अंबाला कार बम धमाका: एनआईए ने पाकिस्तानी आतंकवादी शहजाद भट्टी समेत 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 11 जुलाई 2026 को अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन के पार्किंग क्षेत्र में इस वर्ष जनवरी में हुए कार बम विस्फोट मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन आरोपियों में पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकवादी बने शहजाद भट्टी का नाम प्रमुखता से शामिल है, जो अन्य आतंकवाद-संबंधी मामलों में भी वांछित है।
चार्जशीट में किन धाराओं के तहत आरोप
भट्टी और गिरफ्तार किए गए सात भारतीय नागरिकों के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 और दूरसंचार अधिनियम 2023 की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं। यह चार्जशीट हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष एनआईए न्यायालय में प्रस्तुत की गई है।
आरोपियों की पहचान
पाकिस्तानी नागरिक और हैंडलर शहजाद भट्टी के अतिरिक्त, चार्जशीट में नामित अन्य सात आरोपी हैं — करमजीत सिंह उर्फ टोनी, आकाश, सौरव उर्फ सोबी, रमन कुमार, सत्यम, सुखदेव सिंह उर्फ सुखा और अमरजीत सिंह उर्फ अंबी। जांच के अनुसार, आकाश भट्टी का भारत-स्थित मुख्य ऑपरेटिव था, जो सह-आरोपियों के साथ मिलकर हमलों का समन्वय करने के लिए जिम्मेदार था।
साजिश का विवरण और मकसद
एनआईए की जांच के अनुसार, भट्टी ने भारत में ऑपरेशनल मॉड्यूल तैयार किए थे और स्थानीय ऑपरेटिव्स को पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमले करने हेतु लॉजिस्टिक्स व विस्फोटक सामग्री जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, साजिश का स्पष्ट मकसद पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर आम जनता में दहशत फैलाना था।
जांच में यह भी सामने आया कि संभावित लक्ष्यों की पूर्व रेकी के बाद बलदेव नगर पुलिस स्टेशन को विशेष रूप से चुना गया था। कुछ आरोपियों ने गैस सिलेंडर और विस्फोटक सामग्री से भरी कार को पुलिस स्टेशन परिसर में खड़ा किया और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से घटनास्थल का वीडियो भी रिकॉर्ड किया।
डिजिटल नेटवर्क और भर्ती का तरीका
एनआईए की जांच से खुलासा हुआ है कि भट्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के जरिए आरोपियों की भर्ती की और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित किया। डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ है कि हमले की योजना के दौरान सभी आरोपी अपने हैंडलर के निरंतर संपर्क में थे।
गौरतलब है कि यह मामला उस व्यापक पैटर्न की कड़ी है जिसमें पाकिस्तान-स्थित हैंडलर एन्क्रिप्टेड चैनलों के माध्यम से भारतीय युवाओं को भर्ती कर सीमा पार से आतंकी मॉड्यूल संचालित करते हैं। अब मामला विशेष एनआईए न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की सुनवाई तय होनी है।