दिल्ली हाईकोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन सिद्दीकी को 7 दिन की कस्टडी पैरोल दी, पत्नी को स्टेज-4 कैंसर
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को सात दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर की है। अदालत ने यह राहत उनकी पत्नी की अत्यंत गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दी — सिद्दीकी की पत्नी स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और 10 नवंबर को उनकी कीमोथेरेपी का अगला सत्र निर्धारित है।
अदालत का आदेश और याचिका
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। सिद्दीकी ने पत्नी की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत अथवा कस्टडी पैरोल दिए जाने की माँग की थी। अदालत ने पारिवारिक परिस्थितियों और चिकित्सीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कस्टडी पैरोल की अनुमति दी।
उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सिद्दीकी की रिहाई का विरोध किया था। ईडी ने अदालत में दलील दी कि सिद्दीकी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और उनकी पैरोल उचित नहीं होगी। इसके बावजूद अदालत ने मानवीय आधार पर पैरोल स्वीकृत की।
कस्टडी पैरोल क्या होती है
कस्टडी पैरोल के अंतर्गत किसी विचाराधीन कैदी को पुलिस सुरक्षा में एक निर्धारित स्थान तक ले जाया जाता है। इस दौरान वह पुलिस की निगरानी में रहता है और उसे अदालत द्वारा तय शर्तों का पूर्ण पालन करना होता है। यह सामान्य ज़मानत से अलग होती है क्योंकि इसमें बंदी की स्वतंत्रता सीमित रहती है।
लाल किला ब्लास्ट मामले की पृष्ठभूमि
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 24 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर रही है। अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप इस ब्लास्ट मामले के बाद व्यापक रूप से सुर्खियों में आया था।
एनआईए ने इस मामले में 12 आरोपियों के खिलाफ करीब 75 हज़ार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जाँच एजेंसी के अनुसार, धमाके का मुख्य साजिशकर्ता उमर उन नबी था, जो एक आत्मघाती हमलावर था और इस विस्फोट में मारा गया। उसका नाम भी चार्जशीट में शामिल किया गया है। अन्य नामजद आरोपियों में जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद, जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश, डॉ. आदिल अहमद, यासिर अहमद डार, डॉ. मुजम्मिल शकील, आमिर राशिद अली, अहमद डार और शोएब शामिल हैं।
न्यायिक हिरासत और अगली सुनवाई
राऊज एवेन्यू कोर्ट की विशेष एनआईए अदालत ने लाल किला ब्लास्ट मामले में सभी 11 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर तक बढ़ा दी है। आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। अदालत में आरोप तय करने के संबंध में अगली सुनवाई 21 नवंबर को निर्धारित की गई है।
यह मामला भारत में आतंकवाद और वित्तपोषण से जुड़े उन मामलों की श्रेणी में आता है, जहाँ एनआईए और ईडी की संयुक्त जाँच चल रही है। आरोप-पत्र की विशालता — 75 हज़ार पन्ने — इस जाँच की जटिलता और व्यापकता को दर्शाती है। आने वाली 21 नवंबर की सुनवाई में आरोप तय होने पर मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।