राहुल सांघवी: 11 अंतरराष्ट्रीय मैच, फिर मुंबई इंडियंस के गेंदबाज़ों को तराशने वाले कोच बने
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय स्पिनर राहुल सांघवी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर भले ही संक्षिप्त रहा — केवल 11 मैच — लेकिन खेल से संन्यास के बाद कोचिंग में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह किसी भी लंबे करियर से कम नहीं है। 2008 से मुंबई इंडियंस (MI) से जुड़े सांघवी आज फ्रेंचाइजी के युवा गेंदबाज़ों को तराशने वाले सबसे भरोसेमंद नामों में से एक हैं।
शुरुआती जीवन और क्रिकेट की राह
राहुल सांघवी का जन्म 3 सितंबर 1974 को सूरत, गुजरात में हुआ था। बचपन से क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि रखने वाले सांघवी बाएँ हाथ के कलाई के स्पिन गेंदबाज़ के रूप में उभरे। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया और 24 वर्ष की आयु में 1998 में वनडे फॉर्मेट में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया।
अंतरराष्ट्रीय करियर: चुनौतियाँ और सीमाएँ
यह ऐसे समय में आया जब अनिल कुंबले भारतीय स्पिन आक्रमण की धुरी थे और हरभजन सिंह तेज़ी से अपनी जगह पक्की कर रहे थे। इस प्रतिस्पर्धा में सांघवी को पर्याप्त अवसर नहीं मिले। उन्होंने 1998 में 10 वनडे और 2001 में अपना एकमात्र टेस्ट मैच खेला। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने कुल टेस्ट में 2 और वनडे में 10 विकेट लिए।
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और विश्व रिकॉर्ड
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित अवसरों के बावजूद घरेलू क्रिकेट में सांघवी का करियर लंबा और उल्लेखनीय रहा। दिल्ली के अलावा उन्होंने नॉर्थ जोन और रेलवे के लिए भी क्रिकेट खेला। 95 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 271 विकेट और 68 लिस्ट-ए मैचों में 97 विकेट हासिल किए।
गौरतलब है कि 1997-98 में दिल्ली की ओर से एक लिस्ट-ए मुकाबले में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ मात्र 15 रन देकर 8 विकेट लिए — जो उस समय लिस्ट-ए क्रिकेट का विश्व रिकॉर्ड था। यह रिकॉर्ड 2018-19 में शहबाज नदीम ने तोड़ा, जब उन्होंने राजस्थान के खिलाफ 10 रन देकर 8 विकेट लिए। सांघवी ने 2006 में दिल्ली के लिए अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच खेला।
मुंबई इंडियंस के साथ कोचिंग में नई पारी
संन्यास के बाद राहुल सांघवी ने कोचिंग की राह चुनी और 2008 से मुंबई इंडियंस (MI) से जुड़े। वर्षों के इस सफर में उन्होंने फ्रेंचाइजी के युवा गेंदबाज़ों को निखारने में अहम भूमिका निभाई। उनकी ज़िम्मेदारियाँ सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं रहीं — वे MI केपटाउन, MI एमिरेट्स, MI न्यूयॉर्क और MI महिला टीम सहित फ्रेंचाइजी की सभी इकाइयों को देखते हैं।
आगे का सफर
सांघवी की कोचिंग विरासत अब केवल आईपीएल तक नहीं, बल्कि दुनियाभर की विभिन्न लीगों में फैली MI फ्रेंचाइजी की सफलताओं में साफ दिखती है। एक खिलाड़ी के रूप में जो पहचान उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पाई, एक कोच के रूप में वे उसे नई पीढ़ी के गेंदबाज़ों के ज़रिए जी रहे हैं।