एकेटीयू के दो शिक्षक ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स 2025 की टॉप-5% सूची में, लखनऊ का बढ़ा मान
सारांश
मुख्य बातें
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), लखनऊ के दो शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है — ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स 2025 ने उन्हें विश्वभर के सक्रिय शोधकर्ताओं में शीर्ष 5 प्रतिशत में शामिल किया है। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अरुण तिवारी और सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज के मेकाट्रॉनिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुज कुमार शर्मा को यह प्रतिष्ठित मान्यता मिली है।
ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स क्या है और मानदंड क्या हैं
ग्लोबल साइंटिस्ट इंडेक्स 2025, एस सीआई रैंक ग्लोबल द्वारा प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक रैंकिंग मंच है, जो ओपन एलेक्स डेटाबेस के आधार पर विश्वभर के शोधकर्ताओं के प्रकाशनों और उनके प्रभाव का मूल्यांकन करता है। इस सूची में सम्मिलित होने के लिए शोधकर्ता के पास कम से कम 10 सत्यापित शोध प्रकाशन होना अनिवार्य है। रैंकिंग प्रकाशनों की संख्या और शोध पत्रों को प्राप्त उद्धरणों (साइटेशन) के आधार पर तैयार किए गए 'नॉर्मलाइज्ड कंपोजिट स्कोर' से निर्धारित होती है।
दोनों शिक्षकों की पूर्व उपलब्धियाँ
यह पहली बार नहीं है जब इन दोनों शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एकेटीयू का परचम लहराया हो। इससे पहले वे स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं की सूची में भी स्थान पा चुके हैं। डॉ. अनुज कुमार शर्मा को वर्ष 2021 से लगातार इस सूची में शामिल किया जाता रहा है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक असाधारण मिसाल है।
डॉ. अनुज कुमार शर्मा का शोध योगदान
डॉ. अनुज कुमार शर्मा वर्तमान में कलाम सेंटर फॉर इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन ऑफ स्टार्टअप एकेटीयू फाउंडेशन के निदेशक भी हैं। उनके 125 से अधिक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नलों और सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुके हैं, तथा उनके नाम 9 पेटेंट स्वीकृत या प्रकाशित हैं। वह भारत सरकार के MeitY, ICMR, SERB-DST, उत्तर प्रदेश सरकार की CST, TEQIP-III तथा एकेटीयू द्वारा वित्तपोषित 6 प्रमुख परियोजनाओं में मुख्य अन्वेषक की भूमिका निभा चुके हैं।
वर्ष 2025 में उन्हें उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा 'अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा शिक्षक दिवस पर उन्हें एकेटीयू का 'सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार' भी मिल चुका है। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी टीम ने कई तकनीकी उत्पाद विकसित किए, जिनका प्रदर्शन राजभवन में भी हुआ, और इस योगदान के लिए उन्हें 'कोरोना योद्धा' सम्मान से नवाजा गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
एकेटीयू के कुलपति प्रोफेसर जेपी पांडे ने दोनों शिक्षकों को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की बड़ी सफलता बताया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल एकेटीयू बल्कि उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं शोध जगत के लिए भी गर्व का विषय है।
युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के तकनीकी विश्वविद्यालयों में शोध संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अंतरराष्ट्रीय मान्यता युवा शोधकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करती है। आने वाले वर्षों में एकेटीयू से और अधिक शोधकर्ताओं के इस तरह की वैश्विक सूचियों में शामिल होने की संभावना है।