निशा मिलेट ने पानी से डरने के बावजूद तैराकी में अपने अद्वितीय सफर से देश का नाम रोशन किया। उनकी उपलब्धियों ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया है। जानिए उनके जीवन की कहानी!

Key Takeaways

  • निशा मिलेट ने पानी के डर को मात दी और तैराकी में महान उपलब्धियाँ हासिल कीं।
  • उन्होंने 1999 में 14 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा।
  • सिडनी ओलंपिक में भाग लेकर उन्होंने भारतीय महिला तैराकी को नई ऊँचाइयाँ दीं।
  • उनका जीवन संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी है।
  • संन्यास के बाद, उन्होंने तैराकी अकादमी की स्थापना की।

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। निशा मिलेट का नाम भारत के सबसे प्रतिभाशाली और सफल तैराकों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से उन्होंने देश का नाम रोशन किया है।

निशा मिलेट का जन्म बेंगलुरु में 20 मार्च 1982 को हुआ। तैराकी के क्षेत्र में करियर बनाने वाली निशा ने अपने बचपन में पानी से डर रखा था। जब वह केवल 5 साल की थीं, तब एक डूबने की घटना ने उन्हें गहरे पानी के प्रति भयभीत किया। इस डर को दूर करने के लिए उनके पिता, ऑब्रे, ने उन्हें तैराकी सिखाने का निर्णय लिया। 1991 में, चेन्नई के शेनॉयनगर क्लब में उन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन में तैराकी का अभ्यास शुरू किया।

डर को मात देते हुए तैराकी का यह सफर कब उनके जुनून में बदल गया, यह खुद उन्हें भी नहीं पता चला। उन्होंने तैराकी में कड़ी मेहनत शुरू की और 1992 में 50 मीटर फ्रीस्टाइल में अपना पहला राज्य स्तर का पदक जीता।

1994 में, सब-जूनियर के दौरान उन्होंने सीनियर नेशनल स्तर पर फ्रीस्टाइल इवेंट्स में गोल्ड मेडल जीतकर सबको हैरान कर दिया। इसी वर्ष उन्होंने हांगकांग में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप में भी पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता। निशा मिलेट ने 1998 के एशियन गेम्स, 1999 और 2004 की वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित कई बड़े टूर्नामेंट्स में भारत का नाम गर्व से ऊंचा किया। 1999 के नेशनल गेम्स में उन्होंने 14 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

1999 में काठमांडु में आयोजित दक्षिण एशियाई खेलों में तैराकी के विभिन्न इवेंट्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीते।

उनके करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर 2000 का सिडनी ओलंपिक था, जहां उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल में भाग लिया। उन्होंने अपनी हीट में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन सेमीफाइनल में स्थान नहीं बना सकीं। वह ओलंपिक के लिए बी क्वालिफिकेशन टाइम हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला तैराक बनीं।

उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर फ्रीस्टाइल में 15 साल तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम रखा। साथ ही, 100 मीटर फ्रीस्टाइल में एक मिनट का बैरियर तोड़ने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं।

2002 में पीठ की सर्जरी के बाद उनके करियर पर असर पड़ा। 2004 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने में मामूली अंतर से चूकने और आर्थिक दबावों के चलते उन्होंने प्रतिस्पर्धी तैराकी से संन्यास लेने का निर्णय लिया। संन्यास के बाद, उन्होंने अपने नाम से तैराकी अकादमी की स्थापना की।

Point of View

NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

निशा मिलेट ने कब और कहाँ तैराकी शुरू की?
निशा मिलेट ने 1991 में चेन्नई के शेनॉयनगर क्लब में अपने पिता के मार्गदर्शन में तैराकी शुरू की।
निशा मिलेट के करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर क्या था?
निशा का सबसे बड़ा मील का पत्थर 2000 का सिडनी ओलंपिक था।
उन्होंने कितने गोल्ड मेडल जीते हैं?
निशा ने 1999 के नेशनल गेम्स में 14 गोल्ड मेडल जीते।
निशा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
निशा का जन्म 20 मार्च 1982 को बेंगलुरु में हुआ।
क्या निशा ने तैराकी में कोई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं?
हाँ, उन्होंने हांगकांग में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता।
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