पूर्व ओलंपियन रणधीर सिंह का 79 वर्ष की आयु में निधन, पाँच ओलंपिक में किया था भारत का प्रतिनिधित्व
सारांश
मुख्य बातें
भारत के सबसे प्रतिष्ठित खेल प्रशासकों और पाँच ओलंपिक खेलों में शूटिंग में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले राजा रणधीर सिंह का बुधवार, 27 मई 2026 को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय और एशियाई खेल जगत में शोक की लहर है। वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाई थे।
परिवार का शोक और श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक्स पर लिखा, 'मुझे आप सभी को यह बताते हुए दुख हो रहा है कि मेरे भाई, राजा रणधीर सिंह का निधन हो गया है। वाहेगुरु जी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।' यह संदेश खेल प्रेमियों और राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से साझा हुआ।
खेल परिवार से आई विरासत
18 अक्टूबर 1946 को पटियाला में जन्मे रणधीर सिंह एक समृद्ध खेल परंपरा वाले परिवार से थे। उनके चाचा यादवेंद्र सिंह ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला, जबकि उनके पिता राजा भलिंद्र सिंह 1947 से 1992 तक अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के सदस्य रहे। पटियाला के यादवेंद्र पब्लिक स्कूल और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक करने के बाद उन्होंने गोल्फ, स्विमिंग, स्क्वैश और क्रिकेट में हाथ आजमाया, किंतु अंतरराष्ट्रीय पहचान ट्रैप और स्कीट शूटिंग में मिली।
पाँच ओलंपिक का सफर और एशियन गेम्स की उपलब्धियाँ
रणधीर सिंह ने 1968 मैक्सिको, 1972 म्यूनिख, 1976 मॉन्ट्रियल, 1980 मॉस्को और 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले 1964 टोक्यो ओलंपिक में वे रिज़र्व शूटर के रूप में भी शामिल रहे। 1978 एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर वे किसी महाद्वीपीय आयोजन में स्वर्ण पदक पाने वाले पहले भारतीय शूटर बने। 1982 एशियन गेम्स में उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य और टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। 1979 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार और महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से नवाज़ा गया।
खेल प्रशासन में ऐतिहासिक योगदान
रणधीर सिंह का प्रशासनिक सफर उतना ही उल्लेखनीय रहा। 1987 में वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के मानद महासचिव बने और 2012 तक इस पद पर रहे। 1987 से 2010 तक भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के गवर्निंग बोर्ड के सदस्य रहे। उन्होंने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के उपाध्यक्ष का दायित्व भी निभाया। 1991 में एशियाई ओलंपिक परिषद (OCA) के महासचिव बने और 2015 तक इस पद पर रहे। 1998 में उन्हें एफ्रो-एशियन गेम्स काउंसिल का संस्थापक महासचिव नियुक्त किया गया। 2001 से 2014 तक वे IOC के सदस्य रहे और इस दौरान ओलंपिक गेम्स अध्ययन, महिला और खेल, तथा सिंगापुर के पहले समर यूथ ओलंपिक गेम्स (2010) समन्वय समिति सहित कई IOC आयोगों में काम किया। उन्हें 2005 में OCA मेरिट अवार्ड, 2006 में ANOC मेरिट अवार्ड और 2014 में प्रतिष्ठित ओलंपिक ऑर्डर से सम्मानित किया गया।
OCA अध्यक्ष पद और अंतिम अध्याय
रणधीर सिंह 2028 तक चार वर्षीय कार्यकाल के लिए OCA अध्यक्ष चुने जाने वाले पहले भारतीय बने — यह उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि थी। हालाँकि, इस वर्ष जनवरी में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें पद छोड़ना पड़ा, जिसके बाद शेख जोआन बिन हमद अल थानी को OCA का नया अध्यक्ष चुना गया। उनके निधन के साथ भारतीय खेल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ — उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों और प्रशासकों को प्रेरणा देती रहेगी।