1 अगस्त 2026
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रुमेश पथिरेज का कॉमनवेल्थ 2026 में 89.75 मीटर से स्वर्ण, संगकारा बोले — 'श्रीलंका के लिए गर्व का दिन'

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रुमेश पथिरेज का कॉमनवेल्थ 2026 में 89.75 मीटर से स्वर्ण, संगकारा बोले — 'श्रीलंका के लिए गर्व का दिन'

सारांश

क्रिकेट छोड़ भाला उठाने वाले 23 वर्षीय रुमेश पथिरेज ने ग्लासगो में 89.75 मीटर के एकमात्र वैध थ्रो से कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीता — और श्रीलंका का 20 साल का इंतजार खत्म किया। नीरज चोपड़ा रजत पर रहे। पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने इसे 'गर्व का दिन' बताया।

मुख्य बातें

रुमेश थरंगा पथिरेज ने 1 अगस्त 2026 को 89.75 मीटर के थ्रो से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 जैवलिन स्वर्ण जीता।
यह 2006 मेलबर्न के बाद श्रीलंका का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है — 20 साल के इंतजार के बाद।
फाइनल में पाँच फाउल के बावजूद पथिरेज का एकमात्र वैध थ्रो स्वर्ण दिलाने के लिए पर्याप्त रहा।
टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर से रजत और यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर से कांस्य जीता।
पाकिस्तान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम 77.41 मीटर के साथ नौवें स्थान पर रहे।
पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने एक्स पर इसे 'अविश्वसनीय और गर्व का दिन' बताया।

रुमेश थरंगा पथिरेज ने 1 अगस्त 2026 को ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में 89.75 मीटर का थ्रो कर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक जीता और श्रीलंका का 20 साल का इंतजार समाप्त किया। श्रीलंका क्रिकेट के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने इस उपलब्धि को 'अविश्वसनीय और गर्व का दिन' बताया।

ऐतिहासिक थ्रो और स्वर्ण का सफर

23 वर्षीय पथिरेज ने फाइनल में अपने दूसरे प्रयास में 89.75 मीटर का निर्णायक थ्रो किया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने फाइनल में पाँच फाउल दर्ज किए, फिर भी वह एकमात्र वैध थ्रो से शीर्ष पर रहे — जो उनकी तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है। गुरुवार के क्वालिफायर में वह 84 मीटर के ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क से चूक गए थे, लेकिन 82.84 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ वह क्वालिफायर में शीर्ष पर रहे।

श्रीलंका के लिए 20 साल बाद स्वर्ण

पथिरेज कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतने वाले पाँचवें श्रीलंकाई खिलाड़ी बने। यह श्रीलंका का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला स्वर्ण पदक है 2006 मेलबर्न के बाद, जब वेटलिफ्टर चिंताना विदानागे ने स्वर्ण जीता था। यह जीत ऐसे समय में आई है जब श्रीलंका खेल जगत में अपनी उपस्थिति फिर से मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।

क्रिकेट से एथलेटिक्स तक का असाधारण सफर

पथिरेज पहले तेज़ गेंदबाज़ थे और अंडर-18 स्तर पर 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकते थे। कोच टोनी प्रसन्ना के मार्गदर्शन में उन्होंने एथलेटिक्स की राह चुनी। पथिरेज अपने करियर में आए इस बदलाव का पूरा श्रेय प्रसन्ना को देते हैं। यह परिवर्तन खेल इतिहास में एक विरल उदाहरण है जहाँ एक क्रिकेटर ने ट्रैक-एंड-फील्ड में वैश्विक शिखर छुआ।

प्रतियोगिता में भारत और अन्य दिग्गज

इस स्पर्धा में टोक्यो ओलंपिक चैंपियन और भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक जीता, जबकि भारत के ही यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। 2024 पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 83.88 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे। मौजूदा ओलंपिक चैंपियन पाकिस्तान के अरशद नदीम 77.41 मीटर के थ्रो के साथ नौवें स्थान पर रहे।

संगकारा की प्रतिक्रिया

पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने शनिवार को एक्स पर लिखा, 'श्रीलंका के लिए यह अविश्वसनीय और गर्व का दिन है।' संगकारा की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि पथिरेज की यह उपलब्धि श्रीलंकाई खेल जगत में कितनी गहरी भावनात्मक अनुगूँज छोड़ रही है। आगे देखें तो पथिरेज की यह सफलता श्रीलंका में एथलेटिक्स के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने का आधार बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि खेल-रूपांतरण की है — क्रिकेट के गेंदबाज़ से विश्वस्तरीय भाला फेंकने वाले तक का सफर यह सवाल उठाता है कि दक्षिण एशिया में एथलेटिक प्रतिभा को कितनी जल्दी एक ही खेल के साँचे में ढाल दिया जाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि नीरज चोपड़ा जैसे ओलंपिक चैंपियन को पीछे छोड़ना कोई साधारण उपलब्धि नहीं — फिर भी पाँच फाउल के साथ एकमात्र वैध थ्रो पर जीत की निर्भरता यह दर्शाती है कि पथिरेज की तकनीक अभी और निखरने की गुंजाइश रखती है। श्रीलंका के लिए यह पदक एक संकेत है कि क्रिकेट के परे भी खेल निवेश के रास्ते खुल सकते हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुमेश पथिरेज ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कितने मीटर का थ्रो कर स्वर्ण जीता?
रुमेश पथिरेज ने ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में अपने दूसरे प्रयास में 89.75 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में पाँच फाउल के बावजूद यही एकमात्र वैध थ्रो उन्हें शीर्ष पर ले जाने के लिए पर्याप्त रहा।
श्रीलंका का कॉमनवेल्थ गेम्स में इससे पहले आखिरी स्वर्ण पदक कब आया था?
श्रीलंका का इससे पहले आखिरी कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक 2006 मेलबर्न गेम्स में वेटलिफ्टर चिंताना विदानागे ने जीता था। पथिरेज के स्वर्ण ने 20 साल का यह इंतजार समाप्त किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 जैवलिन में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन कैसा रहा?
टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक जीता। भारत के यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
रुमेश पथिरेज ने एथलेटिक्स से पहले कौन-सा खेल खेला था?
पथिरेज पहले क्रिकेट के तेज़ गेंदबाज़ थे और अंडर-18 स्तर पर 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकते थे। कोच टोनी प्रसन्ना के मार्गदर्शन में उन्होंने एथलेटिक्स में कदम रखा और जैवलिन थ्रो को अपना लिया।
कुमार संगकारा ने पथिरेज की जीत पर क्या कहा?
श्रीलंका क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने एक्स पर लिखा कि 'श्रीलंका के लिए यह अविश्वसनीय और गर्व का दिन है।' उन्होंने इस उपलब्धि को देश के लिए ऐतिहासिक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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