बस्तर की बच्ची ने अमित शाह से कहा 'अब हम बच गए', गृह मंत्री बोले — शब्दों में बयान नहीं

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बस्तर की बच्ची ने अमित शाह से कहा 'अब हम बच गए', गृह मंत्री बोले — शब्दों में बयान नहीं

सारांश

बस्तर में एक आदिवासी बच्ची के 'अब हम बच गए' के तीन शब्दों ने गृह मंत्री अमित शाह को भावुक कर दिया। नक्सलमुक्त बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की पहली बैठक — यह सिर्फ प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि एक बदलते क्षेत्र की नई तस्वीर है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 21 मई 2025 को बस्तर, छत्तीसगढ़ का दौरा किया।
जगदलपुर के नेतानार गाँव में एक आदिवासी बच्ची ने 'अब हम बच गए' कहा, जिसे शाह ने सबसे आनंददायक पल बताया।
शाह ने गुंडा धुर सेवा डेरा का उद्घाटन किया और 400 आदिवासी भाई-बहनों से मुलाकात की।
नक्सलमुक्त बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में कुपोषण उन्मूलन , स्कूल ड्रॉपआउट , साइबर हेल्पलाइन और यौन अपराधों में दोषसिद्धि जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

गृह मंत्री अमित शाह ने 21 मई 2025 को छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान बस्तर के जगदलपुर में आदिवासी समुदाय से मुलाकात की, जहाँ एक छोटी बच्ची के मुँह से 'अब हम बच गए' सुनकर उन्होंने इसे अपने राजनीतिक जीवन का सबसे आनंददायक पल बताया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब बस्तर को नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने के बाद पहली बार वहाँ मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित की गई।

नेतानार गाँव में आदिवासियों से मुलाकात

गृह मंत्री ने जगदलपुर के नेतानार गाँव में गुंडा धुर सेवा डेरा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदिवासी भाई-बहनों के चेहरे पर आशा की किरण देखना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने कहा, 'लाखों की भीड़ को भाषण देने से जितना आत्मसंतोष नहीं मिलता, उससे ज़्यादा आत्मसंतोष 400 आदिवासी भाई-बहनों के बीच में मिला है।'

शाह ने आगे कहा कि एक बच्ची के मुँह से चलते-चलते 'अब हम बच गए' सुनकर जो आनंद हुआ, उसे शब्दों में वर्णन करना बहुत कठिन है। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।

एक्स पर साझा किया भावुक संदेश

गृह मंत्री के आधिकारिक एक्स अकाउंट से इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा गया: 'बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद जब वहाँ की एक छोटी बच्ची मुझे बोलती है कि हम बच गए, तो वह खुशी लाखों खुशियों से ऊपर होती है।' यह पोस्ट सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बनी।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक: ऐतिहासिक महत्त्व

शाह ने कहा कि जिस बस्तर में कभी लाल आतंक का साया था, आज वहीं जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक होना सभी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि परिषद के सदस्य राज्यों के बीच अब किसी भी प्रकार का विवाद शेष नहीं रह गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

गौरतलब है कि यह बस्तर में नक्सल-उन्मूलन अभियान के बाद आयोजित पहली ऐसी उच्च-स्तरीय बैठक है, जो इस क्षेत्र के बदलते राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य को रेखांकित करती है।

बैठक में उठे अहम मुद्दे

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई — जिनमें कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करना और राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन की स्थापना प्रमुख रहे। शाह ने कहा कि यह पूरा क्षेत्र अब न केवल नक्सलमुक्त हुआ है, बल्कि अंतर-राज्यीय विवादों से भी मुक्त है।

आने वाले समय में बस्तर के पुनर्निर्माण और आदिवासी कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्र और राज्य सरकार की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्कूल ड्रॉपआउट और साइबर अपराध जैसे मुद्दे बैठक के एजेंडे में इसी का प्रमाण हैं। मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक का बस्तर में होना प्रतीकात्मक रूप से शक्तिशाली है, पर असली कसौटी यह होगी कि आदिवासी समुदायों तक विकास योजनाएँ कितनी तेज़ी से और पारदर्शिता से पहुँचती हैं।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बस्तर में अमित शाह से बच्ची ने क्या कहा?
जगदलपुर के नेतानार गाँव में एक आदिवासी बच्ची ने गृह मंत्री अमित शाह को चलते-चलते 'अब हम बच गए' कहा। शाह ने इसे अपने राजनीतिक जीवन का सबसे आनंददायक पल बताया और कहा कि इस खुशी को शब्दों में बयान करना कठिन है।
अमित शाह के बस्तर दौरे का उद्देश्य क्या था?
गृह मंत्री अमित शाह मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए बस्तर पहुँचे थे। इसके अलावा उन्होंने नेतानार गाँव में गुंडा धुर सेवा डेरा का उद्घाटन किया और आदिवासी समुदाय से मुलाकात की।
मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कौन-से मुद्दे उठे?
बैठक में कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि और राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। शाह ने बताया कि सदस्य राज्यों के बीच अब कोई अंतर-राज्यीय विवाद शेष नहीं है।
बस्तर नक्सलमुक्त कब हुआ और इसका क्या महत्त्व है?
बस्तर को हाल ही में नक्सल-मुक्त घोषित किया गया है, जिसके बाद पहली बार वहाँ मध्य क्षेत्रीय परिषद जैसी उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित हुई। शाह ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जिस बस्तर में कभी लाल आतंक का साया था, वहाँ यह बैठक सभी के लिए गौरव का विषय है।
गुंडा धुर सेवा डेरा क्या है?
गुंडा धुर सेवा डेरा जगदलपुर के नेतानार गाँव में स्थापित एक आदिवासी सेवा केंद्र है, जिसका उद्घाटन गृह मंत्री अमित शाह ने 21 मई 2025 को अपने बस्तर दौरे के दौरान किया। यह केंद्र आदिवासी समुदाय के कल्याण और पुनर्निर्माण प्रयासों का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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