10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला 22 जून से शुरू, 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला 22 जून से शुरू, 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

सारांश

पूर्वी भारत का सबसे बड़ा तांत्रिक धार्मिक आयोजन — अंबुबाची मेला — 22 जून से कामाख्या मंदिर में शुरू हो रहा है। देवी के वार्षिक मासिक धर्म चक्र के प्रतीक इस चार दिवसीय उत्सव में 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। मंदिर 26 जून को पुनः खुलेगा।

मुख्य बातें

कामाख्या मंदिर , गुवाहाटी में अंबुबाची मेला 22 जून 2026 से शुरू हो रहा है।
मेला चार दिन तक चलेगा; 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद।
'प्रवृत्ति' अनुष्ठान 22 जून की रात 9:08:42 बजे होगा; इसके बाद मंदिर तीन दिन बंद रहेगा।
मंदिर 26 जून को 'निवृत्ति' अनुष्ठान के बाद पुनः खुलेगा; भक्त पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र प्राप्त कर सकेंगे।
कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित है।
असम सरकार ने सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आवास की विशेष व्यवस्था की है।

असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में पूर्वी भारत का सबसे बड़ा तांत्रिक धार्मिक आयोजन — अंबुबाची मेला22 जून 2026 (सोमवार) से शुरू हो रहा है। चार दिवसीय इस मेले में देश-विदेश से 8 लाख से अधिक श्रद्धालु, तीर्थयात्री, साधु-संत और पर्यटकों के आने की उम्मीद मंदिर प्रशासन ने जताई है। यह आयोजन देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र के उत्सव के रूप में मनाया जाता है और शक्ति उपासना परंपरा में इसका विशेष स्थान है।

अनुष्ठान और मंदिर का कार्यक्रम

कामाख्या मंदिर प्रशासन के अनुसार, पवित्र 'प्रवृत्ति' समारोह 22 जून की रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर आरंभ होगा, जो इस पावन काल की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। इस अनुष्ठान के आरंभ होते ही मंदिर के द्वार तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाएंगे और इस अवधि में भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

मंदिर 26 जून की प्रातः 'निवृत्ति' अनुष्ठान और नित्य पूजा के पूर्ण होने के बाद पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। मंदिर खुलने के बाद हज़ारों भक्त पवित्र 'अंगोदक' और 'अंगवस्त्र' प्राप्त करने के लिए उमड़ पड़ते हैं, जिन्हें अत्यंत शुभ माना जाता है।

आस्था और परंपरा का महत्व

नारी शक्ति और सृजन ऊर्जा के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला अंबुबाची मेला, देवी कामाख्या को दैवीय स्त्री रचनात्मक शक्ति — सृजन शक्ति — के साक्षात् स्वरूप के रूप में पूजता है। तांत्रिक परंपराओं को मानने वाले साधकों के लिए यह मेला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मंदिर के भीतर तीन दिनों तक सभी धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं, जो देवी के एकांतवास का प्रतीकात्मक पालन है।

गौरतलब है कि नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसे हिंदू धर्म के सर्वाधिक पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब शक्ति उपासना से जुड़े आयोजनों में देश भर से श्रद्धालुओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

प्रशासन की तैयारियाँ

असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने मेले के सुचारू संचालन के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं। सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती, स्वास्थ्य सेवा शिविर, स्वच्छता प्रबंधन, आवास और भोजन वितरण की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि लाखों तीर्थयात्रियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

गुवाहाटी बनेगा आध्यात्मिक केंद्र

हर वर्ष अंबुबाची मेला गुवाहाटी को धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के एक जीवंत केंद्र में बदल देता है। देश के कोने-कोने से साधु-संत, तांत्रिक साधक और सामान्य श्रद्धालु यहाँ एकत्र होते हैं। अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, और तैयारियाँ उसी के अनुरूप की गई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सांस्कृतिक आख्यान का हिस्सा है जो स्त्री शरीर को पवित्रता के रूप में पुनर्परिभाषित करता है — एक ऐसे समाज में जहाँ मासिक धर्म को अक्सर वर्जित माना जाता है। यह विरोधाभास ही इस उत्सव को वैश्विक स्तर पर चर्चित बनाता है। साथ ही, 8 लाख श्रद्धालुओं के जमावड़े के लिए प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक परीक्षा भीड़ प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से होगी — जो पिछले वर्षों में चुनौतीपूर्ण रही हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबुबाची मेला 2026 कब और कहाँ होगा?
अंबुबाची मेला 22 जून 2026 से असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में शुरू होगा और 26 जून तक चलेगा। यह चार दिवसीय आयोजन है जिसमें मंदिर तीन दिन बंद रहता है।
अंबुबाची मेले में मंदिर क्यों बंद रहता है?
मान्यता के अनुसार इन तीन दिनों में देवी कामाख्या का वार्षिक मासिक धर्म चक्र होता है। इस पवित्र एकांतवास के प्रतीक स्वरूप मंदिर के दरवाजे बंद रखे जाते हैं और सभी धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं।
मंदिर 2026 में कब खुलेगा और क्या मिलेगा भक्तों को?
मंदिर 26 जून 2026 की सुबह 'निवृत्ति' अनुष्ठान के बाद खुलेगा। इसके बाद भक्त पवित्र 'अंगोदक' और 'अंगवस्त्र' प्राप्त कर सकेंगे, जिन्हें अत्यंत शुभ माना जाता है।
कामाख्या मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
कामाख्या मंदिर असम की नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह हिंदू धर्म के सर्वाधिक पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है और तांत्रिक परंपराओं के साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है।
अंबुबाची मेले में कितने श्रद्धालु आते हैं और क्या व्यवस्थाएँ हैं?
इस वर्ष 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। असम सरकार और मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, आवास और भोजन वितरण की विशेष व्यवस्था की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले