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राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 23 जुलाई को ही क्यों? जानें 1927 से आकाशवाणी तक का सफर

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राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 23 जुलाई को ही क्यों? जानें 1927 से आकाशवाणी तक का सफर

सारांश

23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ने मुंबई और कोलकाता से भारत का पहला संगठित रेडियो प्रसारण किया था — और इसी ऐतिहासिक पल की याद में हर साल राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है। 1923 के पहले प्रयोग से लेकर 1956 में आकाशवाणी तक, रेडियो का यह सफर भारत की आवाज़ का सफर है।

मुख्य बातें

23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने मुंबई और कोलकाता से भारत का पहला संगठित रेडियो प्रसारण किया।
भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1923 में मुंबई के रेडियो क्लब से हुई थी।
1930 में सरकार ने रेडियो को अपने नियंत्रण में लेकर भारतीय प्रसारण सेवा नाम दिया; 1936 में यह ऑल इंडिया रेडियो और 1956 में आकाशवाणी बना।
1957 में विविध भारती सेवा की शुरुआत ने हिंदी फिल्म संगीत को घर-घर तक पहुँचाया।
आज़ादी के आंदोलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आज़ाद हिंद रेडियो ने जन-जागरण में अहम भूमिका निभाई।
आज आकाशवाणी एफएम और डिजिटल प्रसारण के ज़रिए अनेक भाषाओं में देश की बड़ी आबादी तक पहुँचता है।

राष्ट्रीय प्रसारण दिवस हर साल 23 जुलाई को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1927 में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने मुंबई और कोलकाता से भारत में पहली बार संगठित रेडियो प्रसारण सेवा की आधिकारिक शुरुआत की थी। डिजिटल युग में भी रेडियो की प्रासंगिकता बनी हुई है — देश के दूरदराज़ क्षेत्रों में यह आज भी सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का सबसे भरोसेमंद माध्यम है।

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत

भारत में रेडियो का इतिहास आज़ादी से भी पहले का है। 1923 में मुंबई के रेडियो क्लब ने देश का पहला रेडियो प्रसारण किया — यह एक छोटा प्रयोग था, लेकिन इसी ने भारतीय प्रसारण की नींव रखी। इसके कुछ महीनों बाद कोलकाता में भी रेडियो क्लब अस्तित्व में आया और यह नया माध्यम धीरे-धीरे लोकप्रिय होने लगा।

इसके बाद 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ने मुंबई और कोलकाता दोनों केंद्रों से एक साथ औपचारिक रेडियो सेवा प्रारंभ की। यही ऐतिहासिक तारीख राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के रूप में चुनी गई।

सरकारी नियंत्रण और नामकरण का सफर

शुरुआती वर्षों में IBC को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और वह अधिक समय तक स्वतंत्र रूप से संचालित नहीं हो सकी। 1930 में सरकार ने रेडियो प्रसारण को अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे 'भारतीय प्रसारण सेवा' नाम दिया गया।

1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) किया गया। फिर 1956 में इसे आकाशवाणी के नाम से पहचाना जाने लगा — एक ऐसा नाम जो आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसा है।

विविध भारती और मनोरंजन की क्रांति

1957 में विविध भारती सेवा की शुरुआत ने रेडियो को मनोरंजन के एक बड़े माध्यम के रूप में स्थापित किया। हिंदी फिल्म संगीत को घर-घर तक पहुँचाने में इस सेवा की भूमिका अतुलनीय रही। एक दौर था जब श्रोता अपने पसंदीदा गाने सुनने के लिए घंटों रेडियो के सामने बैठे रहते थे।

स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक भूमिका

रेडियो का योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। आज़ादी के आंदोलन के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आज़ाद हिंद रेडियो और कांग्रेस रेडियो ने स्वतंत्रता की भावना को जन-जन तक पहुँचाया।

स्वतंत्रता के बाद भी आकाशवाणी ने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और जन-जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के ज़रिए ग्रामीण भारत को जोड़े रखा। प्राकृतिक आपदाओं के समय — जब अन्य संचार माध्यम विफल हो जाते हैं — रेडियो ने बार-बार अपनी अनिवार्यता सिद्ध की है।

आधुनिक युग में आकाशवाणी की प्रासंगिकता

वर्तमान में ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) एफएम चैनलों से लेकर डिजिटल प्रसारण तक, बदलते समय के साथ खुद को निरंतर अद्यतन कर रहा है। यह संस्था अनेक भाषाओं और बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित करती है और देश की विशाल आबादी तक अपनी पहुँच बनाए हुए है। गौरतलब है कि इंटरनेट के विस्तार के बावजूद रेडियो उन क्षेत्रों में अपरिहार्य बना हुआ है जहाँ डिजिटल कनेक्टिविटी अभी भी पहुँच से दूर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे कोई भी निजी एफएम नेटवर्क अब तक नहीं छू सका। सवाल यह है कि क्या सरकार इस विरासत को केवल उत्सव तक सीमित रखेगी, या सामुदायिक रेडियो और डिजिटल आकाशवाणी को वह निवेश और स्वायत्तता मिलेगी जो इसे 21वीं सदी में भी अपरिहार्य बनाए रखे।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 23 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है?
23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने मुंबई और कोलकाता से भारत का पहला आधिकारिक संगठित रेडियो प्रसारण किया था। इसी ऐतिहासिक तारीख की स्मृति में हर साल 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है।
भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1923 में मुंबई के रेडियो क्लब ने की थी। यह एक प्रायोगिक प्रयास था, जिसके बाद कोलकाता में भी रेडियो क्लब बना और 1927 में IBC ने इसे औपचारिक रूप दिया।
आकाशवाणी नाम कब अपनाया गया?
1956 में ऑल इंडिया रेडियो ने आकाशवाणी नाम अपनाया। इससे पहले 1930 में इसे भारतीय प्रसारण सेवा और 1936 में ऑल इंडिया रेडियो कहा जाता था।
विविध भारती सेवा क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
विविध भारती आकाशवाणी की एक लोकप्रिय मनोरंजन सेवा है, जिसकी शुरुआत 1957 में हुई। इसने हिंदी फिल्म संगीत और मनोरंजन कार्यक्रमों को देश के घर-घर तक पहुँचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
डिजिटल युग में रेडियो की क्या प्रासंगिकता है?
आज भी रेडियो उन दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों में अपरिहार्य है जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जब अन्य संचार माध्यम विफल हो जाते हैं, रेडियो सूचना का सबसे विश्वसनीय स्रोत बना रहता है। आकाशवाणी अब एफएम और डिजिटल प्रसारण के ज़रिए भी उपलब्ध है।
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