FIFA विश्व कप जीतने वाले टॉप-5 युवा कप्तान: पासरेला से माराडोना तक, जानें रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
फुटबॉल इतिहास में FIFA विश्व कप जीतना हर खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना होता है, लेकिन कम उम्र में कप्तान के तौर पर अपनी टीम को चैंपियन बनाना और भी दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है। आँकड़ों के अनुसार, अब तक केवल मुट्ठी भर कप्तान ही 28 साल से कम उम्र में यह ट्रॉफी उठा पाए हैं, और इनमें से अधिकांश ने अपने नेतृत्व से फुटबॉल की दिशा बदल दी। राष्ट्र प्रेस की इस सूची में जानिए वे शीर्ष 5 युवा कप्तान जिन्होंने इतिहास रच दिया।
डैनियल पासरेला: सबसे युवा विश्व विजेता कप्तान
25 मई 1953 को ब्यूनस आयर्स में जन्मे डैनियल पासरेला FIFA विश्व कप जीतने वाले सबसे युवा कप्तान हैं। उन्होंने यह कारनामा 25 साल 30 दिन की उम्र में किया। 25 जून 1978 को उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को फाइनल में 3-1 से हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया।
बॉबी मूर: इंग्लैंड के एकमात्र विश्व विजेता कप्तान
एसेक्स में 12 अप्रैल 1941 को जन्मे बॉबी मूर की कप्तानी में इंग्लैंड ने 30 जुलाई 1966 को अपना पहला और अब तक का एकमात्र FIFA विश्व कप खिताब जीता। लंदन में खेले गए ऐतिहासिक फाइनल में मेजबान इंग्लैंड ने वेस्ट जर्मनी को 4-2 से हराया। उस वक्त मूर मात्र 25 साल 109 दिन के थे, और आज भी अंग्रेज़ी फुटबॉल में उनका कद बेमिसाल माना जाता है।
डिएगो माराडोना: 'हैंड ऑफ गॉड' वाले कप्तान
अर्जेंटीना के दिग्गज डिएगो माराडोना का जन्म 30 अक्टूबर 1960 को हुआ था। 29 जून 1986 को मैक्सिको सिटी में खेले गए फाइनल में अर्जेंटीना ने वेस्ट जर्मनी को 3-2 से हराकर ट्रॉफी जीती। उस समय माराडोना सिर्फ 25 साल 252 दिन के थे। यह वही टूर्नामेंट था जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर फुटबॉल का सबसे बड़ा सितारा बना दिया।
कार्लोस अल्बर्टो: ब्राज़ील की 1970 की महानता के अगुआ
ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो में 17 जुलाई 1944 को जन्मे कार्लोस अल्बर्टो ने 25 साल 339 दिन की उम्र में बतौर कप्तान FIFA विश्व कप ट्रॉफी उठाई। मैक्सिको सिटी में 21 जून 1970 को खेले गए फाइनल में ब्राज़ील ने इटली को 4-1 से हराया। इस जीत के साथ ब्राज़ील तीसरी बार चैंपियन बना और जूल्स रिमे ट्रॉफी हमेशा के लिए अपने नाम कर ली।
ग्यूसेपे मेआजा: सूची के अनुभवी कप्तान
मिलान में 23 अगस्त 1910 को जन्मे ग्यूसेपे मेआजा इस सूची में पाँचवें स्थान पर हैं। उन्होंने 19 जून 1938 को FIFA विश्व कप ट्रॉफी उठाई, जब कोलंबस में खेले गए फाइनल में इटली ने हंगरी को 4-2 से हराया। उस समय मेआजा 27 साल 300 दिन के थे और यह इटली का लगातार दूसरा विश्व कप खिताब था।
क्यों खास है यह सूची
गौरतलब है कि इन पाँच कप्तानों में से तीन ने यह उपलब्धि 26 साल की उम्र से पहले हासिल की, जो आधुनिक फुटबॉल में अब लगभग दुर्लभ हो चुका है। हाल के दशकों में टीमों ने अनुभव को प्राथमिकता दी है, जिससे कप्तानी की औसत उम्र बढ़ी है। ऐसे में पासरेला, मूर और माराडोना के रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित दिख रहे हैं।