30 अक्टूबर 2026 पंचांग: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर संकष्टी गणेश व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
सारांश
मुख्य बातें
30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा, क्योंकि चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गणपति की उपासना से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
तिथि, नक्षत्र और योग
पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 30 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, इसके उपरांत पंचमी तिथि आरंभ होगी। आर्द्रा नक्षत्र इस दिन रात 1 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगा। व्याघात योग रात 9 बजकर 46 मिनट तक और बव करण शाम 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
शुभ मुहूर्त
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। हिंदू काल-गणना में अभिजीत मुहूर्त को दिन का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।
राहुकाल और अशुभ काल
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 9 मिनट तक रहेगा — इस अवधि में नए शुभ कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी जाती है। इसके अतिरिक्त गुलिक काल सुबह 8 बजे से 9 बजकर 24 मिनट तक और यमगण्ड काल दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शाम 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
30 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 9 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट पर बताया गया है। संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने की परंपरा है, इसलिए चंद्रोदय का समय व्रतियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानियाँ
इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल की दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अपरिहार्य हो तो पारंपरिक उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है। गौरतलब है कि पंचांग हिंदू काल-गणना की वह पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है और शुभ कार्यों, यात्रा, निवेश तथा पूजा-पाठ में मार्गदर्शन के लिए उपयोग की जाती है।