दीपावली से पहले अहमदाबाद में मिठाई-मावा विक्रेताओं के लिए रैपिड टेस्ट किट अनिवार्य, AMC का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने 29 अक्टूबर 2026 को दीपावली से पहले खाद्य मिलावट पर लगाम लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया — अब ₹5 लाख से अधिक वार्षिक कारोबार वाले मिठाई, मावा और फरसान विक्रेताओं के लिए रैपिड टेस्ट किट रखना और उसका उपयोग करना अनिवार्य होगा। यह फैसला शहर में नकली और अखाद्य मावे की बिक्री के हालिया मामलों के सामने आने के बाद उठाया गया है।
निर्णय की पृष्ठभूमि और घोषणा
यह निर्णय गुरुवार को AMC की साप्ताहिक बैठक के बाद स्थायी समिति के अध्यक्ष कमलेश पटेल ने सार्वजनिक किया। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि संबंधित व्यापारी इन किटों को अपने प्रतिष्ठानों में उपलब्ध रखें और नियमित रूप से इनका उपयोग सुनिश्चित करें।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में अहमदाबाद में मावे के नाम पर मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों की बिक्री के कई मामले सामने आए थे, जिनके बाद नागरिक प्रशासन पर दबाव बढ़ा था।
रैपिड टेस्ट किट: क्या है और कैसे काम करती है
करीब ₹3,000 मूल्य की यह किट प्रारंभिक जांच में मावे और अन्य खाद्य पदार्थों में स्टार्च की मिलावट का पता लगाने में सक्षम है। कमलेश पटेल के अनुसार, अब तक करीब 350 लोग यह किट खरीद चुके हैं।
उल्लेखनीय यह है कि यह किट केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है — आम उपभोक्ता भी घर पर खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक जांच के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। यह एक ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन में मिठाइयों की माँग और आपूर्ति दोनों अपने चरम पर होती हैं।
जल संरक्षण और अवैध कनेक्शन पर सख्ती
AMC ने दीपावली के मौके पर केवल खाद्य सुरक्षा नहीं, बल्कि जल प्रबंधन पर भी कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। कार वॉशिंग सेंटर, पेइंग गेस्ट आवास, लॉजिंग और बोर्डिंग जैसे अधिक पानी उपयोग करने वाले प्रतिष्ठानों की विशेष जांच की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान यदि अवैध जल कनेक्शन पाए गए, तो उन्हें तत्काल नियमानुसार काटा जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
हादसों की जांच और सुरक्षा की समीक्षा
बीते 15 दिनों में अहमदाबाद में हुई दो घटनाओं — जिनमें एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़ी घटना भी शामिल है — की विस्तृत जांच कराने का फैसला लिया गया है। पटेल ने स्पष्ट किया कि जांच में यह देखा जाएगा कि काम के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं।
महत्वपूर्ण यह है कि इस बार केवल ठेकेदारों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा — निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होगी, जो प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक अपेक्षाकृत कठोर रुख माना जा रहा है।
कांकड़िया किड्स सिटी का आधुनिकीकरण और दीपावली रोशनी में कटौती
AMC ने कांकड़िया लेकफ्रंट स्थित किड्स सिटी के आधुनिकीकरण और विस्तार को भी मंजूरी दी है। यहाँ चॉकलेट फैक्ट्री, स्पेस एक्सप्लोरेशन सेंटर, 'खेलो इंडिया' स्पोर्ट्स अकादमी, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्र, एयरोडायनमिक्स एवं फ्लाइट साइंस लैब और ड्रोन लैब सेंटर जैसी नई सुविधाएँ शुरू होंगी।
बिजली बचत की दृष्टि से इस वर्ष दीपावली पर सार्वजनिक रोशनी सीमित रखी जाएगी। धनतेरस से लाभ पंचम तक केवल सात स्थानों — साबरमती नदी के छह पुल और भद्रकाली माता मंदिर — पर रोशनी होगी। रोशनी का समय शाम 7 बजे से रात 1 बजे तक सीमित रहेगा, हालाँकि दीपावली और गुजराती नववर्ष (बेस्टू वरस) की रात पूरी रात रोशनी जारी रहेगी।
AMC के इन बहुआयामी फैसलों से स्पष्ट है कि नगर निगम त्योहारी सीजन में नागरिक सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य तीनों मोर्चों पर एक साथ सक्रिय है — आने वाले दिनों में इन निर्देशों के क्रियान्वयन की प्रभावशीलता ही इस पहल की असली परीक्षा होगी।