आफताब अंसारी की जेल सेल से मोबाइल-राउटर बरामद, एसटीएफ ने जांच संभाली
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के प्रेसिडेंसी सेंट्रल करेक्शनल होम में उम्रकैद काट रहे अमेरिकी सेंटर हमले के मास्टरमाइंड आफताब अंसारी की सेल से तीन सक्रिय मोबाइल फोन, दो राउटर, एक वाई-फाई डिवाइस और ₹31,000 नकद बरामद होने के बाद कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार को इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली। पिछले सप्ताह शुक्रवार की रात डिटेक्टिव विभाग द्वारा की गई छापेमारी के बाद हेस्टिंग्स पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
क्या-क्या बरामद हुआ
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, अंसारी के कपड़ों और बिस्तर की तलाशी में तीन मोबाइल फोन, दो राउटर, एक वाई-फाई डिवाइस, दो कार्ड रीडर, एक पेन ड्राइव, ईयरफोन और ₹500 के नोटों में कुल ₹31,000 नकद मिले। बरामद मोबाइल फोन में व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप सक्रिय पाए गए।
जानकारी के अनुसार, अंसारी वार्ड 1/22 की सेल नंबर 14 में बंद है। उसी वार्ड में भाजपा नेता मनीष शुक्ला हत्याकांड के आरोपी सुबोध रॉय (सेल नंबर 52) और अनीश ठाकुर (सेल नंबर 19) भी बंद हैं, जिनकी सेल से भी स्मार्टफोन बरामद होने की बात सामने आई है।
जांच का दायरा
एसटीएफ की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि अंसारी इन उपकरणों के ज़रिए किन लोगों से संपर्क में था। जांचकर्ता विशेष रूप से यह देख रहे हैं कि क्या जेल के भीतर से पाकिस्तान में किसी से संपर्क किया गया था अथवा कोई साजिश रची जा रही थी। बरामद सभी उपकरण फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
जांच एजेंसियां जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। घटना के बाद अंसारी की सेल की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है तथा जेल परिसर के भीतर उससे पूछताछ जारी है।
आफताब अंसारी कौन है
आफताब अंसारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन आसिफ रजा कमांडो (एआरसी) का पूर्व संचालक है। इस संगठन के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से संबंध बताए जाते हैं। वह अमेरिकी सेंटर हमले का मास्टरमाइंड रहा है और फिलहाल उम्रकैद की सजा काट रहा है।
पृष्ठभूमि: सीआईडी जांच पहले से जारी
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में जेलों की सुरक्षा पहले से सवालों के घेरे में है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल और कथित नशीले पदार्थों के कारोबार पर कड़ा रुख अपनाया था। उनके निर्देश पर मई में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को यह जांच सौंपी गई थी कि कैदियों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं — वह जांच अभी भी जारी है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी हाई-सिक्योरिटी वार्ड में बंद कैदी के पास संचार उपकरण मिले हों। इस बार एक कुख्यात आतंकी की सेल से सक्रिय इंटरनेट-सक्षम उपकरणों का मिलना जेल प्रशासन की चूक को और गंभीर बनाता है।
आगे क्या होगा
एसटीएफ की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि इन उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला कहाँ से शुरू होती है — क्या यह जेल कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ या किसी अन्य माध्यम से। फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियाँ तय होंगी।