अखिलेश यादव वाराणसी पहुंचे, बोले — भाजपा हटे तभी बनारस मुस्कुराएगा; मेट्रो का वादा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 3 नवंबर 2026 को वाराणसी पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि काशी की जनता ने विधान परिषद चुनाव में भाजपा को 'डबल हार और डबल जीरो' देकर उसके विकास के दावों की कलई खोल दी है। एमएलसी चुनाव में सपा की जीत के बाद यह उनकी पहली वाराणसी यात्रा थी।
एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत, भाजपा पर हमला
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने अखिलेश यादव का उत्साहपूर्ण स्वागत किया। एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो लोग 'डबल इंजन और डबल रफ्तार' के विकास की बात करते थे, उन्हें बनारस की जनता ने 'डबल हार' का जवाब दिया है। विधान परिषद चुनाव में सपा नेताओं आशुतोष सिन्हा और लाल बिहारी यादव की जीत को उन्होंने जनता का भाजपा को 'नकारने का संदेश' बताया।
वाराणसी में मेट्रो का वादा
अखिलेश यादव ने वाराणसी की यातायात व्यवस्था को निशाना बनाते हुए कहा कि शहर में जाम की समस्या लगातार बनी हुई है और भाजपा सरकार इसे सुधारने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने ऐलान किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर वाराणसी में मेट्रो का निर्माण कराया जाएगा, जिससे शहरवासियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। यह वादा ऐसे समय आया है जब वाराणसी में बुनियादी ढाँचे की कमी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनती जा रही है।
रोपवे और स्टेडियम पर सवाल
सपा प्रमुख ने रोपवे और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि इन परियोजनाओं के सहारे पूरे पूर्वांचल को जीतने की बात की जा रही है, जबकि काशी के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'सबसे पहले धोखा देने वाले लखनऊ वाले ही हैं।' उन्होंने किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और शहर में गंदगी को भी प्रमुखता से उठाया।
दिवंगत सपा नेता को श्रद्धांजलि
वाराणसी दौरे के दौरान अखिलेश यादव डाफी स्थित दिवंगत सपा नेता राजेश यादव नत्थू के आवास पर पहुंचे। उन्होंने राजेश यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनकी पत्नी चंदा यादव सहित परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। इस मौके पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित थे।
आगे का सियासी अर्थ
गौरतलब है कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और इसे भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है। विधान परिषद में सपा की जीत को विपक्ष ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मनोबल बढ़ाने वाले संकेत के रूप में पेश किया है। अखिलेश का यह दौरा सपा के उस रणनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें पार्टी भाजपा के मज़बूत माने जाने वाले शहरी क्षेत्रों में सेंध लगाना चाहती है।