29 अक्टूबर 2026
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वाराणसी MLC हार पर राजभर का पलटवार: 'पढ़े-लिखों का वोट, असली ताकत 2027 विधानसभा में दिखेगी'

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वाराणसी MLC हार पर राजभर का पलटवार: 'पढ़े-लिखों का वोट, असली ताकत 2027 विधानसभा में दिखेगी'

सारांश

वाराणसी MLC में BJP की हार को राजभर ने 'पढ़े-लिखों का चुनाव' बताकर खारिज किया। उनका दावा है — 14 करोड़ मतदाताओं वाले विधानसभा चुनाव से इस छोटे चुनाव की तुलना बेमानी है। असली दंगल 2027 में होगा, जहाँ सरकारी योजनाओं के लाभार्थी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

मुख्य बातें

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 29 अक्टूबर 2026 को वाराणसी एमएलसी हार को 'पढ़े-लिखे मतदाताओं का वोट' बताकर खारिज किया।
उन्होंने कहा — एमएलसी चुनाव में 6 लाख से अधिक वोट पड़े, जबकि विधानसभा में 8 करोड़ से ज़्यादा मतदाता हिस्सा लेंगे।
अखिलेश यादव के धांधली के आरोप पर बोले — 'हिम्मत है तो सांसद-विधायक इस्तीफा दें।' 28 एमएलसी सीटों में कांग्रेस ने 12 पर चुनाव लड़ा, केवल एक सीट जीती; कर्नाटक में सरकार होने के बावजूद चारों सीटें हारीं।
राजभर ने गोरखपुर उदाहरण देते हुए सपा के 'पीडीए' को 'सिर्फ यादववाद' करार दिया।
सुभासपा प्रमुख ने 2027 विधानसभा चुनाव को असली 'ताकत की परीक्षा' बताया।

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 29 अक्टूबर 2026 को अंबेडकर नगर में वाराणसी एमएलसी सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के तुलनात्मक दावों को सिरे से खारिज कर दिया। राजभर ने कहा कि यह चुनाव पढ़े-लिखे मतदाताओं तक सीमित था और आम जनता घर पर बैठी रही — विधानसभा चुनाव की असली परीक्षा 2027 में होगी।

मतदाता संख्या का तर्क

राजभर ने आँकड़ों के हवाले से कहा, '14 लाख से ऊपर मतदाताओं ने इस चुनाव में हिस्सा लिया और लगभग 6 लाख से ऊपर लोगों ने वोट दिया।' उन्होंने इसे विधानसभा चुनाव से तुलना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा के करीब 14 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से 8 करोड़ से अधिक के मतदान की संभावना है।

उन्होंने तर्क दिया कि गाँवों में किसी जगह पाँच, किसी जगह दस, तो कहीं पचास मतदाताओं ने ही वोट दिए — जबकि उन गाँवों में मतदाता सूची में 1,500 से 4,000 तक नाम हैं। उनके अनुसार, जो लोग सरकारी आवास, शौचालय, सड़क, आयुष्मान कार्ड, पेंशन और अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं, वे इस एमएलसी चुनाव के मतदाता थे ही नहीं — वे 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अखिलेश के धांधली आरोप पर पलटवार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के धांधली के आरोपों पर राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'हिम्मत है तो सांसद, विधायक और एमएलसी इस्तीफा दें। यदि ये सब धांधली और बेईमानी से जीत रहे हैं, तो इन सबको इस्तीफा दे देना चाहिए।' राजभर ने यह भी कहा कि यह सिर्फ कहने भर की बात है क्योंकि 'वे घबरा रहे हैं।'

राजभर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, 'अखिलेश जी, एमएलसी चुनाव के नतीजों में आपकी पार्टी के प्रदर्शन की आपको बहुत बधाई। वैसे ये बताइए, अपने मित्र राहुल जी को बधाई दिए या नहीं?'

कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बैलेट पेपर और वोट चोरी वाले बयान पर राजभर ने कहा कि जहाँ-जहाँ बैलेट पेपर से चुनाव हुए, वहाँ कांग्रेस कई राज्यों में जीरो पर आउट हो गई। उन्होंने कहा, 'अब तो ये कहने लायक भी नहीं रह गए कि बैलेट पेपर से चुनाव करा दो, तो हम जीत जाएंगे।'

राजभर ने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस ने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल एक सीट जीत सकी। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी चारों सीटें हार गई।

गोरखपुर और पीडीए पर सवाल

राजभर ने गोरखपुर एमएलसी सीट का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन की अवधारणा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया, जबकि सपा के पूर्व नेता राजीव यादव निर्दलीय लड़े और सपा का वोटर यादव प्रत्याशी को ही वोट देता रहा। राजभर ने कहा, 'इनके यहां सिर्फ यादववाद है।'

उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भरोसा जताया और कहा कि अयोध्या, बनारस जीते — 'मथुरा की बारी है।' साथ ही उन्होंने सपा को नसीहत दी कि सीटों की माँग के समय कांग्रेस को एमएलसी चुनाव के नतीजे अवश्य याद दिलाएं, क्योंकि कांग्रेस 'हिस्सा आधा, समर्थन जीरो' की नीति पर चल रही है।

आगे की राजनीति

राजभर के इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का संकेत माना जा रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एमएलसी चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर सोशल मीडिया के ज़रिए तंज कसा है। आने वाले महीनों में सपा-कांग्रेस गठबंधन की आंतरिक दरारें और गहरी हो सकती हैं, जबकि भाजपा-सुभासपा गठबंधन इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक असुविधाजनक सवाल से बचता है — यदि BJP के शासन-लाभार्थी घर बैठे रहे, तो क्या पार्टी का ज़मीनी संगठन इन्हें मतदान के लिए प्रेरित करने में विफल रहा? MLC चुनाव छोटे ज़रूर होते हैं, लेकिन वाराणसी जैसी प्रतिष्ठित सीट पर हार को महज 'मतदाता संरचना' के हवाले से नकारना 2027 की तैयारियों में कमज़ोरियाँ ढकने का जोखिम उठाता है। कांग्रेस के एमएलसी प्रदर्शन पर तंज वाजिब है — 12 में से सिर्फ 1 सीट और कर्नाटक में सरकार होने पर भी सफाया — लेकिन यह BJP की अपनी खामियों से ध्यान भटकाने का भी औज़ार है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी MLC चुनाव में BJP की हार पर राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने कहा कि यह पढ़े-लिखे मतदाताओं का चुनाव था और आम जनता मतदान में शामिल नहीं हुई। उनके अनुसार सरकारी योजनाओं के लाभार्थी 2027 के विधानसभा चुनाव में असली ताकत दिखाएंगे।
2026 एमएलसी चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस ने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल एक सीट जीत सकी। कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद पार्टी चारों सीटें हार गई।
अखिलेश यादव के धांधली के आरोप पर राजभर ने क्या जवाब दिया?
राजभर ने अखिलेश पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि वाकई धांधली हुई है, तो सांसद, विधायक और एमएलसी सभी को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने इस बयान को 'घबराहट' करार दिया।
राजभर ने सपा के पीडीए पर क्या सवाल उठाए?
राजभर ने गोरखपुर एमएलसी सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि सपा का वोट केवल यादव प्रत्याशी को मिला, जबकि ब्राह्मण उम्मीदवार संजयन त्रिपाठी को नहीं। उन्होंने सपा के पीडीए को 'सिर्फ यादववाद' बताया।
राजभर ने कांग्रेस और सपा के गठबंधन पर क्या कहा?
राजभर ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी 'हिस्सा आधा, समर्थन जीरो' की नीति पर चल रही है। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह दी कि सीट बँटवारे के समय कांग्रेस को एमएलसी चुनाव के नतीजे ज़रूर याद दिलाएं।
राष्ट्र प्रेस
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