राजा रणधीर सिंह का 79 वर्ष की उम्र में निधन, पाँच ओलंपिक के योद्धा को खेल जगत की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व ओलंपियन और दिग्गज खेल प्रशासक राजा रणधीर सिंह का 27 मई 2026 को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से भारतीय और एशियाई खेल जगत में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के आजीवन मानद अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (IOC) के मानद सदस्य रणधीर सिंह ने अपना पूरा जीवन खेल की सेवा और ओलंपिक मूल्यों के प्रसार में लगा दिया।
पाँच ओलंपिक की विरासत
रणधीर सिंह ने 1968 मेक्सिको, 1972 म्यूनिख, 1976 मॉन्ट्रियल, 1980 मॉस्को और 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले वे 1964 टोक्यो ओलंपिक में रिज़र्व शूटर के रूप में भी दल के साथ रहे थे। एथलीट के रूप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1978 के एशियाई खेलों में ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतना रही, जिससे वे महाद्वीपीय स्तर पर स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय शूटर बने। 1982 के एशियाई खेलों में उन्होंने एक व्यक्तिगत कांस्य और एक टीम रजत पदक भी अपने नाम किया।
प्रशासन में ऐतिहासिक योगदान
खेल मैदान से संन्यास के बाद रणधीर सिंह ने प्रशासन में वह ऊँचाई छुई जो किसी भारतीय के लिए पहले संभव नहीं हुई थी। वे ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के अध्यक्ष चुने जाने वाले पहले भारतीय थे। 1979 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार और महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। गौरतलब है कि एशियाई और वैश्विक खेल संस्थाओं में भारत की साख बनाने में उनकी भूमिका अतुलनीय मानी जाती है।
खेल संस्थाओं और दिग्गजों की श्रद्धांजलि
ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) ने एक्स पर लिखा, "ओलंपिक मूवमेंट के एक जाने-माने नेता, राजा रणधीर सिंह ने अपनी जिंदगी खेल की सेवा और पूरे एशिया में ओलंपिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित कर दी।" भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी. टी. उषा ने कहा, "वे एक प्यारे दोस्त और एक असाधारण इंसान थे जिन्होंने भारत को एशिया और दुनिया भर में खेलों में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। हमने एक असाधारण नेता और उनकी अद्भुत समझ को खो दिया है।"
पूर्व ओलंपियन और वर्ल्ड एथलेटिक्स के उपाध्यक्ष आदिल सुमरिवाला ने कहा, "मेरे पास उनकी बहुत अच्छी यादें हैं, जब हम 1980 के ओलंपिक खेलों में टीम के साथी थे। वह एक एथलीट और खेल प्रशासक के तौर पर एक बड़ी विरासत छोड़ गए हैं।" बीजिंग ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने कहा, "उन्होंने खेलों को समर्पित जीवन जिया। उनकी विरासत हमारे खेल इतिहास का एक अहम हिस्सा रहेगी।"
संस्थाओं और राजनेताओं की प्रतिक्रिया
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने उन्हें "ओलंपिक मूवमेंट और शूटिंग स्पोर्ट्स का सच्चा लेजेंड" बताया। हॉकी इंडिया ने उन्हें "भारत, एशिया और IOC के सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक" कहा। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा, "भारत का गर्व से प्रतिनिधित्व करने से लेकर OCA के पहले भारतीय अध्यक्ष बनने तक, उनके योगदान को हमेशा बड़े सम्मान के साथ याद किया जाएगा।" पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपना भाई बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया।
एक युग का अंत
रणधीर सिंह का निधन भारतीय खेल इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय के समापन का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी उपस्थिति और मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उनके द्वारा बनाई गई नींव और स्थापित संस्थागत परंपराएँ आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों और प्रशासकों को दिशा देती रहेंगी।