कामाख्या मंदिर में 22 जून से अंबुबाची मेला, 26 जून को खुलेंगे कपाट; लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में 22 जून 2026 से पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक अंबुबाची मेला शुरू होने जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि 22 जून की रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ मेले का आगाज़ होगा और इसके बाद मंदिर के कपाट तीन दिनों तक बंद रहेंगे। 26 जून की सुबह नित्य पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला जाएगा।
अंबुबाची मेला: क्या है यह आयोजन
अंबुबाची मेला शक्ति उपासना से जुड़ा भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। मान्यता है कि इस विशेष काल में मां कामाख्या अपने वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) काल से गुजरती हैं, जो धरती माता की उर्वरता और सृजन-शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा के अनुयायियों, साधु-संतों और हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।
मुख्य अनुष्ठान और कपाट बंद रहने की अवधि
22 जून की रात 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस तीन दिवसीय विशेष काल में गर्भगृह में किसी भी श्रद्धालु का प्रवेश वर्जित रहेगा और नियमित धार्मिक अनुष्ठान भी स्थगित रहेंगे। यह देवी के एकांतवास का प्रतीक माना जाता है।
26 जून की सुबह नित्य पूजा (नियमित पूजा) पूर्ण होने के पश्चात मंदिर के द्वार पुनः खोले जाएंगे। कपाट खुलते ही देश-विदेश से आए श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं और पवित्र अंगोदक तथा अंगवस्त्र प्राप्त करते हैं, जिन्हें अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
कामाख्या मंदिर का महत्व
कामाख्या मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है और तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ियों पर विराजमान यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष इस मेले में देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु और आध्यात्मिक साधक पहुंचते हैं।
तैयारियां और प्रशासनिक व्यवस्था
मंदिर प्रशासन के अनुसार, लाखों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों के स्वागत के लिए व्यापक इंतज़ाम किए जा रहे हैं। असम राज्य सरकार भी मंदिर प्रशासन के साथ मिलकर इस विशाल आयोजन को सुचारु और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटी है। यह मेला हर वर्ष गुवाहाटी को धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना देता है।
आगे क्या
मेले के दौरान 26 जून को कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। यह आयोजन पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उत्सव है।