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जीडीपी 7.8% पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: 'चुनिंदा लोगों का धन बढ़ा, आम आदमी की जेब खाली'

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जीडीपी 7.8% पर अधीर रंजन चौधरी का हमला: 'चुनिंदा लोगों का धन बढ़ा, आम आदमी की जेब खाली'

सारांश

जीडीपी 7.8% की तेज़ी का जश्न मनाती सरकार के सामने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तीखा सवाल खड़ा किया — अगर देश का धन बढ़ रहा है तो आम आदमी की जेब क्यों खाली है? साथ ही 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाने के आरोप ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 2 सितंबर 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% जीडीपी वृद्धि के सरकारी दावों को भ्रामक बताया।
चौधरी ने कहा कि यह वृद्धि केवल 'चुनिंदा लोगों' तक सीमित है; बाज़ार में महँगाई और आम आदमी की क्रय शक्ति में गिरावट जारी है।
उन्होंने दावा किया कि पूरे देश में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और BJP पर वोट चोरी का आरोप लगाया।
5 सितंबर को प्रस्तावित सीजेपी विरोध प्रदर्शन रद्द होने पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप को सरकार की विफलता का प्रमाण बताया।
सालाना जीडीपी आँकड़े अभी आने बाकी हैं; विपक्ष ने समयपूर्व उत्सव पर आपत्ति जताई।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार, 2 सितंबर को नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के सरकारी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये आँकड़े भ्रामक हैं और आम नागरिकों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को नहीं दर्शाते। उनके अनुसार, बाज़ार में महँगाई चरम पर है और आम आदमी की क्रय शक्ति लगातार घट रही है।

जीडीपी आँकड़ों पर सीधा हमला

चौधरी ने कहा, 'पीएम मोदी एक तरफ कहते हैं कि सोना मत खरीदो, हवाई जहाज पर सफर मत करो, विदेश न जाओ — और दूसरी तरफ कहते हैं कि हमारे देश का धन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह सिर्फ चुनिंदा लोगों का धन बढ़ रहा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह केवल एक तिमाही की रिपोर्ट है और सालाना आँकड़े अभी आने बाकी हैं, इसलिए 'इतनी जल्दी पीठ नहीं थपथपानी चाहिए।'

उन्होंने कांग्रेस शासनकाल का हवाला देते हुए कहा, 'कांग्रेस के जमाने में जीडीपी 9-10 प्रतिशत तक गई थी, लेकिन हमने ढिंढोरा नहीं पीटा। बाज़ार में दाम में कोई कटौती नहीं हुई, चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं — सरकार को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।'

छात्र आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

5 सितंबर को प्रस्तावित सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के रद्द होने पर चौधरी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था, 'सरकार को पहले ही छात्रों की माँगें माननी चाहिए थीं। सभी जानते हैं कि छात्र अपनी बात रखने के लिए जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे।' उन्होंने आरोप लगाया कि जो काम सरकार को स्वयं करना चाहिए था, वह सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हुआ — जो दर्शाता है कि सरकार मुकदमा वापस लेने की इच्छुक नहीं थी।

वोट चोरी का बड़ा आरोप

राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले बयान का समर्थन करते हुए चौधरी ने दावा किया कि पूरे देश में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, 'क्या यह कोई छोटी बात है? इसका मतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिन चुनावों में लड़ी, उन्हें अमान्य घोषित कर देना चाहिए।'

चौधरी ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ 'BJP नेता खुलेआम फॉर्म 7 लेकर घूम रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं कि देश में वोट चोरी हो रही है — पूरे भारत में लोगों को इसके बारे में पता चल गया है।' गौरतलब है कि इन आरोपों पर सरकार या चुनाव आयोग (ECI) की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

आम जनता पर असर

आलोचकों का कहना है कि जीडीपी वृद्धि के आँकड़े तब तक अर्थहीन हैं जब तक उनका लाभ समाज के निचले तबके तक न पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य महँगाई और ईंधन की कीमतें आम परिवारों के बजट पर भारी दबाव बना रही हैं। चौधरी के बयान इस व्यापक विपक्षी आख्यान को और धार देते हैं कि आर्थिक विकास का फल असमान रूप से वितरित हो रहा है।

आगे क्या

वित्त वर्ष 2026-27 के सालाना जीडीपी आँकड़े अभी आने बाकी हैं, जिन पर सभी की निगाहें टिकी हैं। विपक्ष के दबाव और न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बीच सरकार की आर्थिक कथा और मतदाता सूची विवाद — दोनों मुद्दे आने वाले हफ्तों में राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

13 करोड़ नाम हटाने का आरोप अत्यंत गंभीर है और इसके लिए स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है — बिना साक्ष्य के यह राजनीतिक बयानबाज़ी बनकर रह जाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि एकल तिमाही के आँकड़े पर दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएँ संरचनात्मक सुधार की बहस को पीछे धकेल देती हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अधीर रंजन चौधरी ने जीडीपी 7.8% के आँकड़ों पर क्या आपत्ति जताई?
चौधरी ने कहा कि 7.8% जीडीपी वृद्धि के आँकड़े भ्रामक हैं क्योंकि इसका लाभ केवल चुनिंदा लोगों तक पहुँच रहा है जबकि आम आदमी की जेब खाली हो रही है और बाज़ार में महँगाई चरम पर है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक तिमाही की रिपोर्ट है और सालाना आँकड़े अभी आने बाकी हैं।
13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप क्या है?
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि पूरे देश में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची के मसौदे से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे 'वोट चोरी' करार देते हुए कहा कि BJP जिन चुनावों में लड़ी उन्हें अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। इन आरोपों पर चुनाव आयोग की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
5 सितंबर का सीजेपी विरोध प्रदर्शन क्यों रद्द हुआ?
चौधरी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद सरकार को मुकदमा वापस लेना पड़ा, जिसके चलते 5 सितंबर का विरोध प्रदर्शन रद्द हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था और न्यायपालिका का हस्तक्षेप सरकार की विफलता को दर्शाता है।
क्या कांग्रेस के शासनकाल में जीडीपी वृद्धि अधिक थी?
चौधरी ने दावा किया कि कांग्रेस के कार्यकाल में जीडीपी वृद्धि 9-10 प्रतिशत तक पहुँची थी, लेकिन तब उन्होंने इसका 'ढिंढोरा नहीं पीटा।' यह दावा ऐतिहासिक आँकड़ों के संदर्भ में चौधरी का अपना कथन है।
झारखंड में वोट चोरी के संदर्भ में क्या आरोप लगाए गए?
चौधरी ने आरोप लगाया कि झारखंड में BJP नेता खुलेआम 'फॉर्म 7' लेकर घूम रहे हैं, जो मतदाताओं के नाम सूची से हटाने में इस्तेमाल होता है। उन्होंने इसे देशव्यापी वोट चोरी की साजिश का हिस्सा बताया, हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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