साई सुदर्शन श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर, सरफराज खान की दावेदारी मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम को श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले एक और बड़ा झटका लगा है — बाएं हाथ के बल्लेबाज साई सुदर्शन चोट के कारण इस सीरीज से बाहर हो गए हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ अभ्यास मैच के दौरान पैर के अंगूठे में लगी चोट के बाद सुदर्शन फिलहाल बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। यह खबर ऐसे समय में आई है जब भारतीय टीम पहले से ही चोटों की लंबी सूची से जूझ रही है।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या है
सुदर्शन की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने बायोलॉजिकल हीलिंग के लिए अतिरिक्त समय की सलाह दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि रिहैबिलिटेशन, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग, तथा क्रिकेट से जुड़े विशेष लोड को धीरे-धीरे और कड़ी निगरानी में बढ़ाया जाना चाहिए। यह सावधानी चोट के दोबारा होने के जोखिम को कम करने और खिलाड़ी की दीर्घकालिक परफॉर्मेंस को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बरती जा रही है।
सरफराज खान की दावेदारी
सुदर्शन की अनुपस्थिति में चयनकर्ताओं के सामने उनके विकल्प की तलाश बड़ी चुनौती है। मध्यक्रम के बल्लेबाज सरफराज खान का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आया है। 28 वर्षीय सरफराज ने भारत के लिए 6 टेस्ट मैचों की 11 पारियों में 1 शतक और 3 अर्धशतक की मदद से 371 रन बनाए हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 150 रन है। घरेलू क्रिकेट में उनके लगातार प्रदर्शन को देखते हुए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
चोटों का संकट — पूरी तस्वीर
भारतीय टीम इस समय चोटों के गंभीर दौर से गुजर रही है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान बाएं घुटने में लगी चोट से पूरी तरह ठीक न हो पाने के कारण श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हैं; उनकी जगह औकिब नबी को चुना गया है। इसके अलावा, हर्षित राणा (हैमस्ट्रिंग) और नीतीश कुमार रेड्डी (क्वाड्रिसेप्स) भी चोटिल हैं और सीरीज से बाहर हैं। हार्दिक पांड्या और वरुण चक्रवर्ती भी अलग-अलग चोटों के कारण बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिकवरी कर रहे हैं।
चयन समिति पर दबाव
एक साथ इतने प्रमुख खिलाड़ियों का बाहर होना भारतीय चयन समिति के लिए असाधारण दबाव का समय है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी सीरीज से पहले भारत को एकाधिक चोटों का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इस बार चोटिल खिलाड़ियों की संख्या और उनके कद को देखते हुए टीम संतुलन बनाना जटिल हो गया है। आने वाले दिनों में चयनकर्ताओं के फैसले पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।